अस्पताल में कैंटीन: क्या सच में बदलेगी तस्वीर या फिर कागजों तक ही सीमित रहेगी 'राहत'?

प्रशासन के दावों की कसौटी पर जिला अस्पताल; बरसों का इंतजार अब उम्मीदों के घेरे में


Junaid Khan - शहडोल। जिला चिकित्सालय शहडोल में आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों के लिए राहत की एक खबर सामने आ रही है। लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहे इस अस्पताल परिसर में अब जल्द ही कैंटीन का संचालन शुरू होने की बात कही जा रही है। मीडिया में खबर प्रकाशित होने के बाद अब प्रशासन इस दिशा में हरकत में आता दिखाई दे रहा है। हालांकि, सवाल यह उठता है कि क्या यह कैंटीन वाकई गुणवत्ता के मानकों पर खरी उतरेगी या फिर पहले की तरह व्यवस्थाएं भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ जाएंगी? अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, कैंटीन की तैयारियां जोर-शोर से शुरू कर दी गई हैं। दावा किया जा रहा है कि इसका संचालन 'आजीविका मिशन' के माध्यम से किया जाएगा। लेकिन यहाँ प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन बिचौलियों और अवैध तत्वों को बाहर रखने की होगी, जो सरकारी परिसरों में अपनी मनमानी चलाने के आदी हो चुके हैं। खबर की गहराई में जाएं तो यह सिर्फ एक कैंटीन शुरू करने का मामला नहीं है, बल्कि उन हजारों गरीब परिवारों के हक की बात है जो दूर-दराज के गांवों से इलाज के लिए यहाँ आते हैं और मजबूरी में बाहर की महंगी दुकानों पर लुटने को मजबूर होते हैं। प्रशासन के लिए यह एक खुली चुनौती है कि वे इस कैंटीन में केवल भोजन ही नहीं, बल्कि शुद्धता और पारदर्शिता की गारंटी भी दें। जिला अस्पताल की सहायक प्रबंधक पूजा सोनी का कहना है कि कैंटीन में साफ-सफाई और खाद्य गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाएगा। परंतु, जनता यह जानती है कि सरकारी विभागों में 'विशेष ध्यान' के वादे अक्सर फाइलों में ही दफन हो जाते हैं। क्या प्रशासन उन अवैध वेंडरों और बिना लाइसेंस के अस्पताल के इर्द-गिर्द सक्रिय गिरोहों पर नकेल कस पाएगा जो इस सरकारी व्यवस्था में सेंध लगाने की ताक में बैठे हैं? खबर के अनुसार, यहाँ चाय, नाश्ता, भोजन और आवश्यक पैक्ड खाद्य सामग्री के साथ-साथ मरीजों के लिए हल्का एवं पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया जाएगा। यह योजना सुनने में जितनी लोक-लुभावन है, धरातल पर उसे उतारना उतना ही मुश्किल। यदि आजीविका मिशन के जरिए इसका संचालन होता है, तो इसमें स्थानीय महिलाओं को रोजगार तो मिलेगा, लेकिन क्या प्रशासन उन्हें उन रसूखदारों से बचा पाएगा जो अक्सर ऐसे ठेकों पर अपनी नजरें गड़ाए रहते हैं? अवैध वसूली और घटिया सामग्री का खेल इस परिसर में नया नहीं है, ऐसे में यह कैंटीन प्रशासन की साख का लिटमस टेस्ट साबित होगी। स्थानीय निवासियों और मरीजों के परिजनों का कहना है कि वे इस घोषणा का स्वागत करते हैं, लेकिन उन्हें डर है कि कहीं यह भी अन्य योजनाओं की तरह भ्रष्टाचार की भेंट न चढ़ जाए। उचित दर पर भोजन उपलब्ध कराना एक मानवीय कार्य है, लेकिन यदि रेट लिस्ट और गुणवत्ता की मॉनिटरिंग नहीं हुई, तो राहत के नाम पर यह महज एक और 'दुकानदारी' बनकर रह जाएगी। अस्पताल प्रबंधन को यह स्पष्ट करना होगा कि कैंटीन के नाम पर किसी भी प्रकार की अवैध वसूली या अनैतिक गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन की यह 'मुहिम' कब तक हकीकत का रूप लेती है। क्या कलेक्टर और स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी स्वयं इसकी निगरानी करेंगे, या फिर इसे निचले स्तर के कर्मचारियों के भरोसे छोड़कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेंगे? जनता की नजरें टिकी हैं कि क्या वाकई अस्पताल में कैंटीन बनेगी या फिर यह महज एक चुनावी शिगूफा या प्रशासन का चेहरा चमकाने की कोशिश मात्र है।

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