फिसलकर गिरने से नियमित श्रमिक की टूटी कमर, गंभीर चोटें,प्रबंधन की लीपापोती और प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल
Junaid Khan - शहडोल। अमलाई स्थित ओरियंट पेपर मिल (ओपीएम) में मुनाफे की आड़ में गरीब मजदूरों की जान की कोई कीमत नहीं समझी जा रही है। काम के दौरान सुरक्षा मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ाने का एक बेहद संगीन मामला सामने आया है, जहां मिल प्रबंधन की गंभीर लापरवाही के कारण एक नियमित श्रमिक मौत के मुंह में धकेले जाने से बाल-बाल बचा। सोमवार को ओपीएम के नियमित श्रमिक रामचरण साहू को बिना किसी जरूरी सेफ्टी शूज और सुरक्षा किट के ही पोल (खंभे) पर चढ़ने को मजबूर कर दिया गया। खंभे पर कार्य करते समय संतुलन बिगड़ने और स्लिप होने से श्रमिक सीधे नीचे आ गिरा, जिससे उसकी कमर टूट गई और सिर में गंभीर व प्राणघातक चोटें आई हैं। घटना के बाद बदहवास स्थिति में श्रमिक को इलाज के लिए शाहडोल के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी हालत नाजुक बनी हुई है। इस पूरे हादसे ने ओपीएम प्रबंधन के सुरक्षा तंत्र के दावों की हवा निकाल दी है।
हादसे के बाद लीपापोती में जुटा प्रबंधन,श्रम विभाग बना मूकदर्शक
इतने बड़े हादसे के बाद भी ओपीएम प्रबंधन अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ते हुए लीपापोती करने में जुट गया है। ओपीएम के मैनेजर रवि शर्मा का तर्क है कि 'सेफ्टी शूज सभी श्रमिकों को प्रदान किए जाते हैं और हादसा महज बारिश की वजह से स्लिप होने के कारण हुआ तथा इलाज की व्यवस्था की जा रही है।' प्रबंधन का यह बयान सीधे तौर पर अपनी नाकामी छुपाने की कोशिश है; सवाल उठता है कि जब बारिश का मौसम था और पोल पर फिसलन का खतरा था, तब श्रमिक को बिना पुख्ता सुरक्षा बेल्ट और ग्रिप वाले जूते के ऊंचाई पर चढ़ने की अनुमति क्यों दी गई? श्रम विभाग और औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग की आपराधिक अनदेखी के कारण ही मिल परिसर में आए दिन श्रमिकों के साथ इस तरह के जानलेवा हादसे हो रहे हैं। पीड़ित परिवार और मजदूर संघों में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश पनप रहा है और लोग दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई व भारी मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
