क्या कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं पांडे जी? या फिर शिक्षा विभाग के ‘प्रिय अधिकारी’ बन चुके हैं अरविंद पांडे

हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी पद पर बने रहने का आरोप, जनसुनवाई में फिर गूंजा मामला 


Junaid Khan - शहडोल। शिक्षा विभाग में चल रहा APC-ADPC प्रभार विवाद अब प्रशासनिक गलियारों से निकलकर जनचर्चा का विषय बनता जा रहा है। समाजसेवी एवं आरटीआई कार्यकर्ता अजय कुमार मोटवानी ने मंगलवार को जनसुनवाई में दोबारा पहुंचकर बड़ा सवाल खड़ा किया कि आखिर हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेशों के बाद भी अरविंद कुमार पांडे को पद से क्यों नहीं हटाया जा रहा है? जनसुनवाई में दिए गए आवेदन में आरोप लगाया गया कि माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर द्वारा पारित आदेश में नियुक्ति प्रक्रिया को “Bad in Law” बताया गया, साथ ही अतिरिक्त प्रभार दिए जाने पर भी सवाल उठाए गए। इसके बावजूद संबंधित अधिकारी अब तक पद पर कार्यरत हैं। यही वजह है कि अब शहर में चर्चा शुरू हो गई है। क्या पांडे जी कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं हैं, या फिर विभाग के इतने प्रिय हैं कि आदेश भी बेअसर हो गए? अजय मोटवानी ने आवेदन में कहा कि न्यायालयीन आदेश आने और पुनर्विचार याचिका खारिज होने के बाद भी विभागीय स्तर पर कार्रवाई नहीं हुई। इतना ही नहीं, आरोप है कि आदेश के बाद भी कई वित्तीय दस्तावेजों और चेकों पर हस्ताक्षर किए गए। मोटवानी ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर तत्काल कार्रवाई की जाए और न्यायालयीन आदेशों का पालन सुनिश्चित कराया जाए। अब यह मामला केवल एक अधिकारी के प्रभार तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि प्रशासनिक कार्यप्रणाली और आदेशों के पालन पर भी बड़ा सवाल बनता जा रहा है। जनता के बीच चर्चा है कि यदि हाईकोर्ट के आदेशों के बाद भी कार्रवाई नहीं होती,तो फिर जिम्मेदारी आखिर तय किसकी होगी?

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