सड़ चुके खरबूजे ने खोली 'महीने की सेटिंग' की पोल; त्योहारी सीजन में फोटो खिंचाने वाले अफसर आम दिनों में गायब
Junaid Khan - शहडोल। संभागीय मुख्यालय शहडोल में प्रशासनिक अमले और खाद्य सुरक्षा विभाग की नाक के नीचे जनता को फल और सब्जियों के नाम पर 'धीमा जहर' परोसा जा रहा है। शहर के पत्ता गोदाम एरिया, किरण टॉकीज के पास रहने वाले काका खान नामक जागरूक नागरिक ने जब सिंधी बाजार मार्केट और रेलवे सब्जी मंडी में ठेला लगाने वाले सलीम नामक विक्रेता से खरबूजा खरीदा, तो घर जाकर उसे काटते ही पूरे परिवार के होश उड़ गए। खरबूजे के भीतर कीड़े पिलपिला रहे थे। गनीमत रही कि फल खाने से पहले इस पर नजर पड़ गई, वरना घर के मासूम बच्चे या बुजुर्ग इसे खाकर किसी गंभीर बीमारी या जानलेवा संक्रमण का शिकार हो सकते थे। यह कोई पहला मामला नहीं है; शहडोल की मंडियों और बाजारों में सड़ चुके फल, केमिकल से पकाई गई सब्जियां और मिलावटी खाद्य सामग्रियां धड़ल्ले से बेची जा रही हैं, लेकिन कुंभकरणी नींद सोया खाद्य विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा है।
लाखों फूंक रहे मरीज, 'कमीशन' के खेल में मस्त जिम्मेदार अमला
शहर के व्यस्ततम चौकों और बाजारों में इस तरह के दूषित खाद्य पदार्थों की खुलेआम बिक्री सीधे तौर पर जिला प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग की मिलीभगत की ओर इशारा करती है। सूत्र बताते हैं कि अमले की दुकानदारों और बिचौलियों के साथ 'महीने की सेटिंग' तय है, जिसके कारण कभी भी जमीनी स्तर पर औचक निरीक्षण या सैंपलिंग नहीं की जाती। आज स्थिति यह है कि जनता इन कीड़े-मकोड़े युक्त और दूषित सामानों को अनजाने में खरीदकर बीमार पड़ रही है। शहर के सरकारी अस्पतालों से लेकर निजी नर्सिंग होम तक ऐसे मरीजों से पटे पड़े हैं, जहां आम नागरिक अपनी जान बचाने के लिए खून-पसीने की गाढ़ी कमाई और लाखों रुपए पानी की तरह बहाने को मजबूर हैं। वहीं दूसरी ओर, जनता की सेहत की सुरक्षा के लिए जवाबदेह अधिकारी वातानुकूलित कमरों में बैठकर सिर्फ कागजी घोड़े दौड़ा रहे हैं।
त्योहारों पर 'फेमस' होने की नौटंकी,बाकी दिन मिलावटखोरों को खुली छूट
खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली का सबसे शर्मनाक पहलू यह है कि इनका पूरा अमला सिर्फ होली, दिवाली या ईद जैसे बड़े त्योहारों के समय ही नींद से जागता है। त्योहारों के दौरान चंद दुकानों पर दिखावे की कार्रवाई की जाती है, ताकि अखबारों की सुर्खियों और समाचारों में बने रहकर आला अधिकारियों को गुमराह किया जा सके। खुद को 'फेमस' करने और औपचारिकता पूरी करने की इस नौटंकी के बाद, पूरे साल मिलावटखोरों और दूषित सामान बेचने वालों को जनता की जेब और सेहत काटने की खुली छूट दे दी जाती है। जब संभाग के मुखिया कमिश्नर और जिले के कप्तान कलेक्टर इसी शहर में बैठते हैं, तब जिला प्रशासन और खाद्य विभाग का यह बेखौफ रवैया सीधे तौर पर व्यवस्था को चुनौती दे रहा है।
सलीम के ठेले से लेकर मुख्य डीलर तक पहुंचे जांच की आंच,जनता की मांग
इस गंभीर मामले के सामने आने के बाद अब जनता में भारी आक्रोश है। पीड़ित काका खान और शहर के प्रबुद्ध नागरिकों ने मांग की है कि केवल ठेला लगाने वाले सलीम तक ही कार्रवाई सीमित न रहे, बल्कि इस बात की भी गहन जांच होनी चाहिए कि यह दूषित और कीड़े वाले फल किस मुख्य डीलर, एजेंसी या बाहरी आदत से शहडोल की मंडियों में सप्लाई किए जा रहे हैं। खाद्य विभाग अगर वाकई पूरी तरह से 'सेट' नहीं है, तो उसे तत्काल उस मुख्य स्रोत और सिंडिकेट पर छापेमारी करनी चाहिए जो पूरे शहर में बीमारी बांट रहा है। यदि जिला प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सख्त कदम नहीं उठाए, तो यह तय है कि आने वाले दिनों में यह लापरवाही किसी बड़े जन-आंदोलन का रूप लेगी।

