अमन-चैन और अकीदत के साथ संपन्न हुआ मोहर्रम,कर्बला के शहीदों की याद में नम आंखों से विदा हुए ताजिए

शहडोल में गंगा-जमुनी तहजीब की अनूठी मिसाल,परमट फाटक पर उमड़ा आस्था का जनसैलाब, प्रशासनिक चौकसी की चौतरफा सराहना 


Junaid Khan - शहडोल। शहडोल नगर में बीते दस दिनों से चल रहा मोहर्रम का मुकद्दस त्योहार आज अकीदत, गम और मुस्तैद प्रशासनिक व्यवस्थाओं के बीच शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गया। इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक चांद की पहली तारीख से शुरू हुआ यह सिलसिला आज यौम-ए-आशूरा यानी 10वीं तारीख (26 जून) को इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों की याद में ताजियों की विदाई के साथ मुकम्मल हुआ। पिछले दस दिनों से शहर के कोने-कोने में मजहबी तकरीरों, नातख्वानी और बयानों का दौर जारी था, जिसमें देश के जाने-माने उलेमा और नात ख्वाहों ने शिरकत कर कर्बला के ऐतिहासिक और मर्मस्पर्शी वाकयात से अवाम को रूबरू कराया। इस दौरान समूचा शहर इमाम साहब की याद में डूबा रहा और जगह-जगह लोगों ने अपनी स्वेच्छा व अकीदत के अनुसार शरबत, बिस्किट, नमकीन और लंगर (भंडारे) का बड़े पैमाने पर वितरण कर खिदमत-ए-खल्क की अनूठी मिसाल पेश की।

परमट फाटक पर हुआ ताजियों का मिलन, मन्नतें और अकीदत का दिखा सैलाब 

आशूरा के इस मुकद्दस मौके पर पिछले दो-तीन दिनों से अकीदतमंदों ने मुसलसल रोजे रखे और मस्जिदों व घरों में इबादत कर मुल्क की तरक्की और अमन-चैन की दुआएं मांगी। आज दोपहर बाद शहर के विभिन्न अखाड़ों और मोहल्लों से गगनचुंबी और बेहद खूबसूरत ताजिए पूरी शान-ओ-शौकत के साथ निकाले गए। शहर के हृदय स्थल रेलवे स्टेशन रोड स्थित परमिट फाटक के पास सभी ताजियों का पारंपरिक मिलन हुआ, जहाँ का नजारा देखने लायक था। इस दौरान कर्बला के दृश्य (सीन) को सजीव रूप में दर्शाया गया, जिसे देखने भारी तादाद में हर वर्ग के लोग पहुंचे। यहाँ अकीदतमंदों ने फातिया ख्वानी की, मन्नतें मांगी और मातम व जियारत का दौर चला। कई जगह पारंपरिक आस्था के अनुसार सवारियां और बाबा भी आए, जहाँ लोगों ने पूरी श्रद्धा के साथ दुआएं लीं। इसके बाद सभी ताजिए मस्जिदों के सामने से सलाम करते हुए अपने निर्धारित मुकाम और कर्बला की ओर बढ़े, जहाँ नम आंखों से पारंपरिक विधि के अनुसार पानी में ताजियों को ठंडा किया गया। ताजियों के विसर्जन के बाद माहौल बेहद भावुक हो गया, मानो हर आंख अपने किसी अजीज को रुखसत करने के गम में रो पड़ी हो।

प्रशासनिक मुस्तैदी ने जीता दिल,सुरक्षा और व्यवस्था के रहे पुख्ता इंतजाम 

इस पूरे संवेदनशील और विशाल आयोजन को निर्विघ्न संपन्न कराने में स्थानीय जिला व पुलिस प्रशासन की भूमिका अत्यंत सराहनीय और अनुकरणीय रही। चिलचिलाती धूप और भारी भीड़ के मद्देनजर कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात रहा। ट्रैफिक व्यवस्था को इस तरह संभाला गया कि न तो आम राहगीरों को परेशानी हुई और न ही ताजियों के जुलूस में कोई बाधा आई। संवेदनशील मोड़ों, परमिट फाटक और कर्बला मैदान पर सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के जरिए निगरानी रखी गई। प्रशासनिक अधिकारियों और वालंटियर्स के बीच का तालमेल इतना सटीक था कि कहीं भी अप्रिय स्थिति निर्मित नहीं हुई। शांति समिति की बैठकों से लेकर जमीन पर मुस्तैदी दिखाने वाले सभी प्रशासनिक अधिकारियों, नगर पालिका अमले और पुलिस जवानों की सजगता के कारण ही शहर में कानून व्यवस्था और आपसी भाईचारा पूरी तरह कायम रहा।

कमेटी और अवाम के सेवाभाव की चौतरफा तारीफ

जितनी सराहना प्रशासन की हो रही है, उतनी ही तारीफ मोहर्रम कमेटियों, लायसेंसदारों और शहर के आम नागरिकों की भी हो रही है। दस दिनों तक लगातार बिना थके जिस तरह से युवाओं और बुजुर्गों ने लंगर, पानी और चिकित्सा सहायता के स्टाल लगाए, उसने शहडोल की गंगा-जमुनी तहजीब को और मजबूत किया है। हिंदू-मुस्लिम दोनों ही समुदायों के लोगों ने मिलकर इस आयोजन को सफल बनाया, जो यह साबित करता है कि शहडोल हमेशा से आपसी सौहार्द का गढ़ रहा है। हर अखाड़े ने अनुशासन का परिचय दिया, जिससे विसर्जन का यह गमगीन और बड़ा त्योहार बेहद गरिमापूर्ण ढंग से इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया।

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