शहडोल संभाग में भ्रष्टाचार का नग्न तांडव,पीएम आवास के नाम पर खुलेआम रिश्वतखोरी

सार्वजनिक संपत्तियों पर दबंगई और 10 साल से चल रहा मजदूरी का खूनी खेल! 


Junaid Khan - शहडोल। मध्यप्रदेश के आदिवासी बाहुल्य शहडोल संभाग में जमीनी स्तर पर प्रशासनिक नियंत्रण और पारदर्शिता इस कदर दम तोड़ चुकी है कि सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजना 'प्रधानमंत्री आवास योजना' अब निचले स्तर के भ्रष्टाचारियों की अवैध कमाई का जरिया बन चुकी है। सोहागपुर तहसील के ग्राम कठौतिया (अमहा टोला) से निकलकर कमिश्नर कार्यालय की चौखट तक पहुंची एक लाचार और प्रताड़ित महिला की लिखित शिकायत ने स्थानीय प्रशासन, जनपद पंचायत और ग्राम राज व्यवस्था की शुचिता को पूरी तरह कटघरे में खड़ा कर दिया है। संभाग के सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी (कमिश्नर) के समक्ष प्रस्तुत की गई इस सनसनीखेज शिकायत ने यह साफ कर दिया है कि शहडोल के ग्रामीण अंचलों में आज भी किस तरह शासकीय तंत्र के कारिंदे और रसूखदार दबंग मिलकर आदिवासियों और अत्यंत गरीबों का हक मार रहे हैं। पीड़िता लक्ष्मी मेहरा पति कैलाश मेहरा ने शिकायत में सीधे तौर पर नामजद आरोप लगाया है कि जब वह अपने स्वीकृत आवास की जानकारी लेने गई, तो ग्राम पंचायत सचिव अब्दुल्ला खान, नेहा सिंह परिहार, बिज्जू सिंह, दीपक सिंह और हनुमान प्रसाद उपाध्याय ने उससे सरेआम 10 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की। अत्यंत विपन्न होने के कारण जब पीड़िता ने यह मोटी रकम देने में असमर्थता जताई, तो इन सफेदपोशों ने तानाशाही दिखाते हुए न सिर्फ उसका सरकारी आवेदन फाड़कर फेंक दिया, बल्कि उसे अपमानित कर वहां से भगा दिया और खुली चुनौती दी कि "तू कभी भी इस योजना का लाभ नहीं पा सकेगी।"

मजदूरी से 40% कट-कमीशन का खेल और खजाने की सीधी डकैती 

यह मामला सिर्फ एक मकान की रिश्वतखोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यवस्थित और बड़े वित्तीय घपले की ओर इशारा करता है, जो सीधे तौर पर जिला प्रशासन और वित्तीय ऑडिट व्यवस्था को चुनौती दे रहा है। शिकायत के मुताबिक, गांव के कुछ रसूखदार पिछले 10 वर्षों से गरीब मजदूरों का शोषण कर रहे हैं और काम देने के एवज में उनकी मेहनत की आधी कमाई (वेतन का 40 प्रतिशत हिस्सा) बतौर कमीशन जबरन वसूल लेते हैं। इससे भी अधिक चौंकाने वाला और गंभीर आरोप यह है कि 62 वर्ष के एक बुजुर्ग अंबिका प्रसाद उपाध्याय, जो शारीरिक रूप से पूरी तरह असमर्थ हैं और कभी किसी शासकीय कार्य पर नहीं जाते, उनके और उनके परिवार के अन्य सदस्यों के फर्जी व जाली हस्ताक्षर करके सरकारी तिजोरी से नियमित रूप से वेतन और सरकारी राशि का आहरण कर गबन किया जा रहा है। इसके साथ ही, शासन द्वारा आम जनता और मवेशियों के कल्याण के लिए बनाए गए सार्वजनिक कुएं और गौशाला पर भी दबंगों ने कब्जा कर उसे अपनी निजी जागीर बना लिया है, जिससे पूरा गांव पानी और बुनियादी अधिकारों के लिए तरस रहा है। 13 जुलाई 2026 को कमिश्नर कार्यालय में दर्ज हुई यह आवक शिकायत सीधे तौर पर शहडोल कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ और संपूर्ण सोहागपुर प्रशासनिक अमले की कार्यप्रणाली पर एक गहरा तमाचा है। अब देखना यह है कि क्या संभाग का शीर्ष नेतृत्व इन नामजद भ्रष्टाचारियों पर तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज कराकर पीड़िता को न्याय दिलाता है, या फिर यह संगीन फाइल भी फाइलों के ढेर में दबा दी जाएगी।

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