सहायता के नाम पर दिव्यांग विधवा से 3 लाख की डकैती: क्या सो रहा है शहडोल का पुलिस प्रशासन?

जालसाज ऑटो चालक ने अंगूठा लगवाकर खाली कर दिया बैंक खाता; पीड़ित कुसुम कोल दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर,एसपी के कड़े निर्देश के बाद भी धरातल पर कार्रवाई सुस्त 


Junaid Khan - शहडोल। संभाग में मानवता को शर्मसार करने और पुलिसिया तंत्र की संवेदनशीलता पर गहरा प्रश्नचिह्न खड़ा करने वाला एक बेहद गंभीर मामला प्रकाश में आया है। यहाँ एक बेसहारा, दिव्यांग और विधवा महिला की मजबूरी, बेबसी एवं अज्ञानता का फायदा उठाकर एक शातिर जालसाज ने उसके जीवनभर की जमापूंजी पर डाका डाल दिया। सहायता करने का ढोंग रचकर आरोपी ने पीड़िता के बैंक खाते से पूरे 3 लाख रुपये की गाढ़ी कमाई पार कर दी। मीडिया में इस खबर के आने के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप तो मचा है, लेकिन जमीनी स्तर पर दोषी की त्वरित गिरफ्तारी न होना सीधे तौर पर स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली और उनकी मंशा को खुली चुनौती दे रहा है। क्या शहडोल का प्रशासनिक अमला इतना लाचार हो चुका है कि एक लाचार आदिवासी दिव्यांग महिला को न्याय दिलाने के बजाय फाइलों को दबाए बैठा है? घटना की विस्तृत पृष्ठभूमि में जाएं तो पीड़िता कुसुम कोल (निवासी वार्ड नंबर- 28, सिंहपुर रोड, शहडोल) एक पैर से पूर्णतः दिव्यांग हैं। कुछ समय पूर्व एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना में अपना पैर गंवाने के बाद, उन्हें ट्रैक्टर मालिक की ओर से समझौते और सहायता के रूप में 3 लाख रुपये की मुआवजा राशि प्राप्त हुई थी। इस राशि से वह अपने आगे के जीवन और भरण-पोषण की उम्मीद लगाए बैठी थीं। लेकिन इसी बीच विचारपुर निवासी ऑटो चालक योगेश की नीयत डोल गई। उसने खुद को पीड़िता का सबसे बड़ा मददगार और हितैषी दिखाते हुए मदद के बहाने महिला का बैंक खाता खुलवाया। पीड़िता के अशिक्षित होने का घिनौना फायदा उठाते हुए, आरोपी योगेश ने धोखे से उसके अंगूठे के निशान लगवाए और धीरे-धीरे करके खाते से पूरी रकम साफ कर दी। पीड़िता को न तो कभी बैंक की पासबुक दी गई और न ही पैसों के किसी लेनदेन का हिसाब बताया गया, जो इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि यह कोई साधारण धोखाधड़ी नहीं बल्कि एक सुनियोजित आर्थिक अपराध है। इस महाधोखाधड़ी का सनसनीखेज खुलासा तब हुआ जब पीड़िता कुसुम कोल को अपनी चिकित्सा और अनिवार्य आवश्यकताओं के लिए पैसों की सख्त जरूरत पड़ी। जब वह बैंक पहुँची, तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई खाते का बैलेंस शून्य हो चुका था। जांच में सामने आया कि आरोपी योगेश ही पर्दे के पीछे से उसके खाते का अवैध संचालन कर रहा था और उसे बैंक बैलेंस की पूरी जानकारी थी। इस गंभीर जालसाजी के खिलाफ पीड़िता ने पूर्व में भी कई बार स्थानीय थाने और पुलिस प्रशासन में लिखित आवेदन दिए, लेकिन पुलिस की पारंपरिक शिथिलता और असंवेदनशीलता के कारण कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। दिव्यांग होने के कारण वह पुलिस दफ्तरों और कलेक्ट्रेट के अंतहीन चक्कर काटने में पूरी तरह असमर्थ हैं, जिसका पूरा फायदा स्थानीय रसूखदार और अपराधी तत्व उठा रहे हैं। यह मामला केवल एक महिला के साथ हुई ठगी का नहीं है, बल्कि यह उन तमाम सफेदपोश जालसाजों और बिचौलियों के गिरोह को भी बेनकाब करता है जो शहडोल की भोली-भाली, गरीब और अनपढ़ जनता को अपना शिकार बना रहे हैं। सहायता के नाम पर चल रहा यह काला धंधा बिना किसी खौफ के फल-फूल रहा है। एक लाचार महिला जिसे ठीक से चलना तक नहीं आता, वह न्याय की भीख मांगने के लिए थानों की चौखट पर रेंगने को मजबूर है। आखिर क्यों हरिजन थाना और स्थानीय पुलिस प्रशासन हफ्तों तक इस मामले में मूकदर्शक बने रहे? क्या अपराधियों को कोई गुप्त राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है, जो पुलिस हाथ डालने से कतरा रही थी?

हालांकि, इस खबर के लगातार सुर्खियां बनने और चौतरफा दबाव बढ़ने के बाद पुलिस अधीक्षक (एसपी) रामजी श्रीवास्तव ने मामले को संज्ञान में लिया है। एसपी ने इसे अत्यंत गंभीरता से लेते हुए संबंधित थाना प्रभारी को तत्काल बारीकी से जांच कर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं। परंतु, बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या केवल कड़े निर्देश जारी कर देना ही काफी है? जब तक आरोपी योगेश जैसे शातिर अपराधियों को घसीटकर जेल की सलाखों के पीछे नहीं भेजा जाता और पीड़िता की पाई-पाई वापस नहीं मिलती, तब तक प्रशासन के इन दावों को खोखला ही माना जाएगा। हमारा अखबार इस पूरे मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है। यह समाचार उन भ्रष्ट अधिकारियों और अपराधियों के मुंह पर करारा तमाचा है जो यह सोचते हैं कि बेसहारा लोगों की आवाज को दबाया जा सकता है। पुलिस प्रशासन को यह साफ समझ लेना होगा कि अगर इस मामले में तत्काल एफआईआर दर्ज कर ठोस कानूनी एक्शन नहीं लिया गया, तो जनता का कानून व्यवस्था से भरोसा उठ जाएगा। हम इस पीड़ित महिला को न्याय मिलने तक प्रशासन को चैन की नींद नहीं सोने देंगे और इस पत्रकारीय धर्म की लड़ाई को इसके अंजाम तक पहुंचाएंगे। संपादकीय टिप्पणी: यह समाचार समाज के शोषित, वंचित और दिव्यांग वर्ग के अधिकारों की रक्षा हेतु जनहित में जारी एक विशेष खोजी पत्रकारिता का हिस्सा है। हम केवल खबर छापते नहीं, व्यवस्था को जगाते हैं।

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