करंट' का नेटवर्क,पार्षद के पत्रों पर भी सोता रहा बिजली विभाग,सोहागपुर में टेंट कर्मी को मौत के मुंह में धकेला

लापरवाही के पुख्ता सबूत, वार्ड 19 और 31 में लटकते तारों की शिकायत को कबाड़ में डाल चुका है एमपीईबी,बड़े हादसों का इंतजार


Junaid Khan - शहडोल। जिला मुख्यालय और आसपास के क्षेत्रों में बिजली कंपनी (MPPKVVCL) की जानलेवा लापरवाही अब जनता के खून से सनने लगी है। सोहागपुर के राजाबाग इलाके में मंगलवार दोपहर 33 केवी हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे टेंट श्रमिक मुनेश बैगा (35 वर्ष) का हादसा कोई अप्रत्याशित घटना नहीं है, बल्कि यह बिजली विभाग के उस निकम्मेपन का सीधा नतीजा है, जिसके खिलाफ जनप्रतिनिधि लगातार लिखित चेतावनी दे रहे थे। 'दैनिक प्रदेश सत्ता' के हाथ लगे सनसनीखेज दस्तावेजों से साफ जाहिर होता है कि नगर पालिका परिषद शहडोल के मनोनीत पार्षद विनय कुमार केवट ने घटना से ठीक पहले 1 जून 2026 को ही बिजली विभाग के कार्यपालन अभियंता (EE) को दो अलग-अलग आधिकारिक पत्र सौंपकर शहर में मौत बनकर मंडरा रहे खुले और ढीले तारों को ठीक करने की गुहार लगाई थी। विभाग ने इन पत्रों पर रिसीविंग की सील तो ठोक दी, लेकिन फाइलों को ठंडे बस्ते में डाल दिया। नतीजा? कुछ ही दिनों बाद एक गरीब मजदूर हाईटेंशन लाइन का शिकार होकर अस्पताल के बर्न वार्ड में पहुंच गया।

दस्तावेजों ने खोली पोल: छतों को छू रहे खुले तार, सड़कों पर नीचे झुकी केबलें,पर कुंभकर्णी नींद में जिम्मेदार

पार्षद विनय कुमार केवट द्वारा बिजली विभाग को सौंपे गए शिकायती पत्र सीधे तौर पर विभाग की आपराधिक उदासीनता को बयां करते हैं। पहले पत्र में वार्ड क्रमांक 31 स्थित खेरमाई मंदिर के पास शिवकुमार गुप्ता (भैया) एवं अन्नू गुप्ता के घरों के पास से गुजरी खुली विद्युत लाइनों का जिक्र है, जो इतनी कम ऊंचाई पर हैं कि घरों की छतों को छू रही हैं। पत्र में साफ लिखा था कि छतों पर बच्चे खेलते रहते हैं और कभी भी कोई अप्रत्याशित अप्रिय घटना हो सकती है, इसलिए इन्हें बदलकर केबल लगाई जाए। वहीं, दूसरे पत्र में वार्ड क्रमांक 19 के घरौला तालाब के ऊपर महावीर गोले के घर से लेकर संतोष रैकवार एवं रंगलाल के घरों तक बिजली के तारों के काफी नीचे झुक जाने की शिकायत थी, जिससे सड़क से गुजरने वाले वाहनों के टकराने और बड़े हादसे की आशंका जताई गई थी। इन दोनों संवेदनशील पत्रों पर कार्यपालन अभियंता कार्यालय द्वारा 01/06/2026 की पावती (रिसीविंग) दर्ज है। इसके बावजूद बिजली विभाग के मैदानी अमले ने आंखें मूंदे रखीं, जिससे साफ है कि अफसरों को नागरिकों की जान की कोई परवाह नहीं है।

प्रशासन और विभाग को सीधी चुनौती,कब बंद होगा अवैध टेंट संचालन और लटकते तारों का खूनी खेल?

सोहागपुर में मुनेश बैगा (निवासी वार्ड-1 कुदरा टोला) के लोहे के पाइप के साथ 33 केवी विद्युत लाइन की चपेट में आने की घटना ने अब पूरे प्रशासनिक अमले को कटघरे में खड़ा कर दिया है। एक तरफ जहां टेंट संचालक बिना किसी सुरक्षा उपकरणों (ग्लव्स, हेलमेट, इंसुलेशन) के मजदूरों से जोखिम भरा काम करवा कर अवैध मुनाफा कमा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बिजली विभाग शहर के घनी आबादी वाले और रिहायशी इलाकों से इन खूंखार लाइनों को शिफ्ट करने या उन्हें व्यवस्थित करने में पूरी तरह नाकाम रहा है। पुलिस ने सोहागपुर मामले में टेंट संचालक की लापरवाही को मानकर जांच तो शुरू कर दी है, लेकिन सवाल उठता है कि पार्षद के पत्रों को नजरअंदाज करने वाले बिजली विभाग के उन जिम्मेदार अधिकारियों पर एफआईआर (FIR) कब दर्ज होगी? क्या जिला प्रशासन इन लापरवाह अफसरों को बचाने का प्रयास करेगा या फिर शहर की सुरक्षा के लिए इन लटकते खूनी तारों और अवैध रूप से चल रहे टेंट व्यवसायों पर कोई ठोस और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी? यदि अब भी एक्शन नहीं हुआ, तो यह साफ माना जाएगा कि अगली किसी भी मौत का जिम्मेदार स्वयं प्रशासन और बिजली कंपनी का प्रबंधन होगा।

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