जैतपुर में 130 घन मीटर अवैध रेत जमींदोज
बेबाक और निर्भीक रिपोर्टिंग के बाद कुंभकर्णी नींद से जागा प्रशासनिक अमला,गाड़ाघाट, डोंगरीटोला और रसमोहिनी में संयुक्त टीम की ताबड़तोड़ कार्रवाई से माफियाराज में मची खलबली
Junaid Khan - शहडोल संभाग। क्षेत्र की जीवनदायिनी नदियों और सदियों पुराने ग्रामीण तालाबों का सीना चीरकर लाल रेत का समानांतर और अवैध साम्राज्य स्थापित करने वाले माफियाओं के खिलाफ आखिरकार प्रशासन को घुटने टेकने ही पड़े। समाचार पत्र में 'खाकी-खाड़ी के संरक्षण में लाल रेत का काला खेल' शीर्षक से प्रकाशित हुई खोजी रिपोर्ट का ऐसा दमदार असर हुआ कि पूरे प्रशासनिक अमले और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। उच्च स्तर से मिले कड़े निर्देशों के बाद आनन-फानन में खनिज, राजस्व एवं पुलिस विभाग की एक संयुक्त टीम गठित की गई, जिसने जैतपुर क्षेत्र के विभिन्न संवेदनशील इलाकों में दबिश देकर भारी मात्रा में अवैध रूप से भंडारित रेत पर सीधे प्रशासन का बुलडोजर चला दिया। इस पूरी कार्रवाई के दौरान करीब 130 घन मीटर अवैध रेत को जब्त कर जेसीबी मशीनों की मदद से मौके पर ही विनष्ट कर दिया गया। यह ताबड़तोड़ कार्रवाई उन रसूखदारों के मुंह पर सीधा तमाचा है जो कल तक प्रशासन को अपनी जेब में होने का दंभ भर रहे थे।
कलेक्टर-एसपी के सख्त तेवरों के बाद मैदान में उतरी संयुक्त टीम,गाड़ाघाट और डोंगरीटोला में सिंडिकेट के डंप जमींदोज
विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जैसे ही अखबार में माफियाओं के पूरे तंत्र,जिसमें 'यादव ब्रदर्स' की टीम, 'गुल्लू-आकिब गैंग',अज्जू',गोरे' और 'डिंगिया' छैकलाल,जैसे रसूखदार सिंडिकेट के नामों का सप्रमाण खुलासा किया गया थ,उस पर संभाग के आला अधिकारियों ने संज्ञान लिया, वैसे ही जैतपुर एसडीएम और खनिज निरीक्षक अभिषेक पटले के नेतृत्व में अमला जमीन पर उतर आया। टीम ने सबसे पहले गाड़ाघाट के पास ग्राम डोंगरीटोला में दो अलग-अलग ठिकानों पर अचानक छापेमारी की। यहाँ जीवनदायिनी नदी के किनारे करीब 40 घन मीटर और गप्पू टोला में एक निर्माणाधीन ग्रामीण सड़क के पास लगभग 50 घन मीटर अवैध रेत का विशाल भंडार शासकीय भूमि पर कब्जा कर जमा किया गया था। टीम ने बिना कोई वक्त गंवाए जेसीबी मशीन की मदद से पूरे डंप को नष्ट कर मिट्टी में मिला दिया, जिससे रेत चोरों को लाखों रुपयों की चपत लगी है।
रसमोहिनी के जंगलों तक पहुंचा प्रशासन का डंडा,बिना नंबर प्लेट दौड़ने वाले यमदूतों के थमे पहिए
