जिले में बेखौफ हुए चोर,अब तो जिला पंचायत दफ्तर ही बन गया 'चोरी का अड्डा'

CCTV में कैद हुआ चोर, फिर भी सुस्त कोतवाली पुलिस, सवाल,गश्त पर थी पुलिस या सो रही थी? कबाड़ियों की जांच क्यों नहीं? 


Junaid Khan - शहडोल। जिले में कानून-व्यवस्था और पुलिस गश्त का ढोल किस कदर खोखला साबित हो रहा है, इसकी बानगी शहर के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले प्रशासनिक क्षेत्रों में देखने को मिल रही है। आम जनता के घरों और दुकानों में चोरियां होना तो अब आम बात हो चुकी है, लेकिन अब शातिर चोरों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि वे सीधे जिले के बड़े प्रशासनिक दफ्तरों को निशाना बना रहे हैं। मामला थाना कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत जिला पंचायत कार्यालय शहडोल का है, जहाँ बेखौफ चोरों ने रात के अंधेरे में सेंधमारी कर जिला पंचायत सीईओ (C.O.) साहब के दफ्तर के ही ए.सी. (AC) के कॉपर वायर पार कर दिए। चौंकाने वाली बात यह है कि चोर ने बकायदा सीसीटीवी (CCTV) कैमरा घुमाकर इस वारदात को अंजाम दिया। लगातार हो रही इन वारदातों ने सीधे तौर पर कोतवाली पुलिस की रात्रि गश्त और सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है।

बार-बार चोरी,फिर भी पुलिस मौन 

जिला पंचायत कार्यालय के डाटा एंट्री ऑपरेटर सुनील कुमार गुप्ता द्वारा दर्ज कराई गई रिपोर्ट के अनुसार, 29 जुलाई की रात करीब 8:55 बजे अज्ञात चोर दफ्तर में घुसा, सीसीटीवी कैमरे का रुख मोड़ा और 2 ए.सी. के 04 कॉपर वायर काटकर ले गया, जिससे लगभग ₹10,000 का सामान और ₹10,000 की गैस लीक की क्षति हुई है। रिपोर्ट में साफ उजागर हुआ है कि इस दफ्तर में पहले भी दो बार ए.सी. कॉपर वायर की चोरी हो चुकी है। सवाल उठता है कि जब बार-बार एक ही परिसर को निशाना बनाया जा रहा है, तो कोतवाली पुलिस क्या कर रही थी? क्या 3 किलोमीटर के दायरे में आने वाले इस वीआईपी जोन में पुलिस की कोई गश्त नहीं होती?

नए एसपी साहब ध्यान दें, क्या छोटे-बड़े कर्मचारियों की निष्ठा पर उठेंगे सवाल?

शहर में नए पुलिस अधीक्षक (SP) के आगमन के बाद जनता को उम्मीद थी कि अपराध और चोरियों पर लगाम लगेगी, लेकिन जमीनी हकीकत जस की तस बनी हुई है। नए कप्तान की साख और ईमानदारी पर क्या नीचे से लेकर ऊपर तक का पुलिस अमला पानी फेर रहा है? थाना प्रभारी से लेकर छोटे-बड़े पुलिसकर्मियों की सुस्ती के कारण ही चोर इतने निडर हो चुके हैं। सवाल यह भी खड़ा होता है कि शहर भर में हो रही कॉपर वायर, ए.सी. और लोहे-सामान की चोरियों का माल आखिर खप कहाँ रहा है? जिले भर में फैले कबाड़ियों की जांच करने से पुलिस के हाथ क्यों कांप रहे हैं? क्या कबाड़ियों पर पुलिस का शिकंजा ढीला है या फिर मामले को ठंडे बस्ते में डालने का खेल चल रहा है?

क्या चोरी का पैसा पचा रही व्यवस्था? महिला सुरक्षा और रात की गश्त पर बड़ा प्रश्नचिह्न

जब जिला पंचायत जैसे मुख्य दफ्तर, जहाँ सुरक्षा गार्ड तैनात रहते हैं, वहीं चोर बेधड़क घुसकर तांडव मचा रहे हैं, तो आम नागरिकों और विशेषकर महिलाओं की सुरक्षा का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। क्या रात में कोतवाली पुलिस सड़कों पर सिर्फ खानापूरी के लिए निकलती है? अगर वीआईपी इलाकों में महिलाएँ और आम नागरिक सुरक्षित नहीं हैं, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारी कौन हैं? स्थानीय लोगों का आक्रोश अब चरम पर है। जनता पूछ रही है कि बार-बार चोरी की घटनाएं होने के बावजूद पुलिस जांच के नाम पर सिर्फ एफआईआर (बीएनएस धारा 303(2), 324(4)) का कागज क्यों थमा देती है? क्या पुलिस प्रशासन कबाड़ियों और चोरों पर ठोस और कड़ी कार्रवाई करेगा या फिर यह मामला भी पुरानी फाइलों की धूल चाटता रहेगा?

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