राजस्व महकमे का काला सच,क्या पटवारी का इस्तीफा भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ा विद्रोह है?

संगठित प्रताड़ना,अवैध वसूली और कोर्ट के आदेशों की धज्जियां उड़ाने वाले 'महानुभावों' को खुली चुनौती 


Junaid Khan - शहडोल। प्रशासनिक शुचिता और जीरो टॉलरेंस का ढिंढोरा पीटने वाले शहडोल संभाग के राजस्व महकमे में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब जयसिंहनगर तहसील में पदस्थ एक ईमानदार पटवारी रमेश कुमार पटेल ने वरिष्ठ अधिकारियों की प्रताड़ना, नियम विरुद्ध निलंबन और महीनों तक वेतन रोकने जैसी दमनकारी नीतियों से तंग आकर सीधे कमिश्नर को अपना इस्तीफा सौंप दिया। यह इस्तीफा महज एक शासकीय कर्मचारी का सेवा से अलग होना नहीं है, बल्कि यह जयसिंहनगर के उन भ्रष्ट और निरंकुश प्रशासनिक आकाओं के मुंह पर एक करारा तमाचा है जो व्यवस्था की आड़ में अवैध उगाही का संगठित नेक्सस चला रहे हैं। जब हमारी पूर्व की खबरों में इस दमनकारी नीति और रिश्वतखोरी के खेल को प्रमुखता से उठाया गया, तो पूरे महकमे में हड़कंप मच गया और अब इस प्रकाशित खबर का व्यापक असर देखने को मिल रहा है। यह मामला अब राजस्व विभाग के आला अधिकारियों के लिए गले की हड्डी बन चुका है, क्योंकि पटवारी के इस आत्मसम्मान के विद्रोह ने समूचे प्रशासनिक अमले को कटघरे में खड़ा कर दिया है। पटवारी रमेश कुमार पटेल द्वारा कमिश्नर को सौंपे गए शिकायती पत्र में जो खुलासे किए गए हैं, वे रोंगटे खड़े करने वाले हैं और सीधे तौर पर भ्रष्ट तंत्र को बेनकाब करते हैं। शिकायत के मुताबिक, अगस्त 2025 में नए एसडीएम की 'कथित व्यवस्था' के नाम पर पटवारी से मोटी रकम की मांग की गई थी। इस संगठित लूट के आगे जब ईमानदारी आड़े आई और शेष राशि देने में असमर्थता जताई गई, तो बदले की भावना से जल रहे तत्कालीन एसडीएम, प्रभारी तहसीलदार और राजस्व निरीक्षक ने एक सोची-समझा साजिश के तहत पटवारी का तबादला अत्यंत दूरस्थ और दुर्गम हल्के में कर दिया। इतना ही नहीं, मानसिक रूप से तोड़ने के लिए नियम-विरुद्ध कारण बताओ नोटिस और गैर-कानूनी निलंबन की दमनात्मक कार्रवाई भी कर दी गई। पटवारी का स्पष्ट आरोप है कि इस पूरी निलंबन प्रक्रिया में वैधानिक प्रावधानों और सर्विस रूल की धज्जियां उड़ाई गईं, जो सीधे तौर पर इन तथाकथित अधिकारियों की तानाशाही और पद के दुरुपयोग को साबित करता है। इस पूरे मामले में सबसे शर्मनाक और प्रशासन को आईना दिखाने वाला पहलू यह है कि पीड़ित पटवारी को जब उच्च न्यायालय (High Court) से राहत मिल गई, उसके बावजूद इन निरंकुश अधिकारियों ने कोर्ट के आदेश को ठेंगे पर रख दिया। माननीय न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बाद भी पटवारी को कार्यभार ग्रहण करने से रोका गया और महीनों तक उनका वेतन रोककर उन्हें आर्थिक और शारीरिक रूप से पंगु बनाने की घिनौनी कोशिश की गई। लगातार मानसिक प्रताड़ना, विभागीय गुंडागर्दी और न्याय की अवहेलना से व्यथित होकर आखिरकार रमेश कुमार पटेल ने 23 मार्च 2026 को सेवा में बने रहने में असमर्थता जताते हुए अपना त्यागपत्र प्रस्तुत कर दिया। अब देखना यह है कि इस गंभीर संगठित भ्रष्टाचार और पटवारी के इस बड़े विद्रोह के बाद भी क्या शहडोल का शीर्ष प्रशासन इन भ्रष्ट मगरमच्छों को संरक्षण देता रहेगा, या फिर इन तानाशाहों के खिलाफ कोई ऐसी दंडात्मक कार्रवाई होगी जो आने वाले समय में एक नजीर बन सके।

Previous Post Next Post