लापरवाही की हद,वीआईपी जोन में जब 'मैडम कमिश्नर' सुरक्षित नहीं, तो आम जनता की सुरक्षा भगवान भरोसे,आधे शहर की बिजली गुल, गर्मी में तड़प रहे लोग
Junaid Khan - शहडोल। 04 जून 2026। मुख्यालय के सबसे सुरक्षित और संवेदनशील माने जाने वाले वीआईपी इलाके में आज शाम उस वक्त हड़कंप मच गया, जब शहडोल संभाग की कमिश्नर श्रीमती सुरभि गुप्ता के बंगले के सामने स्थित एक पुराना और बेहद कमजोर हो चुका विशालकाय पेड़ अचानक भरभरा कर बंगले की दीवार की ओर गिर गया। घटना शाम लगभग 7 से 8 बजे के बीच की है। गनीमत यह रही कि इस बेहद व्यस्त मार्ग पर जिस वक्त यह पेड़ गिरा, उस दौरान कोई इसकी जद में नहीं आया, वरना कई लोगों की जान जा सकती थी और दर्जनों गाड़ियां मलबे में तब्दील हो जातीं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इस मार्ग पर 24 घंटे हजारों लोगों और वाहनों का आवागमन रहता है, पूरा इलाका घनी आबादी और रिहायशी कॉलोनियों से घिरा हुआ है। आज एक बहुत बड़ी सामूहिक जनहानि होते-होते बची है। इस खौफनाक मंजर को देखकर राहगीर और स्थानीय निवासी सहम गए। सिर्फ राहगीर ही नहीं, बल्कि कमिश्नर बंगले के भीतर मौजूद स्वयं कमिश्नर मैडम, वहां तैनात सुरक्षाकर्मी और अन्य कर्मचारी भी बाल-बाल बच गए। पेड़ का इस तरह गिरना कोई मामूली बात नहीं है, यह सीधे तौर पर एक बड़े हादसे को खुला आमंत्रण था, जो प्रशासनिक मुस्तैदी के दावों की पोल खोलता है।
नगर पालिका, विद्युत विभाग और जिला प्रशासन की महा-लापरवाही,सिर्फ कागजों पर सिमटा आपदा प्रबंधन
इस पूरे घटनाक्रम ने जिला प्रशासन, नगर पालिका और विद्युत विभाग के गैर-जिम्मेदाराना रवैए को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। नियमानुसार मानसून की दस्तक से पहले या सामान्य दिनों में भी नगर पालिका और विद्युत विभाग को संयुक्त रूप से शहर के सभी मुख्य मार्गों, कॉलोनियों और सार्वजनिक स्थलों का सघन निरीक्षण करना होता है। इस सर्वे के दौरान जो भी पेड़ पुराने, खोखले या कमजोर पाए जाते हैं, उनकी स्थिति के अनुसार छंटाई (टीकाकरण) या उन्हें हटाने की कार्रवाई की जाती है। लेकिन शहडोल में धरातल पर सब शून्य साबित हुआ। सवाल यह उठता है कि जब संभाग की सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी यानी कमिश्नर महोदय के बंगले के ठीक सामने लगे पेड़ की सुध लेने वाला कोई नहीं है, तो शहर की अन्य कॉलोनियों, वार्डों और ग्रामीण अंचलों में आम जनता की सुरक्षा का क्या हाल होगा? जब जिले और संभाग के रहनुमा ही अपने सुरक्षित घेरे में महफूज नहीं हैं, तो आम जनता की हिफाजत की गारंटी कौन लेगा? यह हादसा साफ तौर पर दर्शाता है कि जिम्मेदार अधिकारी एयरकंडीशनर कमरों से बाहर निकलकर जमीनी हकीकत देखने को तैयार नहीं हैं।
हादसे के बाद घंटों शहर में पसरा ब्लैकआउट,भीषण गर्मी में उबल रही जनता
विद्युत विभाग की लापरवाही का खमियाजा अब शहर की आधी आबादी को भुगतना पड़ रहा है। पेड़ गिरने से बिजली के तार टूट गए और मुख्य सप्लाई लाइन पूरी तरह ठप हो गई। जून की इस रिकॉर्डतोड़ और झुलसा देने वाली भीषण गर्मी में आधे शहर की बिजली गुल है। लोग कई घंटों से बिना लाइट और पानी के तड़पने को मजबूर हैं। एक तरफ तो प्रशासनिक अमले की घोर लापरवाही के कारण इतना बड़ा हादसा हुआ, जिससे लोग बमुश्किल बचे, और अब उसी नाकामी की सजा आम जनता को इस उमस भरी गर्मी में भुगतनी पड़ रही है। इस घटना ने शहर की पूरी कानून और नागरिक व्यवस्था पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। अगर समय रहते नगर पालिका और बिजली विभाग ने अपनी कुंभकर्णी नींद नहीं तोड़ी और शहर के अन्य कमजोर पेड़ों व जर्जर तारों को दुरुस्त नहीं किया, तो आने वाले दिनों में किसी बड़े और आत्मघाती हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।
