सोशल मीडिया पर अति-सक्रियता बनाम जमीनी हकीकत, सूची जारी होते ही मची खलबली, हालांकि भनक लगते ही नेतृत्व ने तुरंत सुधारी भूल, दिखाई अनुकरणीय तत्परता
Junaid Khan - शहडोल। राजनीतिक दलों में जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं के मूल्यांकन और संगठनात्मक सूचियों के निर्माण में किस कदर लापरवाही हावी है, इसका एक जीवंत उदाहरण शहडोल जिला भाजपा की हालिया सूची में देखने को मिला। गत 3 जुलाई को घोषित हुई 60 सदस्यीय भाजपा जिला कार्यसमिति की सूची ने उस वक्त सबको चौंका दिया, जब उसमें जयप्रकाश बैस का नाम शामिल पाया गया, जिनका निधन तकरीबन 2 साल पहले हो चुका है। सूची सार्वजनिक होते ही न केवल पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच सुगबुगाहट तेज हो गई, बल्कि सोशल मीडिया से लेकर चौक-चौराहों तक संगठन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे। अंदरखाने चर्चा चल पड़ी कि आज के दौर में नेताओं की ग्राउंड रिपोर्ट देखने के बजाय केवल सोशल मीडिया पर उनकी आभासी सक्रियता देखकर ही पदों की रेवड़ियां बांटी जा रही हैं। यह सीधे तौर पर उस पूरी प्रशासनिक और संगठनात्मक व्यवस्था को एक बड़ी चुनौती है जो बिना किसी पुख्ता जमीनी सत्यापन और क्रॉस-चेकिंग के इतनी महत्वपूर्ण नियुक्तियों की सूची को हरी झंडी दे देती है।
तत्परता की मिसाल, गलती का अहसास होते ही संगठन ने लिया संज्ञान, डैमेज कंट्रोल की हर तरफ तारीफ
इस पूरे घालमेल और जमीनी चूक के बीच एक बेहद सकारात्मक और तारीफ के काबिल पहलू भी सामने आया, जिसने विपक्ष और आलोचकों को ज्यादा बोलने का मौका नहीं दिया। मामले की गंभीरता को भांपते ही भाजपा जिला नेतृत्व ने अभूतपूर्व सक्रियता दिखाई और तुरंत संज्ञान लेते हुए रिकॉर्ड को दुरुस्त किया। इस संवेदनशील मामले पर स्थिति स्पष्ट करते हुए भाजपा जिलाध्यक्ष अमिता चपरा ने सूझबूझ का परिचय दिया और बताया कि "जयप्रकाश बैस" नाम के दो व्यक्ति होने के कारण यह प्रशासनिक कन्फ्यूजन पैदा हुआ था। संगठन का उद्देश्य वास्तव में पूर्व में किसान मोर्चा में सक्रिय रहे जीवित कार्यकर्ता को जोड़ना था, परंतु मानवीय भूल के कारण बुड़वा निवासी दिवंगत जयप्रकाश का मोबाइल नंबर दर्ज हो गया था। जैसे ही यह त्रुटि सामने आई, नेतृत्व ने बिना समय गंवाए कुछ ही देर में संशोधित सूची जारी कर सुधार कर लिया। जिला संगठन द्वारा इस बड़ी भूल को प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाने के बजाय, तुरंत अपनी गलती स्वीकार कर उसे तत्काल सुधारने की इस त्वरित कार्यशैली की राजनीतिक गलियारों में जमकर सराहना की जा रही है।
