संस्कृति विभाग की अनूठी पहल,जेल प्रहरी के कंधों पर मिली अदब को संवारने की महती जिम्मेदारी, भोपाल में निदेशक डॉ. नुसरत मेहदी ने सौंपी कमान
Junaid Khan - शहडोल। उमरिया भोपाल मध्य प्रदेश शासन के संस्कृति विभाग के अंतर्गत संचालित मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी ने जमीनी स्तर पर अदब, कला और सांस्कृतिक चेतना को जीवंत करने की दिशा में एक युगांतरकारी और बेहद सराहनीय निर्णय लिया है। प्रदेश की धरा पर साहित्यिक गतिविधियों को विस्तार देने की इसी कड़ी में, उमरिया जिला जेल में पूर्ण निष्ठा के साथ प्रहरी के पद पर सेवारत, क्षेत्र के विख्यात युवा शायर और सजग समाजसेवी 'शारिब' पूर्वांचली को उमरिया जिले का केंद्र संयोजक (जिला समन्वयक) नियुक्त किया गया है। यह अत्यंत महत्वपूर्ण और गरिमामयी नियुक्ति उर्दू अकादमी, भोपाल की कुशल मार्गदर्शक, निदेशक व सुविख्यात शायरा डॉ. नुसरत मेहदी द्वारा विभागीय मानदंडों और योग्यताओं को परखने के बाद की गई है। इस ऐतिहासिक मोड़ पर 'शारिब' पूर्वांचली ने भोपाल स्थित मुख्य कार्यालय में निदेशक डॉ. नुसरत मेहदी से सौजन्य मुलाकात की। इस गरिमामयी भेंट के दौरान 'शारिब' ने निदेशक महोदया को पुष्पगुच्छ भेंट कर शासन एवं अकादमी द्वारा जताए गए इस अभूतपूर्व विश्वास और नई प्रशासनिक व साहित्यिक जिम्मेदारी के लिए अपना गहरा आभार व कृतज्ञता ज्ञापित की।
प्रशासनिक दायित्वों के साथ मानवीय चेतना की मिसाल: बंदियों के हृदय परिवर्तन और निशुल्क शिक्षा की अलख जगाने का मिला प्रतिफल। यह नियुक्ति इस बात का जीवंत प्रमाण है कि शासन और प्रशासन केवल कागजी खानापूर्ति नहीं करता, बल्कि समाज की अंतिम पंक्ति में बैठकर सकारात्मक बदलाव लाने वाले सच्चे साधकों को खोजकर उन्हें मुख्य पटल पर सम्मान देता है। 'शारिब' पूर्वांचली केवल खाकी की वर्दी पहनकर शासकीय कर्तव्यों का निर्वहन ही नहीं कर रहे हैं, बल्कि एक सजग प्रहरी के रूप में उन्होंने जेल की सलाखों के पीछे बंद बंदियों के अंतर्मन को झकझोरने, उनके भीतर मानवीय संवेदनाएं जगाने और उन्हें अपराध बोध से मुक्त कर समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए कई क्रांतिकारी एवं अनुकरणीय प्रयास किए हैं। प्रशासन की इस दूरदर्शी सोच की सर्वत्र सराहना हो रही है कि उन्होंने एक ऐसे व्यक्तित्व को चुना है जो न केवल शब्दों का जादूगर है, बल्कि धरातल पर बदलाव का वाहक भी है। 'शारिब' अपनी कलम की धार के साथ-साथ समाज के प्रति अपनी गहरी जवाबदेही के लिए भी विख्यात हैं। वे लंबे समय से गरीब, वंचित और जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए अपने व्यक्तिगत प्रयासों से निशुल्क प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग संचालित कर रहे हैं और युवाओं को सही मार्गदर्शन दे रहे हैं। इतना ही नहीं, सामाजिक सरोकारों को सर्वोपरि रखते हुए उन्होंने कई सार्वजनिक और सामाजिक स्थलों पर अपने निजी व्यय से जनसुविधा हेतु कुर्सियां व अन्य आवश्यक सामग्रियां उपलब्ध करवाई हैं, जो उनके उदार और समर्पित व्यक्तित्व को रेखांकित करता है। अदबी गलियारों में उत्सव सा माहौल: उस्ताद और 'वातायन' समूह के वरिष्ठों के प्रति जताया आभार, बधाई देने वालों का लगा तांता
'शारिब' पूर्वांचली की विशिष्ट ग़ज़ल शैली, शब्दों का सटीक एवं मर्मस्पर्शी चयन और उर्दू अदब के प्रति उनकी निष्काम ललक को देखते हुए लिया गया यह निर्णय उमरिया जिले सहित पूरे प्रदेश के साहित्यिक जगत में एक नई ऊर्जा और वैचारिक चेतना का संचार करने वाला सिद्ध होगा। स्थानीय प्रबुद्ध वर्ग और वरिष्ठ साहित्यकारों का मानना है कि इस कदम से न केवल उर्दू साहित्य को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि गंगा-जमुनी तहजीब और कौमी एकता को भी जमीनी स्तर पर मजबूती मिलेगी। इस गौरवपूर्ण और ऐतिहासिक उपलब्धि पर अपनी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए 'शारिब' पूर्वांचली ने अत्यंत शालीनता से इसका श्रेय अपने गुरुओं और सहयोगियों के मार्गदर्शन को दिया। उन्होंने विशेष तौर पर अपने ग़ज़ल उस्ताद व विख्यात ग़ज़ल ग्रुप संचालक श्री दिनेश भोपाली एवं आरती बख्शी के प्रति अपना आदर व आभार प्रकट किया। इसके साथ ही, उमरिया की प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था 'वातायन' समूह के सभी मार्गदर्शक और वरिष्ठ सदस्यों श्री अनिल मिश्रा, श्री कुलदीप कुमार, श्री योगेश पाण्डेय, श्री राजकुमार महोबिया, श्री भूपेंद्र त्रिपाठी सहित तमाम साथियों का हृदय से धन्यवाद किया। इस गौरवमयी नियुक्ति की सूचना मिलते ही उमरिया से लेकर उनके गृहक्षेत्र प्रयागराज तक के साहित्यिक गलियारों, प्रशासनिक अधिकारियों, प्रबुद्ध बुद्धिजीवियों, वरिष्ठ रचनाकारों और उनके शुभचिंतकों द्वारा उन्हें निरंतर बधाई संदेश भेजे जा रहे हैं, तथा संस्कृति विभाग व अकादमी की निदेशक डॉ. नुसरत मेहदी के इस निष्पक्ष और दूरगामी फैसले की पुरजोर सराहना की जा रही है।
