34 साल बाद शहडोल रेल मंडल में रचा इतिहास,सुश्री सोनलिका रुचंदानी बनीं पहली महिला क्षेत्रीय रेल प्रबंधक

नारी सशक्तिकरण की मिसाल,रेल मंत्रालय व प्रशासनिक दूरदर्शिता से उप मंडलीय रेल क्षेत्र को मिली नई दिशा 


Junaid Khan - शहडोल। भारतीय रेल के प्रशासनिक इतिहास और उप मंडलीय रेल क्षेत्र शहडोल के विकास पथ पर एक नया और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। दूरदर्शी प्रशासनिक सोच और रेल मंत्रालय की दूरगामी प्राथमिकताओं के परिणामस्वरूप, शहडोल को पहली बार एक महिला अधिकारी के रूप में सुश्री सोनलिका रुचंदानी के रूप में नई क्षेत्रीय रेल प्रबंधक (Area Railway Manager) प्राप्त हुई हैं। वर्ष 1992 में शहडोल में क्षेत्रीय रेल प्रबंधक कार्यालय की स्थापना के बाद से पिछले 34 वर्षों के लंबे अंतराल में यह पहला अवसर है, जब किसी महिला अधिकारी को इतने महत्वपूर्ण और संवेदनशील प्रशासनिक दायित्व की कमान सौंपी गई है। शासन-प्रशासन और भारतीय रेल प्रबंधन के इस ऐतिहासिक फैसले की सर्वत्र सराहना हो रही है। मूल रूप से छत्तीसगढ़ के राजनंदगांव की निवासी सुश्री सोनलिका ने भिलाई स्थित बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (दुर्ग) से बी.ई. (बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग) की डिग्री हासिल की। इसके उपरांत, अपनी अटूट लगन और कड़ी मेहनत के बल पर उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा-2022 उत्तीर्ण कर भारतीय रेल प्रबंधन सेवा (IRMS) में गौरवमयी स्थान प्राप्त किया। प्रशिक्षण अवधि के दौरान उन्हें राष्ट्रपति भवन में देश की प्रथम नागरिक राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू से भेंट करने का भी सौभाग्य प्राप्त हुआ था, जो उनकी प्रशासनिक दक्षता और कार्यकुशलता की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। पदभार ग्रहण करते ही सुश्री सोनलिका रुचंदानी ने कार्यस्थल पर अपनी कुशल कार्यप्रणाली, त्वरित निर्णय लेने की क्षमता और जमीनी जुड़ाव की अमिट छाप छोड़ना शुरू कर दिया है। उन्होंने कार्यभार संभालते ही रेल कर्मचारियों और स्थानीय अधिकारियों के साथ संवाद स्थापित कर व्यवस्थाओं को चुस्त-दुरुस्त करने का बीड़ा उठाया है। रेल कर्मियों का कहना है कि उनका सौम्य, सहज और सकारात्मक व्यवहार अधीनस्थ कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाने वाला है। वे न केवल कर्मचारियों एवं आम जनता की समस्याओं को बेहद आत्मीयता से सुन रही हैं, बल्कि उनके त्वरित एवं न्यायसंगत समाधान के लिए मौके पर ही निर्देश जारी कर रही हैं। प्रशासनिक दायित्वों के गुरुतर बोझ के बीच भी उनकी सामाजिक और शैक्षणिक प्रतिबद्धता काबिले-तारीफ है; वे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे देश-प्रदेश के युवाओं का निरंतर मार्गदर्शन कर रही हैं। विभिन्न सेमिनार, संवाद कार्यक्रमों और ऑनलाइन प्रश्नोत्तर मंचों के माध्यम से वे अभ्यर्थियों के संशयों का निवारण कर उन्हें सफलता का मूलमंत्र दे रही हैं। रेलवे प्रशासन द्वारा एक योग्य, संवेदनशील और तकनीकी रूप से दक्ष अधिकारी को शहडोल में पदस्थापित करने से रेल कर्मचारियों, स्थानीय व्यापारियों और आम यात्रियों में भारी उत्साह का माहौल है। जानकारों का मानना है कि केंद्र सरकार और रेलवे बोर्ड की यह पहल न केवल महिला नेतृत्व को नई पहचान दे रही है, बल्कि इससे क्षेत्र में रेल सुविधाओं के विस्तार और बुनियादी ढांचे के कायाकल्प को एक नई तीव्र गति मिलेगी।

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