यात्रियों की भीड़ और सुरक्षा की खामियों का फायदा उठा रहे अंतरराज्यीय गैंग, रायपुर से प्रयागराज जा रही थी बड़ी खेप,शहडोल में खुली पोल
Junaid Khan - शहडोल। सड़कों पर पुलिसिया पहरा सख्त होते ही अंतरराज्यीय नशा तस्करों ने अब भारतीय रेल को अपनी काली कमाई का नया हाईवे बना लिया है। रेल यात्रियों की भारी भीड़ और सुरक्षा खामियों की आड़ में एक राज्य से दूसरे राज्य तक जहर परोसने का यह खेल धड़ल्ले से चल रहा है। लेकिन शाहडोल जीआरपी (शासकीय रेलवे पुलिस) की मुस्तैदी ने रविवार को तस्करों के इस नए और सुरक्षित ट्रेन मॉड्यूल को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। केंद्रीय गृह मंत्रालय के कड़े निर्देशों के बाद नशीले पदार्थों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष एनडीपीएस अभियान के तहत जीआरपी की टीम ट्रेन नंबर 12070 / 12707 संपर्क क्रांति एक्सप्रेस में पैनी नजरों से बोगियों को खंगाल रही थी। इसी दौरान जनरल कोच में बैठा एक संदिग्ध युवक खाकी वर्दी को देखते ही घबराने लगा और पसीने-पसीने हो गया। उसकी इस घबराहट ने पुलिस का माथा ठनका दिया। जवानों ने जब उसकी घेराबंदी कर उसके पास रखे दो मजबूत विमल ब्रांड के बैगों को खोला, तो अधिकारियों के होश उड़ गए। बैग कपड़ों से नहीं, बल्कि खाकी टेप से लिपटे गांजे के भारी-भरकम पैकेटों से ठसाठस भरे थे। पुलिस ने मौके से करीब 41 किलोग्राम अवैध गांजा बरामद किया है, जिसकी बाजार में अनुमानित कीमत 4 लाख रुपये से अधिक आंकी गई है।
प्रशासन को सीधी चुनौती,रायपुर का 'ड्रग लॉर्ड' कौन,आखिर कब टूटेगी इस अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट की रीढ़?
पूछताछ में रंगे हाथों पकड़े गए इस शातिर नशा तस्कर की पहचान 25 वर्षीय अमर मिश्रा, निवासी गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) के रूप में हुई है। पूछताछ में यह चौंकाने वाला सच सामने आया कि वह छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से गांजे की यह बड़ी खेप उठाकर यूपी के प्रयागराज में खपाने जा रहा था। जीआरपी ने आरोपी को सलाखों के पीछे भेजकर एनडीपीएस एक्ट के तहत संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। लेकिन इस कार्रवाई ने स्थानीय प्रशासन, खुफिया तंत्र और रेलवे सुरक्षा व्यवस्था पर कई बड़े सुलगते सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि रायपुर का वह कौन सा बड़ा 'नशा माफिया' है जो इस पूरे रैकेट को ऑपरेट कर रहा है, और शाहडोल संभाग के इस रूट का इस्तेमाल 'ग्रीन कॉरिडोर' की तरह क्यों किया जा रहा है? फिलहाल पुलिस तस्कर के मोबाइल कॉल डिटेल (CDR) के जरिए इस पूरे अंतरराज्यीय सिंडिकेट की जड़ों को उखाड़ने में जुट गई है। इस बड़ी कार्रवाई के बाद अब देखना यह होगा कि क्या पुलिस सिर्फ इस 'मोहरे' तक सीमित रहती है या फिर इस अवैध कारोबार के असली आकाओं के गिरेबान तक भी हाथ डाल पाती है।
अधिकारियों का पक्ष-
ट्रेनों की सघन जांच की जा रही थी, इसी कड़ी में संपर्क क्रांति ट्रेन की भी जांच की जा रही थी, तभी जनरल कोच के पीछे की सीट पर दो मजबूत झोला लेकर बैठा एक युवक हमलोगों के देखकर विचलित होने लगा। संदेह होने पर जांच की गई तो दोनों झोला में गांजा रखा था, जिसे हिरासत में लेकर कार्रवाई की गई।"
आर.एम.झरिया, एसआई जीआरपी, शहडोल
