महाघोटाला,फाइलों में दर्ज 'हरी-भरी' कॉलोनी जमीन पर कंक्रीट का जंगल,शहडोल में 30 साल के भीतर निगल लिए गए 17 सरकारी पार्क

हाउसिंग बोर्ड और नगरपालिका की नूराकुश्ती में रसूखदारों की 'चांदी', बच्चों के खेल मैदान और बुजुर्गों की वॉकवे पर खड़े कर दिए आलीशान पक्के निर्माण 


Junaid Khan - शहडोल। शहर की सबसे वीआईपी और पुरानी न्यू हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में पिछले तीन दशकों से चल रहा भू-माफियाओं और रसूखदारों का 'लैंड ग्रैबिंग' (भूमि कब्जा) का खेल अब पूरी तरह बेनकाब हो चुका है। प्रशासनिक मिलीभगत और विभागों की जानबूझकर ओढ़ी गई कफन जैसी खामोशी के चलते कॉलोनी के नक्शे से सार्वजनिक उपयोग के लिए आरक्षित पूरे 17 पार्क पूरी तरह गायब कर दिए गए हैं। तीन दशक पहले जिस जमीन को हरियाली, पर्यावरण संतुलन और खेल मैदान के लिए वैधानिक रूप से आरक्षित छोड़ा गया था, आज वहां आलीशान पक्के मकान, टीन शेड, निजी बाड़ियां और व्यावसायिक ढांचे सीना ताने खड़े हैं। रसूखदारों ने पहले सोची-समझी रणनीति के तहत इन पार्कों में अस्थायी रूप से सब्जियां उगाना और कबाड़ रखना शुरू किया, और देखते ही देखते जिम्मेदार अधिकारियों की नाक के नीचे करोड़ों रुपये की सरकारी जमीनों पर पक्के निर्माण कर उन्हें निजी जागीर में तब्दील कर लिया। बच्चों के खेलने का हक और बुजुर्गों के सुबह-शाम टहलने का सुकून अब भू-माफियाओं की हवस की भेंट चढ़ चुका है।

अधिकारों की जंग या जवाबदेही से भागने का नाटक? हस्तांतरण के खेल में पिस रही जनता 

इस पूरे संगठित अवैध कब्जे के खेल में सबसे शर्मनाक भूमिका मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड और स्थानीय नगरपालिका प्रशासन की रही है। कॉलोनी के हस्तांतरण को लेकर दोनों ही जिम्मेदार विभाग पिछले कई सालों से केवल 'फाइल-फाइल' खेल रहे हैं और एक-दूसरे के पाले में गेंद डाल रहे हैं। नगरपालिका का रोना है कि कॉलोनी का पूर्ण हस्तांतरण अभी तक नियमों के तहत नहीं हुआ है, इसलिए वे कार्रवाई नहीं कर सकते। वहीं दूसरी ओर, हाउसिंग बोर्ड का दावा है कि रख-रखाव और अन्य जन-व्यवस्थाओं की पूरी जिम्मेदारी नगरपालिका को सौंपी जा चुकी है। दो सरकारी विभागों के बीच चल रही इस नूराकुश्ती का सीधा फायदा सीधे तौर पर अतिक्रमणकारियों को मिल रहा है। नियम कहते हैं कि इन आरक्षित स्थानों पर सघन पौधरोपण, हरियाली और सौंदर्यीकरण होना चाहिए था, लेकिन यहां अफसरों की शह पर सिर्फ और सिर्फ कंक्रीट का अवैध जाल बुना गया।

अब आर-पार के मूड में रहवासी,सालों की अनदेखी के बाद उग्र आंदोलन की सुगबुगाहट

कॉलोनी के जागरूक रहवासियों में अब इस प्रशासनिक अंधेरगर्दी और भू-माफियाओं की दादागिरी के खिलाफ भारी आक्रोश पनप रहा है। सालों से पार्क विकसित करने की गुहार लगा रहे नागरिकों की फाइलों पर अफसर कुंडली मारकर बैठे रहे, जिसका खामियाजा आज पूरी कॉलोनी भुगत रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की इस घोर लापरवाही ने न केवल पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाया है, बल्कि सरकारी संपत्ति की खुली लूट की खुली छूट दे रखी है। रसूखदारों द्वारा किए गए इन पक्के अवैध निर्माणों को ढहाने और गायब हुए 17 पार्कों को दोबारा कब्जा मुक्त कराने के लिए अब रहवासी सड़कों पर उतरने की रणनीति बना रहे हैं। यदि समय रहते जिला प्रशासन ने दोनों बेलगाम विभागों की जवाबदेही तय कर बुलडोजर की कार्रवाई नहीं की, तो यह सुलगता हुआ जनाक्रोश किसी भी दिन उग्र आंदोलन का रूप ले सकता है।

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