खैरहा खदान क्षेत्र में 'बंधुआ मजदूरी' जैसा खौफनाक खेल
08 घंटे के बदले जबरन 10 घंटे काम,विरोध पर गाली-गलौज और नौकरी से निकालने की धमकी, ओवर टाइम का पैसा डकार रहा प्रबंधन
Junaid Khan - शहडोल। खैरहा कोयला अंचल और औद्योगिक हब कहे जाने वाले शहडोल संभाग के खैरहा खदान क्षेत्र में आउटसोर्सिंग कंपनियों द्वारा स्थानीय शिक्षित बेरोजगार युवाओं के खून-पसीने की कमाई पर डाका डालने का एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। राजेंद्रनगर, नवगवां और खैरहा खदान में कार्यरत मुख्य ठेका कंपनी 'जेएमएस (JMS) कंपनी' के अधीन सब-कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रही 'श्री साईं सर्विस कंपनी' के प्रबंधन पर लगभग 250 कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से बंधुआ मजदूरों जैसा बर्बर और अमानवीय शोषण करने का खुला आरोप लगाया है। डरे-सहमे और व्यवस्था से त्रस्त इन युवाओं ने जब पानी सिर से ऊपर जाते देखा, तो उन्होंने खैरहा थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराकर कंपनी मैनेजर और सुपरवाइजरों के खिलाफ सीधे मोर्चा खोल दिया है। यह पूरा मामला सिर्फ एक कंपनी की मनमानी नहीं, बल्कि शहडोल जिले में सक्रिय लेबर माफिया और जिम्मेदार श्रम विभाग की उस कथित साठगांठ को बेनकाब करता है, जिसके चलते खुलेआम कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
सिस्टम को खुली चुनौती, बिना भुगतान जबरन कराया जा रहा अतिरिक्त काम
पीड़ित कर्मचारियों द्वारा थाने में सौंपी गई लिखित शिकायत में जो खुलासे किए गए हैं, वे किसी भी संवेदनशील लोकतांत्रिक व्यवस्था को झकझोरने के लिए काफी हैं। नियमानुसार ड्यूटी 8 घंटे की निर्धारित है, लेकिन रसूख के नशे में चूर श्री साईं सर्विस कंपनी का प्रबंधन इन युवाओं से रोजाना 9 से 10 घंटे जबरन काम ले रहा है। हद तो तब हो जाती है जब इस अतिरिक्त दो घंटे के 'ओवर टाइम' का एक भी रुपया कर्मचारियों को नहीं भुगतान किया जाता। यदि कोई कर्मचारी कानून की बात करता है या ओवर टाइम करने से मना करता है, तो उसके साथ सरेआम गाली-गलौज की जाती है, उसे जलील किया जाता है और सीधे नौकरी से बाहर फेंकने का खौफ दिखाया जाता है। तकनीकी खामियों को भी शोषण का हथियार बना लिया गया है; हाजिरी के लिए 'फेस स्कैनिंग' प्रणाली लागू है, लेकिन यदि किसी दिन तकनीकी खराबी या नेटवर्क न होने से फेस स्कैन नहीं हो पाता, तो कर्मचारी की पूरे दिन की मेहनत को शून्य मानकर उसका पैसा काट लिया जाता है, जबकि काम उससे पूरा 10 घंटे लिया जा चुका होता है।
वसूली का नंगा नाच और मारपीट,भय के साए में जीने को मजबूर अन्नदाता के बेटे
इस पूरे संगठित आर्थिक अपराध में सबसे घिनौना पहलू भ्रष्टाचार और गुंडागर्दी का है। कर्मचारियों का सीधा आरोप है कि कंपनी के मैनेजर और सुपरवाइजरों द्वारा हर महीने सैलरी आते ही रुपयों (कमीशन) की मांग की जाती है। जो युवा अपनी गाढ़ी कमाई में से इस अवैध वसूली को देने से इनकार करता है, उसे तत्काल प्रभाव से नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती है। कंपनी शासन द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी दर (कलेक्टर रेट/निर्धारित रेट) से भी काफी कम भुगतान कर रही है। प्रताड़ना की पराकाष्ठा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पकपिया निवासी पीड़ित कर्मचारी 'आनन्द बैगा' के साथ कंपनी मैनेजर द्वारा कई बार बर्बरतापूर्वक मारपीट तक की गई। पेट की आग और नौकरी छिन जाने के डर से यह गरीब आदिवासी युवा अब तक इस जुल्म को सहता रहा और रिपोर्ट दर्ज कराने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। अब जब पानी सब्र के बांध को तोड़ चुका है, तब खैरहा थाना प्रभारी से कंपनी मैनेजर और सुपरवाइजरों के खिलाफ आईपीसी और श्रम अधिनियम की गंभीर धाराओं के तहत कड़ी कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई की मांग की गई है।
तीखे सवाल,कहां सोया है श्रम विभाग?
1.जिले की पांचों जनपदों में जनसमस्याओं के निराकरण और सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए बड़े-बड़े शिविर आयोजित हो रहे हैं, लेकिन नाक के नीचे 250 युवाओं का यह खुला शोषण प्रशासनिक मॉनिटरिंग पर बड़ा सवालिया निशान है।
2.क्या श्रम पदाधिकारी (LEO) और औद्योगिक सुरक्षा विभाग के अधिकारी सिर्फ दफ्तरों में बैठकर फाइलों पर 'ऑल इज वेल' की मुहर लगा रहे हैं?
3.जेएमएस (JMS) जैसी बड़ी मुख्य कंपनी ने अपनी सब-कंपनी 'श्री साईं सर्विस' की इस गुंडागर्दी और अवैध वसूली पर अब तक आंखें क्यों मूंद रखी हैं? क्या इसमें ऊपर तक हिस्सा जा रहा है?
आदिवासी अंचल में 'बैगा' युवाओं पर अत्याचार बर्दाश्त नहीं
शहडोल संभाग जनजातीय बहुल इलाका है, जहां सरकार आदिवासियों (विशेषकर बैगा जैसी संरक्षित जनजातियों) के संरक्षण और रोजगार के बड़े-बड़े दावे करती है। लेकिन आनंद बैगा जैसे सीधे-साधे युवाओं को मारपीट कर, डरा-धमकाकर कमीशन वसूलना यह साबित करता है कि जमीनी हकीकत दावों से कोसों दूर है। यदि पुलिस ने इस मामले में तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज कर आरोपियों को जेल नहीं भेजा, तो यह आक्रोश बड़े आंदोलन में बदल सकता है।
