कलेक्टर ने कमिश्नर नगरीय प्रशासन (भोपाल) को लिखा कड़ा पत्र, कार्रवाई की सिफारिश; क्या फाइलों को दबाकर किसी बड़े सच को छुपाने की हो रही है कोशिश?
Junaid Khan - शहडोल। नगर पालिका परिषद शहडोल में प्रशासनिक अराजकता और नियमों को ताक पर रखने का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पूरे संभाग से लेकर भोपाल मंत्रालय तक हड़कंप मचा दिया है। मध्य प्रदेश शासन के आदेश पर बीते 2 जून को तत्कालीन मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) आशा भंडारी का तबादला अनूपपुर कर दिया गया था और उनकी जगह जयसिंहनगर से आए नए CMO निशांत सिंह ठाकुर ने पदभार ग्रहण किया। लेकिन हैरान कर देने वाली बात यह है कि विदाई के इतने दिन बीत जाने के बाद भी पूर्व CMO द्वारा कार्यालय की विभिन्न शाखाओं से जुड़ी करीब 52 अति-महत्वपूर्ण सरकारी नस्तियां (फाइलें) अपने पास दबाकर रखी गई हैं। इन फाइलों के न लौटने से नगर पालिका के कई महत्वपूर्ण निर्माण कार्य और जनहित की योजनाएं पूरी तरह ठप हो चुकी हैं। अध्यक्ष की शिकायत के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर डॉ. केदार सिंह ने 19 जून को आयुक्त, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, भोपाल को पत्र लिखकर पूर्व CMO के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई प्रस्तावित की है। शासन की इस ढिलाई ने अब सीधे तौर पर उच्च प्रशासनिक इच्छाशक्ति को कटघरे में खड़ा कर दिया है कि आखिर इतने बड़े स्तर पर सरकारी दस्तावेजों को बंधक बनाने वाले रसूखदारों पर तत्काल बड़ी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
करोड़ों के निर्माण कार्य अधर में, फाइलों को 'बंधक' बनाने के पीछे क्या है असली खेल?
प्रशासनिक गलियारों में इस बात को लेकर तीखी चर्चाएं हैं कि आखिर इन 52 नस्तियों में ऐसा क्या राज छुपा है, जिसे ट्रांसफर होने के बाद भी वापस नहीं किया जा रहा है? नए CMO निशांत सिंह ठाकुर के पदभार संभालते ही जब इन लापता फाइलों का सच सामने आया, तो उनके होश उड़ गए। पूर्व CMO आशा भंडारी से लगातार संपर्क करने और नोटिस जारी करने के बावजूद उनकी तरफ से न तो कोई संतोषजनक जवाब आया और न ही नस्तियां कार्यालय को सौंपी गईं। सूत्रों की मानें तो इन फाइलों में शहर के कई बड़े ठेके, भुगतान और निर्माण कार्यों के महत्वपूर्ण दस्तावेज शामिल हैं। बिना फाइलों के नगर पालिका का पूरा दफ्तर पंगु बन चुका है। जनता के टैक्स के पैसे से होने वाले विकास कार्यों को इस तरह रोकने और सरकारी संपत्ति (दस्तावेजों) को निजी कब्जे में रखना सीधे तौर पर एक गंभीर प्रशासनिक अपराध की श्रेणी में आता है, जो सीधे-सीधे कानून व्यवस्था को खुली चुनौती है।
कोतवाली पुलिस की मुस्तैदी की चर्चा,शिकायत मिलते ही एक्शन मोड में आने को तैयार खाकी
इस पूरे प्रशासनिक घमासान के बीच स्थानीय कोतवाली पुलिस की कार्यप्रणाली की जमकर तारीफ हो रही है। जैसे ही यह मामला शहर में गरमाया और सरकारी फाइलों के गायब होने की भनक कोतवाली पुलिस को लगी, पुलिस महकमे ने बिना वक्त गंवाए अपनी सजगता का परिचय दिया है। कोतवाली पुलिस इस मामले में न केवल बारीकी से नजर बनाए हुए है, बल्कि किसी भी तरह की औपचारिक शिकायत या एफआईआर (FIR) दर्ज होते ही त्वरित कानूनी कार्रवाई और फाइलों की रिकवरी के लिए पूरी तरह मुस्तैद खड़ी है। शहर की कानून व्यवस्था को मजबूत रखने और अपराधियों व मनमानी करने वाले तत्वों पर शिकंजा कसने में कोतवाली पुलिस का पिछला रिकॉर्ड भी बेहतरीन रहा है। इस संवेदनशील मामले में भी पुलिस की सक्रियता ने यह साफ कर दिया है कि अगर प्रशासनिक स्तर पर बात नहीं बनी, तो खाकी की सख्ती इस मनमानी का अंत करने में जरा भी देर नहीं करेगी।
