सांसद हिमाद्री सिंह की 'चुप्पी' और रेलवे की 'अंधेरी पटरी' पर भड़का जनता का आक्रोश

मां बिरासिनी की पावन धरा बिरसिंहपुर पाली को बरौनी-गोंदिया एक्सप्रेस के ठहराव से आखिर कब तक रखा जाएगा महरूम?


Junaid Khan - शहडोल। बिरसिंहपुर पाली (उमरिया) अंधा प्रशासन और गूंगा रेल महकमा जब जनभावनाओं को कुचलने पर आमादा हो जाए, तो लोकतंत्र में जनता को ही अलख जगानी पड़ती है। उमरिया जिले का सबसे प्रमुख धार्मिक और व्यापारिक रीढ़ माना जाने वाला बिरसिंहपुर पाली आज भी रेलवे की घोर उपेक्षा का दंश झेल रहा है। लाखों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र, जगत जननी माँ बिरासिनी देवी के इस पावन शक्तिपीठ पर रोज़ाना देश-प्रदेश से सैकड़ों भक्तों का तांता लगा रहता है, लेकिन विडंबना देखिए कि यहाँ से गुजरने वाली महत्वपूर्ण ट्रेन बरौनी-गोंदिया-बरौनी एक्सप्रेस (15231/15232) बिना रुके सरसराते हुए निकल जाती है। इस गंभीर मुद्दे को लेकर क्षेत्र के सजग और जुझारू नागरिकों ने अब सीधे शहडोल संसदीय क्षेत्र की सांसद श्रीमती हिमाद्री सिंह के द्वार पर दस्तक दी है। समस्त क्षेत्रवासियों ने एक सुर में सांसद से करबद्ध विनम्र अपील करते हुए सीधे तौर पर यह चुनौती दी है कि यदि इस ट्रेन का बिरसिंहपुर पाली रेलवे स्टेशन पर महज 2 मिनट का ठहराव स्वीकृत नहीं कराया गया, तो इसे क्षेत्र की जनता का घोर अपमान माना जाएगा। इस व्यवस्था के खिलाफ बिगुल फूंकने वाले स्थानीय नागरिकों का यह कदम वाकई काबिले-तारीफ और सराहनीय है, जिन्होंने दलीय राजनीति से ऊपर उठकर जनहित की इस सुलगती आग को बुझाने का बीड़ा उठाया है। वर्तमान में इस ठहराव के न होने से सबसे बड़ा वज्रपात यहाँ के भविष्य यानी छात्रों, जिंदगी और मौत से जूझ रहे मरीजों, छोटे-बड़े व्यापारियों और दूर-दराज से आने वाले बेबस श्रद्धालुओं पर हो रहा है। आलम यह है कि महकमे की नाकामी के कारण इन लोगों को मजबूरी में 40 किलोमीटर का लंबा, थकाऊ और खर्चीला सफर तय करके उमरिया या शहडोल रेलवे स्टेशन की खाक छाननी पड़ती है। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की इस सामूहिक विफलता ने जनता के सब्र का बांध तोड़ दिया है। अब देखना यह है कि पूरे 20 साल के इस पत्रकारिता के दौर में हमने कई वादे टूटते देखे हैं, लेकिन क्या अब सांसद हिमाद्री सिंह इस जायज मांग को रेल मंत्रालय के कानों तक पहुंचाकर 2 मिनट का स्टॉपेज मंजूर करा पाएंगी, या फिर जनता का यह 'करबद्ध निवेदन' आने वाले दिनों में प्रशासन के खिलाफ एक उग्र जन-आंदोलन का रूप अख्तियार कर लेगा? क्षेत्र की जनता अब आर-पार के मूड में है और जवाब सीधे दिल्ली के रेल भवन से चाहती है।

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