कमाऊ पूत' माइंस पर ताला लगाने की प्रशासनिक साजिश? दोहरी जिम्मेदारी के दलदल में फंसा रामपुर बटुरा का कार्मिक विभाग
Junaid Khan - शहडोल। प्रबंधन की लापरवाही से सुलग रहा है श्रमिकों का आक्रोश, दो-दो बार ऑफिस आर्डर जारी होने के बाद भी आई.आर. मीटिंग 'कैंसिल पे कैंसिल', क्या जानबूझकर बिगाड़ा जा रहा है औद्योगिक माहौल? शहडोल। सोहागपुर क्षेत्र। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) के सोहागपुर एरिया की रीढ़ और सबसे ज्यादा कोयला उत्पादन देने वाली रामपुर बटुरा परियोजना इस समय प्रशासनिक विफलता और घोर अव्यवस्था के दौर से गुजर रही है। आलम यह है कि जो माइंस कंपनी की तिजोरी भर रही है, उसी के श्रमिक आज अपनी जायज समस्याओं के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। इस भारी असंतोष की मुख्य वजह कार्मिक विभाग का गैर-जिम्मेदाराना रवैया है, जहाँ के कार्मिक प्रबंधक को एक साथ दो-दो जगह का प्रभार सौंपकर पूरे सिस्टम को मजाक बना दिया गया है। 'एक अनार सो बीमार' की तर्ज पर चल रहे इस प्रशासनिक ढर्रे के कारण न इधर का काम हो पा रहा है और न उधर का। कार्मिक प्रबंधक खुद दबी जुबान स्वीकार कर रहे हैं कि एरिया का काम और दोहरी जिम्मेदारी होने के कारण रामपुर बटुरा सही ढंग से मैनेज नहीं हो पा रहा है। प्रबंधन की इस लचर कार्यप्रणाली के कारण हर महीने होने वाली एटक (AITUC) यूनियन की आई.आर (Industrial Relations) मीटिंग 'कैंसिल पे कैंसिल' हो रही है। हैरान करने वाली बात यह है कि दो-दो बार आधिकारिक ऑफिस आर्डर (कार्यालय आदेश) निकलने के बाद भी आज दिनांक तक आई.आर. मीटिंग नहीं हो पाई है, जिससे श्रमिकों की फाइलें धूल खा रही हैं और कार्मिक विभाग तमाशा देख रहा है। उत्पादन ठप हुआ तो जिम्मेदार कौन? परमानेंट कार्मिक अधिकारी की मांग को लेकर आर-पार के मूड में श्रमिक संगठन कार्मिक विभाग किसी भी औद्योगिक इकाई में प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच समन्वय की सबसे अहम कड़ी होता है, जिसका काम समयबद्ध समाधान और बेहतर औद्योगिक माहौल बनाए रखना है। लेकिन रामपुर बटुरा में इस महत्वपूर्ण पद को पार्ट-टाइम जॉब बनाकर रख दिया गया है। समय न मिलने के कारण कर्मचारियों की बुनियादी और गंभीर शिकायतों का लंबे समय से निराकरण नहीं हो रहा है, जिससे श्रमिक संगठनों और आम कामगारों में भारी नाराजगी और उबाल है। जानकारों का साफ कहना है कि यदि लंबे समय तक यही ढांचा रहा, तो इसका सीधा विपरीत असर माइंस के प्रोडक्शन (उत्पादन) और वर्षों पुराने श्रमिक संबंधों पर पड़ेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सोहागपुर क्षेत्र के शीर्ष प्रबंधन की होगी। अब श्रमिक संगठनों ने दोटूक लहजे में आर-पार की लड़ाई का ऐलान करते हुए मांग की है कि इस संवेदनशील और सर्वाधिक उत्पादन देने वाली माइंस में तत्काल एक स्थायी और पूर्णकालिक (फुल-टाइम) कार्मिक अधिकारी की नियुक्ति की जाए। यदि प्रबंधन ने अपनी कुंभकर्णी नींद से जागकर इस चुनौती को स्वीकार नहीं किया और जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो आने वाले दिनों में रामपुर बटुरा परियोजना में औद्योगिक शांति भंग होना तय है, जिसकी गूंज सीधे सीएमडी मुख्यालय तक सुनाई देगी।
