मौत के साए में सज रहा शाहडोल का बाजार,हाई वोल्टेज तारों और ट्रांसफार्मरों के नीचे अवैध कब्जों से महाविस्फोट का खतरा,कुंभकर्णी नींद में सोया नगर पालिका प्रशासन

बिजली कंपनी ने पत्र लिखकर जतायी बड़े हादसे और जनहानि की आशंका, आंधी-तूफान के बीच करंट के रिसाव और तारों के टूटने का बढ़ा जोखिम; अवैध दुकानदारों और लापरवाह अफसरों को खुली चुनौती 


Junaid Khan - शहडोल। शहर में प्रशासनिक अनदेखी और चंद रुपयों के लालच में हजारों मासूम जिंदगियों को मौत के मुंह में धकेलने का एक बड़ा खेल खेला जा रहा है। मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (शाहडोल शहर) के सहायक अभियंता द्वारा जारी एक अत्यंत आवश्यक पत्र (क्र./स/कार्य/स/अभि/बिजली/सुरक्षा/-196) ने स्थानीय नगर पालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। पत्र में साफ तौर पर आगाह किया गया है कि शाहडोल शहर के भीतर मुख्य मार्गों और रिहायशी इलाकों में हाई वोल्टेज बिजली के तारों, खंभों और सीधे मौत के जनरेटर कहे जाने वाले ट्रांसफार्मरों के ठीक नीचे सब्जी के ठेले, पान की दुकानें व अन्य कई प्रकार के अवैध व्यावसायिक प्रतिष्ठान धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं। इन संवेदनशील और खतरनाक स्थानों पर दिनभर आम जनता की भारी भीड़ उमड़ती है, जो किसी भी वक्त एक बड़े सामूहिक मौत के तांडव में तब्दील हो सकती है। सबसे शर्मनाक पहलू यह है कि इस गंभीर खतरे की जानकारी होने के बावजूद नगर पालिका परिषद शाहडोल का दस्ता हाथ पर हाथ धरे बैठा है, मानो प्रशासन को किसी बड़ी मानवीय त्रासदी का इंतजार हो। वर्तमान में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल चुका है और आंधी, पानी व तेज बारिश का दौर शुरू हो गया है। ऐसे में तेज हवाओं के कारण पेड़ों और उनकी डालियों के टूटकर सीधे बिजली के तारों पर गिरने की प्रबल संभावना बनी रहती है। विद्युत विभाग ने तकनीकी रूप से सचेत किया है कि प्राकृतिक आपदा या तेज आंधी-तूफान के चलते यदि कोई हाई-टेंशन तार टूटकर नीचे गिरता है, या फिर बारिश के पानी के कारण ट्रांसफार्मर और खंभों में 'लीकेज करंट' आता है, तो वहां मौजूद दर्जनों लोग एक झटके में काल के गाल में समा जाएंगे। यह कोई सामान्य लापरवाही नहीं, बल्कि सीधे तौर पर जानते-बूझते हुए जनता की जान से खिलवाड़ करने का मामला है। चंद अवैध दुकानदारों की मनमानी और प्रशासनिक सांठगांठ के कारण पूरे बाजार को बारूद के ढेर पर बिठा दिया गया है, जहां करंट का एक छोटा सा रिसाव महाविस्फोट का रूप ले सकता है। बिजली कंपनी के सहायक अभियंता ने नगर पालिका के मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) को पत्र (दिनांक 15/06/2026, जो विभागीय अमलों में 18/06/2026 तक पहुंचा) भेजकर बेहद कड़े शब्दों में आग्रह किया है कि इन सभी अव्यवस्थित और जानलेवा स्थानों पर संचालित हो रही अवैध दुकानों को तत्काल चिन्हित कर हटाया जाए और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर व्यवस्थित किया जाए। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब खुद सरकारी बिजली विभाग इस जानलेवा जमीनी हकीकत को स्वीकार कर लिखित चेतावनी दे रहा है, तो फिर नगर पालिका का अतिक्रमण विरोधी दस्ता और जिम्मेदार अधिकारी किस दबाव में कार्रवाई करने से कतरा रहे हैं? क्या इन अवैध दुकानदारों को किसी राजनीतिक रसूखदार का संरक्षण प्राप्त है या फिर विभागीय अधिकारियों की जेबें गर्म हो रही हैं? इस तीखी चुनौती के बाद अब जनता यह देखना चाहती है कि प्रशासन इस पत्र पर त्वरित बुल्डोजर या विस्थापन की कार्रवाई करता है, या फिर हमेशा की तरह किसी बेगुनाह की मौत के बाद ही जागा जाएगा।

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