जैतपुर स्वास्थ्य केंद्र बना यमराज का घर,तड़पते युवक को न मिला इलाज,न एम्बुलेंस,सिस्टम की 'हत्या' पर कब जागेगा प्रशासन?

लापरवाही की इंतहा,108 सेवा और डॉक्टरों की गैर-मौजूदगी ने छीनी टीकम सिंह की सांसें, ग्रामीण क्षेत्रों में दम तोड़ती स्वास्थ्य सेवाओं का काला सच


Junaid Khan -  शहडोल। संभाग के जैतपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में व्याप्त कुव्यवस्थाओं ने एक बार फिर एक हंसते-खेलते परिवार के चिराग को बुझा दिया है। ग्राम टिकुरी निवासी युवक टीकम सिंह की मौत महज़ एक दुर्घटना का परिणाम नहीं, बल्कि स्वास्थ्य विभाग की उस संवेदनहीनता का नतीजा है जो कागजों पर तो 'सर्वश्रेष्ठ' होने का दावा करती है, लेकिन धरातल पर मरीज़ों को एम्बुलेंस तक मयस्सर नहीं करा पाती। 12 मई की रात करीब 9 बजे जब टीकम सिंह अपनी बाइक से टिकुरी से बरगवां की ओर जा रहा था, तभी अमहा और बरगवां के बीच उसकी बाइक अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई। दुर्घटना के बाद स्थानीय लोगों और परिजनों की मदद से घायल टीकम को आनन-फानन में जैतपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल की दहलीज पर पहुँचने के बाद मानवता को शर्मसार करने वाला मंज़र सामने आया। अस्पताल में न तो कोई डॉक्टर ड्यूटी पर तैनात था और न ही कोई जिम्मेदार स्वास्थ्यकर्मी उपलब्ध मिला। मरणासन्न हालत में युवक तड़पता रहा, लेकिन अस्पताल प्रशासन की कुंभकर्णी नींद नहीं टूटी। घंटों इंतज़ार के बाद जब युवक की स्थिति और अधिक नाजुक हो गई, तब उसे शहडोल रेफर करने की औपचारिकता तो पूरी कर दी गई, लेकिन 'लाइफ सपोर्ट' कही जाने वाली 108 एम्बुलेंस सेवा ने हाथ खड़े कर दिए। अगर समय पर प्राथमिक उपचार और एम्बुलेंस मिल जाती, तो आज टीकम हमारे बीच होता। यह मौत नहीं, सिस्टम द्वारा की गई हत्या है। अस्पताल के खाली कमरों और गैर-जिम्मेदार कर्मचारियों का वीडियो हमारे पास मौजूद है जो प्रशासन की पोल खोलने के लिए काफी है। आक्रोशित परिजन। सिस्टम की इस लाचारी के बीच, परिजनों ने हार नहीं मानी और काफी मशक्कत के बाद एक निजी वाहन की व्यवस्था कर घायल को शहडोल ले गए। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। उपचार के दौरान टीकम सिंह ने दम तोड़ दिया। यह घटना सीधे तौर पर स्वास्थ्य विभाग के दावों को चुनौती दे रही है। सवाल यह उठता है कि क्या सरकारी अस्पतालों की इमारतें सिर्फ सफेद हाथी बनकर खड़ी रहेंगी? क्या रात के समय ग्रामीणों को इलाज के लिए भगवान भरोसे छोड़ दिया जाएगा? जैतपुर अस्पताल की इस मनमानी और डॉक्टरों की अनुपस्थिति ने पूरे क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं। इस मामले में एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि घटना से संबंधित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिसमें अस्पताल की बदहाली और लापरवाही साफ़ तौर पर उजागर हो रही है। ग्रामीणों में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश व्याप्त है। लोगों का कहना है कि क्षेत्र में अवैध उत्खनन और अन्य गैर-कानूनी गतिविधियों पर लगाम लगाने का दावा करने वाला प्रशासन क्या इन सफेदपोश हत्यारों पर कार्रवाई करने की हिम्मत जुटा पाएगा? जैतपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आए दिन होने वाली ऐसी घटनाएं अब जनता के सब्र का बांध तोड़ रही हैं। अखबार के माध्यम से हम प्रशासन को खुली चुनौती देते हैं कि क्या स्वास्थ्य मंत्री और स्थानीय अधिकारी इस मामले की निष्पक्ष जांच कराएंगे? क्या ड्यूटी से नदारद रहने वाले डॉक्टरों और एम्बुलेंस सेवा में कोताही बरतने वाले ठेकेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी? या फिर एक और जांच कमेटी बिठाकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा? 'Jk न्यूज' इस मुद्दे को तब तक उठाता रहेगा जब तक टीकम के परिवार को न्याय और जैतपुर की जनता को सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल जातीं।

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