अल्टीमेटम,मूलभूत सुविधाओं की उपेक्षा पर भड़के पार्षद और जनता,सीएमओ को सौंपा मांग पत्र,15 दिन में समाधान नहीं तो उग्र आंदोलन की चेतावनी
Junaid Khan - शहडोल। मानसून की पहली ही फुहार ने नगर पालिका के खोखले दावों की पोल खोलकर रख दी है, लेकिन प्रशासन अभी भी गहरी नींद में सोया हुआ है। शहर के समस्त वार्डों में मूलभूत सुविधाओं की घोर उपेक्षा की जा रही है, जिससे स्थानीय वार्डवासियों और पार्षदों का आक्रोश अब फूट पड़ा है। पिछले चार वर्षों से नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारी शहर में समुचित साफ-सफाई, पेयजल व्यवस्था, सड़क और नाली निर्माण जैसे बेहद बुनियादी कार्यों को भी कराने में पूरी तरह नाकाम साबित हुए हैं। इस घोर प्रशासनिक विफलता को लेकर नेता प्रतिपक्ष व वार्ड क्रमांक 29 के पार्षद शक्ति लक्षकार, वार्ड क्रमांक 14 के पार्षद संजीव प्रताप सिंह सहित बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) का घेराव कर एक तीखा शिकायती पत्र सौंपा है। पार्षदों ने दो टूक शब्दों में प्रशासन को चुनौती देते हुए 15 दिनों का अल्टीमेटम दिया है कि यदि जल्द ही उनकी जायज मांगों को संज्ञान में लेकर धरातल पर काम शुरू नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन के लिए विवश होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी नपा प्रशासन की होगी।
भाजपा पार्षदों की उपेक्षा, फाइलों में दबे पड़े हैं जनता के बुनियादी अधिकार
सौंपे गए मांग पत्र में पार्षदों ने बेहद गंभीर और तीखे आरोप लगाते हुए कहा है कि इस कार्यकाल में जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधियों, विशेषकर भाजपा पार्षदों की लगातार उपेक्षा की जा रही है। स्वच्छता प्रभारी, जलप्रदाय प्रभारी और परिषद के माध्यम से समय-समय पर शहर की बदहाली और मूलभूत सुविधाओं की कमी से अवगत कराया गया, किंतु आज दिनांक तक इस दिशा में कोई ठोस प्रयास नहीं किए गए। हालात इतने बदतर हैं कि पिछले चार सालों में शहर के भीतर पाइपलाइन का कोई विस्तार नहीं किया गया, जिसके कारण कई वार्डों में आज भी बूंद-बूंद पानी के लिए त्राहि-त्राहि मची हुई है। संपूर्ण वार्डों में साफ-सफाई की स्थिति बेहद दयनीय है। बड़े नालों की सफाई के लिए नपा को कई बार लिखित अनुरोध किया गया, लेकिन अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। पहली ही बारिश में नगर के सभी प्रमुख स्थल और सड़कें जलमग्न हो जाते हैं, जिससे यह साफ है कि भ्रष्टाचार और लापरवाही के चलते जलभराव से निपटने की कोई तैयारी नहीं की गई है।
कोतवाली पुलिस की मुस्तैदी ने संभाला मोर्चा, बिगड़ने नहीं दी कानून-व्यवस्था
एक तरफ जहां नगर पालिका प्रशासन की इस घोर लापरवाही और निष्क्रियता के कारण जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर है और शहर में तनावपूर्ण माहौल निर्मित हो रहा है, वहीं दूसरी ओर कोतवाली पुलिस की सजगता और मुस्तैदी काबिले तारीफ रही। सीएमओ कार्यालय के घेराव और आक्रोशित जनता के भारी हुजूम को देखते हुए कोतवाली पुलिस बल तुरंत मौके पर पहुंचा। कोतवाली पुलिस ने अपनी त्वरित और सूझबूझ भरी कार्यशैली का परिचय देते हुए न केवल आक्रोशित नागरिकों को शांत कराया, बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों और जनता के बीच तीखी बहस के दौरान भी कानून-व्यवस्था को पूरी तरह नियंत्रण में रखा। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कोतवाली पुलिस ने समय रहते मोर्चे को नहीं संभाला होता, तो नगर पालिका अधिकारियों के प्रति पनप रहा जन-आक्रोश किसी बड़ी अप्रिय स्थिति का रूप ले सकता था। शहर में शांति बनाए रखने और वीआईपी ड्यूटी के साथ-साथ नागरिक सुरक्षा को प्राथमिकता देने के लिए कोतवाली पुलिस की चौतरफा सराहना हो रही है।

