कमिश्नर की संवेदनशील पहल से आवेदिका को मिली बड़ी राहत,जनसुनवाई डैशबोर्ड बना त्वरित निराकरण का प्रभावी माध्यम
Junaid Khan - शहडोल। 11 जून 2026-शहडोल संभाग आयुक्त श्रीमती सुरभि गुप्ता की संवेदनशीलता और त्वरित कार्यशैली के चलते एक वर्ष से लंबित भूमि संबंधी समस्या का समाधान मात्र 24 घंटे में हो गया। तहसील जयसिंहनगर के ग्राम रेउसा निवासी श्रीमती सरोज पाल, पति श्री रामेश्वर पाल, मंगलवार को आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई में अपनी समस्या लेकर पहुंचीं। उन्हें उम्मीद थी कि लंबे समय से चली आ रही परेशानी का समाधान मिलेगा। जनसुनवाई में श्रीमती सरोज पाल ने बताया कि उन्होंने फरवरी 2025 में भूमि क्रय की थी, लेकिन भूमि से संबंधित अभिलेख और पट्टा उपलब्ध नहीं होने के कारण उनका नामांतरण एवं रिकॉर्ड दुरुस्त नहीं हो पा रहा था। इस समस्या के समाधान के लिए वे पिछले एक वर्ष से विभिन्न कार्यालयों के चक्कर लगा रही थीं। आयुक्त श्रीमती सुरभि गुप्ता ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच एवं आवश्यक कार्रवाई के निर्देश अपने कार्यालय के संभागीय सलाहकार आर.सी.एम.एस. श्री उपेंद्र त्रिपाठी को दिए। जांच के दौरान पाया गया कि आवेदिका के पास भूमि संबंधी दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे। इसके बाद रजिस्ट्री नंबर प्राप्त कर संबंधित अभिलेखों की जांच की गई तथा आवेदिका के नामांतरण आदेश को खोजकर उसके आधार पर भू-अभिलेख में आवश्यक प्रविष्टियां दर्ज कराई गईं। कार्रवाई के दौरान जयसिंहनगर तहसीलदार श्रीमती सुषमा धुर्वे एवं संभागीय सलाहकार श्री उपेंद्र त्रिपाठी ने समन्वय स्थापित करते हुए प्रक्रिया पूरी कराई। परिणामस्वरूप मात्र 24 घंटे के भीतर पटवारी द्वारा आवेदिका के घर पहुंचकर नामांतरण आदेश एवं खसरे की प्रतिलिपि सौंप दी गई। अपनी समस्या के त्वरित समाधान पर श्रीमती सरोज पाल ने आयुक्त श्रीमती सुरभि गुप्ता एवं प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया। जनसुनवाई डैशबोर्ड बना प्रभावी निगरानी तंत्र। जनसुनवाई को अधिक प्रभावी एवं परिणाममुखी बनाने के लिए आयुक्त कार्यालय में विशेष जनसुनवाई डैशबोर्ड विकसित किया गया है। इस डैशबोर्ड में प्रत्येक मंगलवार को प्राप्त आवेदनों का डिजिटल पंजीयन किया जाता है तथा उनके निराकरण की सतत मॉनिटरिंग की जाती है। शिकायतों को संबंधित अधिकारियों तक ऑनलाइन प्रेषित किया जाता है और अधिकारी की गई कार्रवाई की जानकारी भी इसी डैशबोर्ड पर अपडेट करते हैं, जिसकी नियमित समीक्षा स्वयं आयुक्त द्वारा की जाती है। इसके अलावा नागरिकों को छोटी-छोटी समस्याओं के लिए कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए एक डिजिटल क्यूआर कोड प्रणाली भी विकसित की गई है, जिसके माध्यम से लोग अपनी शिकायतें एवं समस्याएं सीधे दर्ज करा सकते हैं। इस व्यवस्था से शिकायतों के समयबद्ध निराकरण में तेजी आई है तथा प्रशासन और नागरिकों के बीच संवाद और अधिक सशक्त हुआ है। इस प्रकरण ने एक बार फिर साबित किया है कि प्रशासनिक संवेदनशीलता, तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था और त्वरित कार्रवाई से आम नागरिकों की समस्याओं का प्रभावी समाधान संभव है।
