कागजी फरमान या जमीनी हंटर? शहडोल में 'कचरा माफिया' पर नपा की कागजी सख्ती,नियमों को ठेंगा दिखा रहे रसूखदार मैरिज गार्डन और आलीशान होटल
Junaid Khan - शहडोल। शहडोल जिला मुख्यालय को स्वच्छ और कचरा मुक्त बनाने का दम भरने वाली नगर पालिका परिषद का एक और बड़ा प्रशासनिक पैंतरा सामने आया है। नगर पालिका ने शहर के 'थोक कचरा उत्पादकों' (बल्क वेस्ट जनरेटर्स - BWG) यानी बड़े होटलों, रेस्टोरेंट्स, आलीशान मैरिज गार्डनों, व्यावसायिक धर्मशालाओं और 50 से अधिक फ्लैटों वाले रसूखदार रहवासी संघों पर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के तहत शिकंजा कसने का ऐलान तो कर दिया है, लेकिन बड़ा यक्ष प्रश्न यह खड़ा होता है कि क्या यह केवल एक और औपचारिक कागजी खानापूर्ति है या प्रशासनिक इच्छाशक्ति का असल प्रदर्शन? नगर पालिका द्वारा 12 जून को जारी सार्वजनिक चेतावनी के मुताबिक, नियमों का उल्लंघन करने वाले इन बड़े रसूखदार संस्थानों से महज 500 रुपये प्रतिदिन की दर से जुर्माना वसूला जाएगा। प्रतिदिन लाखों रुपये का टर्नओवर रखने वाले इन बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए 500 रुपये का यह नाममात्र का जुर्माना 'ऊंट के मुंह में जीरा' साबित हो रहा है, जिससे साफ जाहिर होता है कि प्रशासन की इस तथाकथित सख्ती की आड़ में कहीं न कहीं रसूखदारों को खुली छूट देने की गंदी साजिश तो नहीं चल रही? नियमों का माखौल और प्रशासन को सीधी चुनौती। जमीनी हकीकत पर गौर करें तो शहर के बीचों-बीच संचालित हो रहे कई बड़े होटल और मैरिज गार्डन हर दिन नगर पालिका की कचरा गाड़ियों पर ही निर्भर रहते हैं और अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए सैकड़ों किलोग्राम कचरा खुलेआम सार्वजनिक नालों या मुख्य सड़कों के किनारे डंप कर देते हैं। नए कड़े नियमों के मुताबिक, 20,000 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले भवन, प्रतिदिन 40,000 लीटर से अधिक पानी खपाने वाले या प्रतिदिन 100 किलोग्राम से अधिक ठोस कचरा निकालने वाले सभी संस्थानों को अनिवार्य रूप से 'थोक कचरा उत्पादक' (BWG) माना गया है। नियमानुसार, इन्हें केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के पोर्टल पर अनिवार्य पंजीकरण कराना होगा और सबसे अहम शर्त यह है कि इन्हें अपने गीले कचरे का निपटान अपने ही परिसर में इन-हाउस कंपोस्टिंग, बायोगैस प्लांट या ओबीडब्ल्यू मशीन लगाकर करना होगा। इसके बावजूद, शहर के रसूखदार कारोबारी खुलेआम नियमों को ठेंगा दिखाकर पर्यावरण और जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। अब देखना यह है कि क्या नगर पालिका का अमला इन सफेदपोश रसूखदारों के आलीशान परिसरों के भीतर घुसकर उनकी लॉग बुक और कचरा केयरटेकर की जांच करने का साहस जुटा पाएगा, या फिर यह कार्रवाई केवल छोटे फुटपाथी दुकानदारों और आम जनता को डराने तक ही सिमट कर रह जाएगी? लाइसेंस निरस्तीकरण की चेतावनी: महज गीदड़भभकी या होगी आर-पार की जंग?
नगर पालिका के मुख्य नगरपालिका अधिकारी (सीएमओ) निशांत सिंह ठाकुर के हवाले से यह साफ किया गया है कि यदि इन संस्थानों ने अपनी मनमानी और लापरवाही नहीं रोकी, तो न केवल ₹500 प्रतिदिन का जुर्माना लगेगा, बल्कि बार-बार उल्लंघन करने पर उनके व्यापारिक और संचालन लाइसेंस तक निरस्त किए जा सकते हैं। इस नियम को अप्रैल 2026 से ही पूरे शहर में प्रभावी घोषित किया जा चुका है, लेकिन आज भी शहर के मैरिज गार्डनों और बड़े हॉस्टलों से निकलने वाला बचा हुआ सड़ा-गला खाना, प्लास्टिक और अन्य घातक अपशिष्ट खुलेआम शहर की आबोहवा को दूषित कर रहे हैं। यदि नगर पालिका सचमुच शहडोल को कचरा मुक्त बनाना चाहती है, तो उसे कागजी चेतावनियों के दौर से बाहर निकलकर, बिना किसी राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव के इन 'कचरा माफियाओं' और नियमों का मखौल उड़ाने वाले बड़े व्यावसायिक घरानों पर सीधे तालाबंदी और भारी-भरकम जुर्माने की दंडात्मक कार्रवाई करनी होगी। शहर की प्रबुद्ध जनता अब यह देखने का इंतजार कर रही है कि प्रशासन का यह हंटर रसूखदारों पर कब और कैसे चलता है, या फिर यह मामला भी ठंडे बस्ते के हवाले हो जाएगा।
