प्रशासनिक शह पर बेखौफ हुए गुरुजी,सोहागपुर विकासखंड की इस शर्मनाक करतूत ने पूरे शिक्षा विभाग को किया कलंकित, 'कार्रवाई' के नाम पर फिर शुरू हुआ जांच का घिसा-पिटा सरकारी ढोंग
Junaid Khan - शहडोल। राष्ट्र के भविष्य को गढ़ने वाले शिक्षा के मंदिर जब प्रशासनिक लापरवाही और अफसरों की अनदेखी के कारण 'मयखानों' में तब्दील होने लगें, तो समझ लीजिए कि व्यवस्था पूरी तरह वेंटिलेटर पर आ चुकी है। ऐसा ही एक बेहद शर्मनाक और व्यवस्था को खुली चुनौती देने वाला सनसनीखेज मामला सोहागपुर विकासखंड के अंतर्गत आने वाले शासकीय भुईबांध विद्यालय से सामने आया है, जहां ज्ञान की देवी मां सरस्वती के आंगन को कलंकित करते हुए शिक्षक कक्ष (स्टाफ रूम) के भीतर ही शराब पार्टी का आयोजन कर दिया गया। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे एक कथित वीडियो ने पूरे शहडोल जिले सहित शिक्षा विभाग की साख को तार-तार कर दिया है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि जिन हाथों में बच्चों का भविष्य संवारने के लिए चाक और कलम होनी चाहिए थी, वे हाथ बड़ी ही बेशर्मी से शिक्षक कक्ष के भीतर कुछ बाहरी तत्वों के साथ मिलकर पैग लड़ा रहे हैं और जाम से जाम टकरा रहे हैं। इस घिनौने कृत्य को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और प्रबुद्ध समाज में भारी आक्रोश व्याप्त है। लोगों का स्पष्ट कहना है कि जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं और स्कूल के भीतर इस तरह की अनैतिक व अवैध गतिविधियां सरेआम चलने लगें, तो भला नौनिहाल इनसे क्या शिक्षा लेंगे? यह शहडोल जिले के लिए कोई पहला मामला नहीं है, इससे पहले भी सरकारी परिसरों और स्कूलों के भीतर शराबखोरी की कई तस्वीरें सामने आ चुकी हैं, लेकिन हर बार की तरह इस बार भी जिम्मेदार अधिकारी गहरी नींद में सोए रहे, जिसका नतीजा है कि बिना किसी प्रशासनिक भय के इन 'शराबी शिक्षकों' के हौसले बुलंद हैं और वे सरेआम कानून व मर्यादा की धज्जियां उड़ा रहे हैं।
फाइलें दबाने में माहिर तंत्र अब सोमवार से करेगा 'निष्पक्ष जांच' का नाटक, जनता पूछ रही- तत्काल सस्पेंशन क्यों नहीं?
इस पूरे महापाप पर जब चौतरफा दबाव बढ़ा, तो हमेशा की तरह प्रशासनिक अमले ने अपनी खाल बचाने के लिए 'जांच' का पुराना और घिसा-पिटा राग अलापना शुरू कर दिया है। इस गंभीर मामले पर संभागीय उपायुक्त जनजातीय कार्य विभाग जेपी यादव ने अपनी लाचारी और लचर व्यवस्था को स्वीकार करते हुए बताया कि वीडियो की जानकारी दो दिन पहले ही उनके पास तक पहुंच चुकी थी, लेकिन वे भोपाल में किसी विभागीय बैठक में व्यस्त थे। अब साहब का फरमान आया है कि सोमवार को शहडोल पहुंचते ही इस पूरे मामले की 'निष्पक्ष जांच' कराई जाएगी और जो भी शिक्षक इसमें दोषी पाया जाएगा, उस पर कार्रवाई होगी। लेकिन सबसे बड़ा और तीखा सवाल यह उठता है कि जब वीडियो में चेहरा साफ है, कृत्य साफ है और घटनास्थल भी साफ है, तो फिर इस डिजिटल युग में भी तत्काल प्रभाव से निलंबन (सस्पेंशन) की कार्रवाई करने के बजाय 'सोमवार' का इंतजार क्यों किया जा रहा है? क्या दो दिन का यह समय दोषियों को साक्ष्य मिटाने या राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल कर मामले को रफा-दफा करने के लिए दिया जा रहा है? प्रशासन का यह टालमटोल रवैया साफ दर्शाता है कि कहीं न कहीं विभागीय अफसरों का वरदहस्त इन लापरवाह और बेलगाम शिक्षकों पर है। जनता अब कागजी जांच से संतुष्ट होने वाली नहीं है; वह सीधे इन दागी शिक्षकों की बर्खास्तगी और इन्हें संरक्षण देने वाले अधिकारियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग कर रही है। देखना होगा कि प्रशासन सोमवार को वाकई कोई नजीर पेश करता है या फिर इस फाइल को भी ठंडे बस्ते के हवाले कर दिया जाता है।
