कमरतोड़ महंगाई के बीच तुगलकी फरमान, जिला व्यापारी संघ ने मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन,कहा-निर्णय वापस न हुआ तो मंडियों की व्यवस्था करेंगे ध्वस्त"
Junaid Khan - शहडोल। आर्थिक मंदी, युद्ध के वैश्विक संकट और आसमान छूती महंगाई से जूझ रहे किसान, व्यापारी और आम उपभोक्ताओं की पीठ पर प्रशासन ने मंडी शुल्क में बेतहाशा वृद्धि कर एक और 'आर्थिक प्रहार' कर दिया है। शासन के इस जनविरोधी और तुगलकी फैसले के खिलाफ अब जिला व्यापारी संघ ने सीधे आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। ग्रामीण सड़कों और गौशालाओं के रख-रखाव का खोखला हवाला देकर मंडी बोर्ड द्वारा शासन को भेजे गए इस प्रस्ताव ने न केवल कृषि व्यापार को गर्त में धकेलने का काम किया है, बल्कि मंडियों में चल रहे अंदरूनी खेल और प्रशासनिक तानाशाही को भी उजागर कर दिया है। इस मनमाने फैसले को वापस लेने और मंडी बोर्ड की इस शोषक व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त कर मंडियों को सीधे किसानों के हवाले करने की मांग को लेकर जिला व्यापारी संघ ने मुख्यमंत्री के नाम एक तीखा ज्ञापन कृषि उपज मंडी प्रबंधन को सौंपा है, जिसने सीधे तौर पर प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।
अवैध उगाही और कुप्रबंधन पर कड़ा प्रहार,क्या भारसाधक व्यवस्था सिर्फ लूट का जरिया?
व्यापारी नेताओं और किसान प्रतिनिधियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि वर्तमान में डीजल, पेट्रोल, गैस, खाद्य पदार्थ और जरूरी दवाओं के दाम पहले से ही बेलगाम हैं, जिससे आम उपभोक्ता और किसान पूरी तरह टूट चुके हैं। ऐसे विपरीत दौर में मंडी शुल्क में बढ़ोतरी करना न्यायसंगत नहीं है। ज्ञापन में सीधे तौर पर मंडी बोर्ड की वर्तमान 'भारसाधक व्यवस्था' को समाप्त करने की मांग की गई है, क्योंकि यह व्यवस्था मंडियों की आत्मनिर्भरता और उनकी स्थायी संचालन व्यवस्था को पंगु बना रही है। अंदरखाने चल रहे अवैध घालमेल और शुल्क के नाम पर होने वाली मनमानी को चुनौती देते हुए संघ ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक मंडी अपनी स्थानीय और स्थायी व्यवस्था के हिसाब से बेहतर ढंग से संचालित हो सकती है, इसलिए इस सरकारी दखलअंदाजी और वसूली के तंत्र को तुरंत बंद किया जाना चाहिए।
आर-पार की जंग,बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार, प्रशासन के फूले हाथ-पांव
मुख्यमंत्री के नाम सौंपे गए इस आक्रोश पत्र के दौरान जिला व्यापारी संघ के अध्यक्ष लक्ष्मण गुप्ता सहित क्षेत्र के प्रतिष्ठित व्यापारी व सामाजिक प्रतिनिधि मनोज सराफ, अनिल रोहरा, प्रकाश ओचानी, शानउल्ला खान, गोपाल सराफ, विकास जेठानी, विपयन सोनी, दिलीप सोनी, ज्ञानचन्द्र गुप्ता और दादूलाल गुप्ता सहित भारी संख्या में लोग मौजूद रहे। संघ ने दो टूक लहजे में प्रशासन को चेताया है कि यदि इस जनविरोधी शुल्क वृद्धि पर तुरंत रोक नहीं लगाई गई और मंडी बोर्ड की शोषक नीतियों को वापस नहीं लिया गया, तो पूरे संभाग की मंडियों में कामकाज ठप कर उग्र आंदोलन किया जाएगा। अब देखना यह है कि कुंभकर्णी नींद में सोया प्रशासन इस खुली चुनौती के बाद जागता है या फिर किसानों और व्यापारियों का यह गुस्सा व्यवस्था को पूरी तरह से ठप करने का सबब बनता है।