डोंगरीटोला में सिंडिकेट को नेस्तनाबूत करने के बाद प्रशासनिक टीम ने तत्काल ग्राम रसमोहिनी के आसपास के घने क्षेत्रों और नदी तटीय इलाकों का रुख किया। यहाँ भी रेत माफियाओं द्वारा चोरी-छिपे डंप की गई करीब 40 घन मीटर अवैध रेत के दो अलग-अलग भंडारण मिले, जिसे टीम ने मौके पर ही पूरी तरह से विनष्ट कर दिया। समाचार पत्र ने पूर्व में ही उजागर किया था कि किस तरह दिन-दहाड़े और काली रातों में बिना नंबर प्लेट के ट्रैक्टर-ट्रॉली, डंपर और ट्रक सड़कों पर यमदूत बनकर फर्राटे भर रहे हैं, जिससे आए दिन ग्रामीणों की जान जोखिम में पड़ रही है और क्षेत्र की सड़कें जमींदोज हो रही हैं। इस बड़ी कार्रवाई के बाद से सुहागपुर, बुढ़ार और जैतपुर थाना क्षेत्रों में सड़कों पर अवैध रेत ढोने वाले वाहनों के पहिए पूरी तरह से थम गए हैं और माफिया भूमिगत होने को मजबूर हो गए हैं।
केवल 'लावारिस' रेत पर बुलडोजर क्यों? 'मंथली मैनेजमेंट' के असली आकाओं और सफेदपोशों पर कब होगी एफआईआर?
प्रशासन की इस त्वरित कार्रवाई की जनता खुले दिल से सराहना तो कर रही है, लेकिन पत्रकारिता के धर्म और जनहित को सर्वोपरि रखते हुए यह यक्ष प्रश्न आज भी जस का तस खड़ा है कि आखिर इन भंडारणकर्ताओं के असली मालिकों पर नामजद एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की जा रही है? सुहागपुर, जैतपुर, बुढ़ार और यातायात पुलिस की आँखों पर जो कथित 'सुविधा शुल्क' और 'मंथली मैनेजमेंट' की पट्टी बंधी हुई थी, उन जिम्मेदार अधिकारियों पर विभागीय गाज कब गिरेगी? यह सर्वविदित है कि बिना स्थानीय पुलिस और खनिज विभाग की मौन स्वीकृति के इतना बड़ा सिंडिकेट फल-फूल नहीं सकता। ऐसे में केवल रेत को जब्त कर या उसे मिट्टी में मिलाकर कोरम पूरा कर लेना काफी नहीं है। प्रशासन को यह खुली चुनौती है कि वे इन लावारिस डंपों के पीछे छिपे 'सफेदपोशों' की पहचान उजागर करें और उनके खिलाफ खनिज अधिनियम तथा चोरी का मुकदमा दर्ज कर जेल भेजें।
जब तक थमेगा नहीं लाल रेत का यह खूनी तांडव, तब तक जारी रहेगा समाचार पत्र का माफिया विरोधी महा-अभियान
इस पूरी कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ में आज भी वह ताकत है जो सोई हुई व्यवस्था को जगा सकती है और जनता की गाढ़ी कमाई पर डाका डालने वालों की कमर तोड़ सकती है। लेकिन प्रशासन यह न भूले कि यह केवल एक शुरुआत है, रेत सिंडिकेट की जड़ें बहुत गहरी हैं। अगर प्रशासन ने इस बड़ी कार्रवाई के बाद दोबारा ढील दी, तो ये माफिया फिर से सक्रिय हो जाएंगे और सरकारी खजाने को चूना लगाने के साथ-साथ जनता की जेबों पर डाका डालना शुरू कर देंगे। हमारा समाचार पत्र इस पूरे मामले पर, कमिश्नर, आईजी, कलेक्टर और एसपी की कार्यप्रणाली सहित जमीनी स्तर के हर एक घटनाक्रम पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है। जब तक इस पूरे अंचल से रेत का अवैध उत्खनन, परिवहन और ओवरलोडिंग का यह काला खेल पूरी तरह से जड़ से खत्म नहीं हो जाता, तब तक माफियाराज के खिलाफ हमारी यह धारदार मुहिम रुकने वाली नहीं है।
