मौत के मुहाने पर शहडोल जिला न्यायालय: भ्रष्टाचार के 'प्लास्टर' से ढकी जर्जर इमारत कभी भी ले सकती है बलि
Junaid Khan - शहडोल। न्याय के मंदिर में जहां लोग जीवन की सुरक्षा और न्याय की गुहार लगाने आते हैं, वही परिसर आज भ्रष्टाचार और लोक निर्माण विभाग (PWD) की लापरवाही के कारण 'मौत का गलियारा' बन चुका है। शुक्रवार, 08 मई 2026 की दोपहर जिला एवं सत्र न्यायालय शहडोल में जो मंजर दिखा, उसने प्रशासन के दावों की कलई खोलकर रख दी है। मुख्य प्रवेश द्वार के पोर्च का एक भारी-भरकम हिस्सा ताश के पत्तों की तरह भरभराकर गिर पड़ा। यह महज संयोग था कि कुछ सेकंड पहले वहां से गुजरे अधिवक्ताओं की जान बच गई, वरना आज शहडोल कचहरी में न्याय की नहीं, बल्कि मातम की गूंज होती। सेकंडों का फासला और टल गई लाशों के ढेर की भयावह तस्वीर। दोपहर का वक्त था, न्यायालय अपनी पूरी कार्यक्षमता के साथ संचालित हो रहा था। तभी अचानक एक जोरदार धमाके के साथ मुख्य गेट के पोर्च का हिस्सा गिर गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मलबे के गिरने से ठीक कुछ सेकंड पहले वहां अधिवक्ताओं का एक समूह खड़ा था। अगर वे वहां से न हटे होते, तो आज शहडोल एक बड़ी जनहानि का गवाह बनता। हालांकि, नीचे खड़ी गाड़ियां मलबे में दबकर क्षतिग्रस्त हो गई हैं, जो इस बात का प्रमाण हैं कि प्रहार कितना घातक था।बभ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी मरम्मत: PWD और ठेकेदारों की जुगलबंदी पर उठे सवाल यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि लोक निर्माण विभाग (PWD) और उनके चहेते ठेकेदारों की आपराधिक लापरवाही का नतीजा है। आखिर रखरखाव के नाम पर आने वाला बजट किसकी जेब में जा रहा है? निरीक्षण के दौरान इंजीनियरों की मौजूदगी में यह साफ हो गया कि भवन की स्थिति अब 'रिपेयर' के लायक नहीं बल्कि खतरनाक' घोषित करने वाली है। इसके बावजूद, घटिया निर्माण सामग्री और लीपापोती वाले काम ने आज निर्दोषों की जान जोखिम में डाल दी है। पुराने जख्मों से भी नहीं सीखा सबक, अभय त्रिपाठी के घायल होने का मामला ताजा शहडोल न्यायालय में यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी जर्जर छत से प्लास्टर गिरने के कारण अधिवक्ता अभय त्रिपाठी गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं, जिन्हें लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा था। कई कर्मचारी भी पूर्व में बाल-बाल बचे हैं। सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन किसी बड़े बलिदान' का इंतजार कर रहा है? बार-बार दी जा रही चेतावनियों के बाद भी फाइलों में दबकर रह गए। समाधान अब आम आदमी के खून की मांग कर रहे हैं। CJM कोर्ट के ठीक बगल में तांडव, अधिकारियों में मची अफरा-तफरी जिस स्थान पर यह हिस्सा गिरा, उसके ठीक बगल में वर्तमान में CJM न्यायालय संचालित हो रहा है। घटना के तुरंत बाद हड़कंप मच गया। आनन-फानन में CJM शहडोल से चर्चा कर उस संवेदनशील हिस्से को सील कर दिया गया है। PWD के इंजीनियरों को मौके पर तलब किया गया है, लेकिन उनके पास इस बदहाली का कोई तर्कपूर्ण जवाब नहीं था। न्यायालय परिसर के मुख्य हिस्से का इस तरह गिरना सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़ा प्रश्नचिन्ह है।
प्रशासन को सीधी चुनौती: एसी कमरों से बाहर निकलकर देखें जर्जर हकीकत जिला प्रशासन और संबंधित विभाग के आला अधिकारी आखिर क्यों मौन हैं? जिला न्यायाधीश महोदय को बार-बार सूचित किए जाने के बावजूद, विभाग ने अब तक कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया? यह खबर उन अधिकारियों के लिए एक खुली चुनौती है जो कागजों पर मरम्मत का खेल खेलकर जनता के टैक्स का पैसा डकार रहे हैं। जर्जर भवन की यह स्थिति बताती है कि व्यवस्था के रक्षक ही अब भक्षक बन चुके हैं। अवैध कमीशनखोरी' के खेल ने खोखली की न्याय की नींव जानकारों की मानें तो निर्माण और मरम्मत कार्यों में होने वाली अवैध कमीशनखोरी ने सरकारी इमारतों को खोखला कर दिया है। ठेकेदारों की मनमानी और अधिकारियों की शह पर हो रहे 'लीपापोती' के काम का नतीजा आज सबके सामने है। क्या PWD के उन ठेकेदारों पर FIR दर्ज होगी, जिन्होंने सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर काम किया? वकीलों और पक्षकारों में गहरा आक्रोश, बड़े आंदोलन की आहट इस घटना के बाद अधिवक्ताओं में भारी रोष व्याप्त है। उनका कहना है कि वे हर दिन अपनी जान हथेली पर रखकर पैरवी करने आते हैं। अगर शीघ्र ही पूरे भवन का तकनीकी परीक्षण कराकर प्रभावी मरम्मत या नए भवन की व्यवस्था नहीं की गई, तो वकील समुदाय सड़कों पर उतरने को मजबूर होगा। यह आक्रोश केवल एक गिरे हुए पोर्च के लिए नहीं, बल्कि उस सिस्टम के खिलाफ है जो इंसान की जान से ज्यादा फाइलों को अहमियत देता है। निष्कर्ष: अब बहाने नहीं, समाधान चाहिए शहडोल जिला न्यायालय की यह जर्जर स्थिति एक बड़े खतरे का अलार्म है। आज तो हादसा टल गया, लेकिन कल शायद किस्मत इतनी मेहरबान न हो। शासन-प्रशासन को चाहिए कि वे राजनीति और भ्रष्टाचार से ऊपर उठकर इस भवन का कायाकल्प करें, वरना किसी भी अप्रिय घटना की पूरी जिम्मेदारी PWD विभाग और जिला प्रशासन की होगी।
