मॉडल रोड बनी आफत,बदइंतज़ामी पर फूटा जनआक्रोश

बिना जल निकासी सड़क खोदी,जिम्मेदार अफसर फोन से दूर


Junaid Khan - शहडोल। नगर पालिका प्रशासन के तथाकथित विकास दावों और खोखली कार्यशैली की पोल शहर के मुख्य मार्ग पर एक बार फिर बेपर्दा हो गई है। बस स्टैंड से लेकर बुढार चौक तक प्रस्तावित महत्वाकांक्षी 'मॉडल रोड' का निर्माण कार्य शुरुआती चरण में ही घोर लापरवाही, तकनीकी नाकामी और गैर-जिम्मेदाराना रवैये की बलि चढ़ गया है। नगर पालिका के जिम्मेदार इंजीनियरों ने बिना किसी पूर्व जल निकासी (ड्रेनेज व्यवस्था) का पुख्ता प्लान बनाए ही मुख्य सड़क की अंधाधुंध खुदाई करा दी। इसका खमियाजा अब पूरे शहर को भुगतना पड़ रहा है। खुदाई के बाद नालियों का गंदा पानी और बारिश का जल पूरी सड़क पर लबालब भर गया है, जिससे यह प्रमुख मार्ग एक जानलेवा दलदल में तब्दील हो चुका है। पानी भरे गड्ढों की गहराई का अंदाजा न लग पाने के कारण रोजाना दोपहिया वाहन चालक गिरकर गंभीर रूप से चोटिल हो रहे हैं। नगर पालिका की इस लचर इंजीनियरिंग ने राहगीरों के साथ-साथ पूरे इलाके को आफत में डाल दिया है।

जवाबदेही से भाग रहे अफसर,फोन रिसीव करना भी मुनासिब नहीं समझा

जनता की जान से खिलवाड़ कर रही इस प्रशासनिक लापरवाही पर जब जवाबदेही तय करने का प्रयास किया गया, तो नगर पालिका के संबंधित इंजीनियर सुखेंद्र सिंह तोमार ने फोन रिसीव करना तक जरूरी नहीं समझा। अफसरों का यह उदासीन और गैर-जिम्मेदाराना रवैया साफ दर्शाता है कि आम नागरिकों की समस्याओं को लेकर पालिका प्रशासन कितना बेपरवाह है। निर्माण कार्य से पहले वैकल्पिक पानी निकासी और सुगम आवाजाही का इंतजाम करना अनिवार्य प्रक्रिया है, लेकिन यहां नियमों को ताक पर रखकर केवल खुदाई करके छोड़ दिया गया। बुढार चौक से बस स्टैंड के बीच स्थित दुकानदारों और नागरिकों में इस अनदेखी को लेकर भारी आक्रोश पनप रहा है। सवाल यह उठ रहा है कि जब बिना तैयारी के काम शुरू कर जनता को मुसीबत में धकेला गया, तो ऐसे जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर अब तक दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

व्यापार चौपट, हादसों का डर,अब बड़े आंदोलन की तैयारी में नागरिक व व्यापारी 

सड़क पर बदबूदार पानी और कीचड़ का जमावड़ा होने से बस स्टैंड से बुढार चौक मार्ग का व्यापारिक ढांचा पूरी तरह चरमरा गया है। दुकानों के सामने जलभराव के कारण ग्राहकों की आवाजाही बंद हो चुकी है, जिससे स्थानीय दुकानदारों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। आक्रोशित नागरिकों और व्यापारियों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि नगर पालिका प्रशासन ने तत्काल प्रभााव से पानी निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं कराई और इस लापरवाही के जिम्मेदार इंजीनियर सुखेंद्र सिंह तोमार व संबंधित अमले पर सख्त कार्रवाई नहीं की, तो वे उग्र विरोध-प्रदर्शन और घेराव करने को बाध्य होंगे। जनता के सब्र का बांध अब टूट चुका है; अब देखना यह होगा कि कुंभकर्णी नींद में सोया प्रशासन इस गंभीर जनसमस्या का समाधान तुरंत निकालता है या फिर किसी बड़े हादसे का इंतजार करता रहेगा।

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