भीषण गर्मी में मानवता की मिसाल,शहडोल स्टेशन पर 'सेवादारों' ने बुझाई हजारों राहगीरों की प्यास, स्थानीय प्रशासन और सामाजिक सरोकार का अनूठा संगम
Junaid Khan - शहडोल। आसमान से बरसती आग और रिकॉर्ड तोड़ती भीषण गर्मी के बीच जहां आम जनजीवन बेहाल है, वहीं शहडोल रेलवे स्टेशन का प्लेटफॉर्म क्रमांक 1 आज असीम श्रद्धा, करुणा और आत्मीयता का केंद्र बन गया। 'सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है' के मूल मंत्र को चरितार्थ करते हुए क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों और निष्ठावान सेवादारों ने एकजुट होकर एक विशाल जल सेवा अभियान की शुरुआत की। इस पुनीत कार्य के तहत स्टेशन पर आने-जाने वाले हजारों रेल यात्रियों, तपती धूप में सफर करने वाले राहगीरों और जरूरतमंदों को शीतल जल पिलाकर मानवता की सच्ची सेवा की गई। भीषण तपिश में गले को तर करती शीतल जल की हर बूंद यात्रियों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं थी। इस दौरान यात्रियों के चेहरों पर झलकी राहत की मुस्कान और दुआओं ने यह साबित कर दिया कि प्यासे को पानी पिलाना केवल एक दान नहीं, बल्कि मानवता के प्रति सच्ची श्रद्धा और अटूट प्रेम का सबसे बड़ा प्रतीक है। प्रशासनिक मुस्तैदी और सामाजिक सहभागिता का बेहतरीन तालमेल इस पूरे सेवा कार्य की सबसे बड़ी खूबसूरती स्थानीय प्रशासन और जागरूक समाज के बीच का वह तालमेल रहा, जिसकी हर तरफ सराहना हो रही है। रेलवे प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों ने यात्रियों की सुविधा को सर्वोपरि रखते हुए न केवल इस अभियान को सुचारू रूप से चलाने में हरसंभव सहयोग प्रदान किया, बल्कि स्टेशन परिसर में बुनियादी व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद रखकर यह साबित किया कि जब प्रशासन और जनता मिलकर काम करते हैं, तो व्यवस्थाएं आदर्श बन जाती हैं। भीषण गर्मी के इस दौर में प्रशासन द्वारा लगातार की जा रही मॉनिटरिंग और सामाजिक संस्थाओं को मिल रहे प्रोत्साहन के कारण ही आज शहडोल संभाग में जनसेवा के ऐसे बड़े उदाहरण देखने को मिल रहे हैं। अधिकारियों की सजगता और सेवादारों के हौसले के इसी गठजोड़ ने आज शहडोल रेलवे स्टेशन को एक अनुकरणीय मॉडल के रूप में स्थापित कर दिया है। इन कर्मयोगियों के समर्पण से प्रज्ज्वलित हुई मानवीय मूल्यों की ज्योति समाज में निस्वार्थ भाव, सहयोग और परोपकार की नई अलख जगाने वाले इस महाअभियान में क्षेत्र की कई जानी-मानी हस्तियों और सेवाभावी साथियों ने अपना सर्वस्व झोंक दिया। इस ऐतिहासिक सेवा कार्य में डॉ. एल. पी. सराफ जी, आजाद बहादुर सिंह जी, इसहाक खान जी एवं उनकी पूरी ऊर्जावान टीम, सरदार जसवीर सिंह पप्पू भैया, देवेन्द्र श्रीवास्तव जी, शेखर ढण्ढ जी, क्रिस्टी अब्राहम जी, रविंदर प्रसाद सिंह जी, अनुशील सिन्हा जी, निक्की जी, एडवोकेट प्रत्यूष रजक जी, धीरज भाई, आनंद मेश्राम जी, अनिल भाई, मुहम्मद शाहिद बड़का भाई, गौतम भाई, मंजूर अहमद जी, नन्हीं बिटिया माही, राजेंद्र सिंह जी, इम्तियाज भाई, संतु भाई तथा उपस्थित सभी सेवादार साथियों ने अग्रिम मोर्चे पर रहकर अपनी सेवाएं दीं। नन्हीं बिटिया माही की नन्हीं हथेलियों से पानी पीकर भावुक हुए यात्रियों ने पूरी टीम को हृदय से आशीर्वाद दिया। इन सभी कर्मयोगियों का यह निस्वार्थ समर्पण, अटूट सेवा भाव और जनकल्याण की पवित्र भावना आज समूचे समाज के लिए प्रेरणा का एक ऐसा जीवंत स्रोत बन चुकी है, जो आने वाली पीढ़ियों को भी मानव सेवा के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती रहेगी। सचमुच, इन सभी साथियों का यह प्रयास अक्षुण्ण और वंदनीय है।
