शिकायत के बाद भी कार्रवाई धीमी, समाज में उठे सवाल क्या गौ सेवकों की सुरक्षा भगवान भरोसे?
Junaid Khan - शहडोल। जिले में गौ रक्षा और समाज सेवा से जुड़े लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता का माहौल बनता दिखाई दे रहा है। शहर के सक्रिय गौ रक्षक विक्की जोटवानी को अज्ञात मोबाइल नंबर से कथित रूप से गाली-गलौज और जान से मारने की धमकियां मिलने के मामले में पुलिस की कार्रवाई पर अब सवाल उठने लगे हैं। शिकायत दर्ज होने के लगभग 12 दिन बाद भी पुलिस अब तक यह स्पष्ट नहीं कर पाई है कि धमकी देने वाला मोबाइल नंबर किसके नाम से पंजीकृत है और उसके पीछे कौन व्यक्ति है। जानकारी के अनुसार विक्की जोटवानी द्वारा 23 अप्रैल 2026 को थाना कोतवाली शहडोल में लिखित आवेदन देकर बताया गया था कि उन्हें लगातार अज्ञात नंबर से कॉल और मैसेज किए जा रहे हैं, जिनमें अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए गंभीर धमकियां दी जा रही हैं। आवेदन में उन्होंने स्वयं एवं अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर आशंका भी जताई थी। मामले को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी दिखाई दे रही है। नागरिकों का कहना है कि गौ रक्षा से जुड़े लोग अक्सर रात-दिन बिना किसी स्वार्थ के घायल और बीमार गौवंश की सेवा के लिए निकल पड़ते हैं। कई बार किसी अनजान व्यक्ति की सूचना पर भी वे तत्काल मौके पर पहुंच जाते हैं। ऐसे में यदि कोई असामाजिक तत्व झूठी सूचना देकर किसी गौ रक्षक को सुनसान स्थान पर बुलाकर नुकसान पहुंचाने की साजिश करे, तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती है। लोगों का कहना है कि आधुनिक तकनीक और साइबर जांच के दौर में किसी मोबाइल नंबर की प्राथमिक जानकारी निकालना कोई कठिन प्रक्रिया नहीं मानी जाती, इसलिए इतने दिनों बाद भी जांच का शुरुआती बिंदु स्पष्ट न होना कई सवाल खड़े कर रहा है। हालांकि पुलिस द्वारा जांच जारी होने की बात कही जा सकती है, लेकिन अब तक किसी ठोस प्रगति की जानकारी सार्वजनिक नहीं होने से आमजन में असंतोष बढ़ रहा है। स्थानीय नागरिकों और गौ सेवकों ने पुलिस अधीक्षक शहडोल से मामले में शीघ्र हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समाज सेवा और गौ रक्षा जैसे कार्यों में सक्रिय लोगों को इस प्रकार की धमकियां मिलती रहें और आरोपी बेखौफ रहें, तो इससे समाज में गलत संदेश जाएगा। नागरिकों ने मांग की है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित मोबाइल नंबर की तकनीकी जांच कर जल्द से जल्द आरोपी की पहचान की जाए तथा यदि धमकी के आरोप सही पाए जाते हैं तो विधिसम्मत कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। फिलहाल यह मामला केवल एक व्यक्ति की सुरक्षा का नहीं, बल्कि उन सभी समाजसेवियों के विश्वास और सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बन चुका है, जो बिना किसी निजी स्वार्थ के समाजहित में कार्य कर रहे हैं।
