शहडोल में बड़ा हादसा टला,पर सुलग रहे गंभीर सवाल,पेट्रोल पंप के पास धूं-धूं कर जला कोयला लदा ट्रक

रसूखदारों के 'काले खेल' और प्रशासनिक सुस्ती ने हाईवे को बनाया 'बारूद का ढेर' 


Junaid Khan - शहडोल। संभागीय मुख्यालय से सटे बुढ़ार-धनपुरी राष्ट्रीय राजमार्ग पर मंगलवार देर शाम एक बार फिर उस वक्त मौत का तांडव देखने को मिला, जब एक पेट्रोल पंप के समीप कोयले से लदे एक ट्रक में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने इतना विकराल रूप ले लिया कि ट्रक का केबिन मलबे में तब्दील हो गया और आसमान में काले धुएं का गुबार किलोमीटर दूर तक दिखाई देने लगा। घटना बुढ़ार थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक स्थानीय कॉलेज और पेट्रोल पंप के बिल्कुल नजदीक की है, जिससे इलाके में सनसनी फैल गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, शुरुआत में केबिन से हल्का धुआं निकला जिसे आम तकनीकी खराबी समझा गया, लेकिन महज 2 से 3 मिनट के भीतर लपटों ने पूरे वाहन को अपनी जद में ले लिया। पेट्रोल पंप नजदीक होने के कारण मौके पर महाविस्फोट (ब्लास्ट) का ऐसा खौफ पैदा हुआ कि राहगीरों और स्थानीय लोगों ने भागकर अपनी जान बचाई। हाईवे पर दोनों ओर का यातायात तत्काल रोकना पड़ा। सूचना के बाद मौके पर पहुंची बुढ़ार पुलिस और दमकल कर्मियों ने करीब 30 मिनट की भारी मशक्कत के बाद बमुश्किल आग पर काबू पाया। समय रहते आग बुझने से एक बेहद खौफनाक और बड़ा ऐतिहासिक हादसा टल गया, अन्यथा अगर यह आग पेट्रोल पंप तक पहुंच जाती तो पूरा इलाका स्वाहा हो सकता था। प्राथमिक जांच में हादसे की वजह शॉर्ट सर्किट या तकनीकी खराबी बताई जा रही है, जिसकी असली सच्चाई फॉरेंसिक जांच के बाद ही सामने आ पाएगी।(प्रशासन को चुनौती और तीखे सवाल,परंतु, इस भीषण अग्रिकांड ने क्षेत्र में धड़ल्ले से चल रहे अवैध कोयला परिवहन और परिवहन विभाग (RTO) व खनिज विभाग की संदिग्ध कार्यप्रणाली की पोल खोलकर रख दी है। विश्वसनीय सूत्रों की मानें तो हाईवे पर बिना वैध दस्तावेजों, बिना फिटनेस सर्टिफिकेट और नियमों को ताक पर रखकर क्षमता से दोगुना ओवरलोड कोयला लादकर दौड़ रहे ये कंडम ट्रक किसी 'चलते-फिरते टाइम बम' से कम नहीं हैं। रसूखदार माफियाओं के दबाव या कथित 'साठगांठ' के चलते जिम्मेदार अधिकारी इन खटारा वाहनों पर कार्रवाई करने के बजाय दफ्तरों में बंद आंखें मूंदे बैठे हैं। सवाल यह उठता है कि घनी आबादी वाले कॉलेज क्षेत्र और संवेदनशील पेट्रोल पंपों के पास इन असुरक्षित वाहनों को खड़े होने या गुजरने की अनुमति किसने दी? क्या प्रशासन किसी बड़ी जनहानि या सैकड़ों मौतों का इंतजार कर रहा था? इस हादसे ने सीधे तौर पर कानून व्यवस्था और सड़क सुरक्षा दावों को चुनौती दी है। पुलिस ने ट्रक को जब्त कर जांच तो शुरू कर दी है, लेकिन देखना यह होगा कि क्या जांच की आंच इस अवैध काले कारोबार के सिंडिकेट और लापरवाह अफसरों तक पहुंचती है, या फिर हर बार की तरह इस गंभीर लापरवाही को भी महज 'एक तकनीकी शॉर्ट सर्किट' का नाम देकर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।

Previous Post Next Post