धूल में दम तोड़ती ज़िंदगी,शहडोल-टेटका सड़क निर्माण में ठेकेदार की लापरवाही से जनता बेहाल
Junaid Khan - शहडोल। विकास के नाम पर बनाई जा रही सड़क यदि लोगों के लिए परेशानी, बीमारी और खतरे का कारण बन जाए, तो यह विकास नहीं बल्कि अव्यवस्था की तस्वीर बन जाती है। शहडोल-रीवा राष्ट्रीय राजमार्ग के सेकेंड फेज अंतर्गत शहडोल से टेटका (जयसिंहनगर) तक लगभग 52 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण कार्य इन दिनों आम जनता के लिए भारी मुसीबत साबित हो रहा है। करीब 164 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इस सड़क परियोजना में 20 मीटर चौड़ा क्षेत्र चिन्हित किया गया है, जिसमें 13-14 मीटर हिस्से में सड़क निर्माण होना है, जबकि शेष क्षेत्र खाली छोड़ा जाएगा। इस परियोजना के लिए लगभग 2400 पेड़ों को काटने के लिए चिन्हित किया गया है, जिससे पर्यावरणीय चिंता भी बढ़ गई है। वहीं दूसरी ओर निर्माण कार्य के दौरान फैली धूल और अव्यवस्था ने पूरे इलाके को संकट में डाल दिया है।
धूल का गुबार बना सड़क मार्ग
निर्माणाधीन सड़क की स्थिति इतनी बदहाल हो चुकी है कि राहगीरों, बाइक सवारों और ग्रामीणों का निकलना तक मुश्किल हो गया है। सड़क पर जगह-जगह उखड़ी मिट्टी, गड्ढे और भारी वाहनों की आवाजाही के कारण हर समय धूल के गुबार उड़ रहे हैं। हालत यह है कि वाहन गुजरते ही आसपास का वातावरण धुएं जैसी धूल से भर जाता है। धूल सीधे लोगों की आंखों और सांसों तक पहुंच रही है, जिससे एलर्जी, आंखों में जलन, खांसी और सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ने लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार छोटे बच्चे और बुजुर्ग घरों से बाहर निकलने में भी परेशानी महसूस कर रहे हैं।
ठेकेदार पर मनमानी के आरोप
स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्य में लगे ठेकेदार पर गंभीर लापरवाही और मनमानी के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण के दौरान नियमित रूप से पानी का छिड़काव नहीं कराया जा रहा, जबकि धूल नियंत्रण के लिए यह सबसे जरूरी प्रक्रिया मानी जाती है।
निर्माण स्थल पर सुरक्षा मानकों की भी अनदेखी की जा रही है। कहीं चेतावनी बोर्ड नहीं लगाए गए हैं, न ही पर्याप्त बैरिकेडिंग की गई है। इससे दुर्घटनाओं की आशंका लगातार बनी हुई है। बाइक सवार फिसलकर घायल हो रहे हैं और राहगीरों को जान जोखिम में डालकर गुजरना पड़ रहा है। नियमों की खुली अनदेखी सड़क निर्माण कार्यों में पर्यावरण संरक्षण और जनसुरक्षा के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए गए हैं। निर्माण एजेंसी को धूल नियंत्रण के लिए नियमित पानी का छिड़काव, निर्माण सामग्री का सुरक्षित प्रबंधन और आवागमन को सुचारु बनाए रखने की जिम्मेदारी होती है। लेकिन यहां हालात इसके बिल्कुल उलट नजर आ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि संबंधित विभाग के अधिकारी भी ठेकेदार की लापरवाही पर आंखें मूंदे हुए हैं, जिसके कारण जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जनता ने उठाई कार्रवाई की मांग। ग्रामीणों और राहगीरों ने प्रशासन से मांग की है कि सड़क निर्माण कार्य की गुणवत्ता और सुरक्षा व्यवस्था की तत्काल जांच कराई जाए। साथ ही नियमित पानी का छिड़काव, धूल नियंत्रण के प्रभावी उपाय और सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जाए। लोगों का कहना है कि विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन जनता की सेहत और सुरक्षा की कीमत पर नहीं। यदि समय रहते जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।
