बेटी की विदाई के आंसुओं के बीच फूटा कानून व्यवस्था का दम,ओदरी में ₹15 लाख की डकैती,05 दिन बाद भी पुलिस के हाथ खाली

खाकी की सुस्ती से सहमा उमरिया,न्याय की गुहार लेकर आईजी दफ्तर पहुंचा पीड़ित परिवार, पुलिसिया गश्त के दावों की खुली पोल


Junaid Khan - शहडोल। उमरिया एक तरफ जहां पूरा परिवार बेटी की विदाई के आंसुओं और खुशी के माहौल में डूबा था, वहीं दूसरी तरफ खाकी की मुस्तैदी का दम भरने वाली पुलिस को ठेंगा दिखाकर बेखौफ बदमाशों ने एक हंसते-खेलते परिवार की जिंदगी भर की कमाई पर डाका डाल दिया। उमरिया जिले के पाली थाना क्षेत्र अंतर्गत ओदरी गांव में मानवता और सुरक्षा को शर्मसार करने वाली एक ऐसी वारदात सामने आई है, जिसने पुलिसिया गश्त और कानून व्यवस्था के खोखले दावों की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं। बेटी की विदाई के महज कुछ ही घंटों बाद, जब थका-हारा परिवार घर के सामने और आंगन में सोया हुआ था, तब अज्ञात शातिर चोरों ने घर के पीछे की दीवार तोड़कर (सेंध लगाकर) अंदर प्रवेश किया और कमरे में रखे ₹15 लाख से अधिक के जेवर, चांदी और नकदी पर साफ हाथ साफ कर दिया। इस दुस्साहसिक वारदात ने पूरे अंचल में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। पाई-पाई जोड़कर बनाई वसीयत ले गए चोर, विदाई के मंडप में पसरा मातम 09 मई की रात हुई इस वारदात ने पीड़ित पिता गंगा यादव को जीते जी मार दिया है। सालों की खून-पसीने की कमाई, जो बेटी के सुनहरे भविष्य और शादी के लिए सहेज कर रखी गई थी, उसे अपराधी पलक झपकते ही उड़ा ले गए। चोरों ने घर के भीतर रखे 03 तोला सोना, करीब 02 किलो चांदी और ₹3 लाख रुपये नगद समेटे और फरार हो गए। शादी वाले घर में जहां शहनाइयों की गूंज थमी भी नहीं थी, वहां अब सन्नाटा और चीख-पुकार मची है। सबसे बड़ा और गंभीर सवाल यह है कि ग्रामीण इलाकों में आखिर पुलिस की गश्त कहाँ गायब है? क्या अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि उन्हें अब कानून का कोई खौफ नहीं रह गया है? 05 दिन की नाकामयाबी के बाद आईजी की शरण में पीड़ित, पाली पुलिस पर उठे सवाल घटना के पांच दिन बीत जाने के बाद भी जब स्थानीय पाली थाना पुलिस के हाथ पूरी तरह खाली रहे और आरोपियों की गिरफ्तारी तो दूर, सुराग तक ढूंढने में पुलिस नाकाम साबित हुई, तब जाकर पीड़ित परिवार का धैर्य टूट गया। स्थानीय स्तर पर सुनवाई न होने से हताश गंगा यादव और उनका परिवार न्याय की गुहार लेकर सीधे आईजी कार्यालय शहडोल पहुंच गया। गुरुवार को आईजी को सौंपे गए आवेदन में पीड़ित ने अपनी आपबीती सुनाते हुए सुरक्षा और त्वरित कार्रवाई की मांग की है। अखबार में इस खबर के प्रमुखता से आने के बाद अब प्रशासनिक गलियारों में भी हड़कंप मच गया है। हालांकि, पाली थाना प्रभारी राजेश मिश्रा का कहना है कि जांच के लिए एक विशेष टीम का गठन किया गया है और जल्द ही आरोपियों तक पहुंचने की उम्मीद है, लेकिन सवाल वही है—'आखिर कब तक' जनता इन खोखले आश्वासनों के भरोसे जिएगी? अवैध गतिविधियों और सुस्त तंत्र को खुली चुनौती: अब तो जागिए हुजूर! यह वारदात सिर्फ एक चोरी नहीं, बल्कि उमरिया और शहडोल संभाग के उन तमाम अवैध तत्वों, अपराधियों और कानून की धज्जियां उड़ाने वालों की बढ़ती हनक का नतीजा है, जो खाकी को अपनी जेब में समझते हैं। जब रक्षक ही मूकदर्शक बने रहेंगे, तो भक्षक इसी तरह ग्रामीण अंचलों को अपना निशाना बनाते रहेंगे। सूत्रों की मानें तो क्षेत्र में सक्रिय अवैध गैंग और संदिग्ध तत्वों पर समय रहते नकेल न कसना ही इस बड़ी वारदात की मुख्य वजह है। अब देखना यह है कि आईजी स्तर पर मामला पहुंचने और मीडिया द्वारा इस सुस्त तंत्र को आईना दिखाने के बाद क्या उमरिया पुलिस गहरी नींद से जागती है, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा। जनता अब आश्वासन नहीं, अपराधियों की सलाखों के पीछे देखना चाहती है।

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