वार्ड-15 के खसरा 2006/1/1 पर भू-माफिया का दोबारा कब्जा,तहसीलदार के आदेश को पटवारी ने ठंडे बस्ते में डाला, नगर परिषद की पाइपलाइन तोड़ी
Junaid Khan - शहडोल। जयसिंहनगर क्षेत्र में रसूखदारों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि अब उन्हें न तो कानून का खौफ है और न ही राजस्व न्यायालय के आदेशों का डर। स्थानीय वार्ड क्रमांक-15 से प्रशासनिक साख को बट्टा लगाने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां तहसीलदार के स्पष्ट बेदखली आदेश के बावजूद शासकीय भूमि पर न केवल अवैध रूप से दुकान का निर्माण किया जा रहा है, बल्कि सरकारी संपत्ति को भी भारी नुकसान पहुंचाया गया है। इस पूरे खेल में हल्का पटवारी की भूमिका घोर लापरवाही और संदेहास्पद संरक्षण की ओर इशारा कर रही है, जिससे क्षेत्र में 'अंधेर नगरी-चौपट राजा' वाली स्थिति निर्मित हो गई है। पूर्व में प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों और जन-शिकायतों का संज्ञान लेने के बजाय जिम्मेदार अफसर कुंभकर्णी नींद सो रहे हैं।
राजस्व कोर्ट का आदेश बेअसर, रसूख के आगे बौना साबित हुआ तंत्र
पूरा मामला खसरा क्रमांक 2006/1/1 की लगभग 0.012 हेक्टेयर बेशकीमती शासकीय भूमि से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, देवेंद्र पांडे (पिता अयोध्या प्रसाद पांडे) एवं अतुल पांडे (पिता बाल गोविंद पांडे) द्वारा इस सरकारी जमीन पर पक्का निर्माण कर दुकान तानने का दुस्साहस किया जा रहा है। शिकायत के बाद पटवारी के प्रतिवेदन पर तहसीलदार जयसिंहनगर ने बकायदा राजस्व प्रकरण क्रमांक 0051/अ-68/2025-26 के तहत बेदखली का कड़ा आदेश पारित किया था। नियमानुसार इस आदेश के तुरंत बाद अतिक्रमण ढहा दिया जाना चाहिए था, लेकिन आरोप है कि हल्का पटवारी मेला राम ने इस आदेश को फाइलों में दबाए रखा। पटवारी की इसी 'रहस्यमयी खामोशी' का फायदा उठाकर अतिक्रमणकारियों ने रात-दिन एक करके निर्माण कार्य को और तेज कर दिया, जो सीधे तौर पर तहसीलदार कोर्ट की अवमानना है।
एसडीएम की मेहनत पर फेरा पानी,सरकारी पाइपलाइन भी कर दी क्षतिग्रस्त
यह कोई पहला मौका नहीं है जब इस जमीन पर गिद्ध दृष्टि डाली गई हो। इसके पूर्व तत्कालीन निवर्तमान एसडीएम रमेश मिश्रा ने कड़ा रुख अपनाते हुए खुद खड़े होकर इस भूमि से अवैध कब्जा हटवाया था और आम जनता की सहूलियत के लिए सड़क का निर्माण कराया था। लेकिन जैसे ही सिंघम अफसर की विदाई हुई, भू-माफिया ने दोबारा पैर पसार लिए। हद तो तब हो गई जब दुकान की नींव खोदने के चक्कर में नगर परिषद की मुख्य पानी सप्लाई पाइपलाइन को भी जेसीबी से क्षतिग्रस्त कर दिया गया। इसके चलते पूरे वार्ड में पेयजल संकट गहराने की आशंका पैदा हो गई है। नगर परिषद के जल प्रभारी दीपक चतुर्वेदी ने स्वीकार किया कि इस घोर लापरवाही पर अतिक्रमणकर्ताओं को नोटिस जारी किया गया है और आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।
सवालों के घेरे में 'साहब' की चुप्पी,क्या मूकदर्शक बना रहेगा जिला प्रशासन?
सरकारी जमीन पर सरेआम चल रहे इस बुल्डोजर-चैलेंज ने पटवारी से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है। जब एक छोटे से पटवारी के कारण तहसीलदार के आदेश की धज्जियां उड़ रही हों, तो आम जनता का न्याय प्रणाली से भरोसा उठना लाजिमी है। इस पूरे महाघोटाले और प्रशासनिक विफलता पर जब जयसिंहनगर तहसीलदार श्रीमती सुषमा धुर्वे से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो हमेशा की तरह उनसे संपर्क नहीं हो सका। अधिकारियों की यह 'रहस्यमयी चुप्पी'और पटवारी की 'मेहरबानी' क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन के आला अधिकारी इस खुली चुनौती को स्वीकार कर भू-माफिया पर रासुका और मप्र लोक परिसर (बेदखली) अधिनियम के तहत जेल भेजने की कार्रवाई करते हैं, या फिर यूं ही कागजी नोटिसों का खेल चलता रहेगा।
