दिनदहाड़े वारदात से शहडोल थर्राया, सवाल कहाँ सो रही थी कोतवाली पुलिस की गश्त व्यवस्था?
Junaid Khan - शहडोल। जिला मुख्यालय के सबसे व्यस्त और संवेदनशील इलाकों में शुमार स्टेडियम और गणेश गंज क्षेत्र में सुरक्षा दावों की धज्जियां उड़ाते हुए बेखौफ ठगों ने एक असहाय बुजुर्ग महिला को अपना शिकार बना लिया। कन्या छात्रावास में भोजन बनाकर अपने परिवार का पेट पालने वाली 59 वर्षीय बुजुर्ग महिला ऊषा बर्मन से दो शातिर ठगों ने झांसा देकर करीब 75,000 रुपये कीमत की सोने की अंगूठी और कान के टप्स ऐंठ लिए और रफूचक्कर हो गए। घटना उस समय हुई जब पीड़िता सुबह करीब 10 से 11 बजे के बीच काम खत्म कर घर लौट रही थी। हैरानी की बात यह है कि यह पूरी घटना मुख्य मार्ग से होते हुए आधार ऑफिस के पास स्थित मंदिर परिसर तक घटित हुई, लेकिन क्षेत्र में तैनात रहने का दावा करने वाली कोतवाली पुलिस का कोई भी जवान दूर-दूर तक नजर नहीं आया। दिनदहाड़े हुई इस वारदात ने शहडोल पुलिस के गश्ती तंत्र, सतर्कता और महिला सुरक्षा के तमाम खोखले दावों की कलई खोलकर रख दी है।
मदद की आड़ में रची साजिश,यूं दिया वारदात को अंजाम
पीड़िता के अनुसार, जब वह हॉस्टल से निकलकर स्कूल के पास पहुंची, तो लगभग 16-17 साल के एक लड़के ने खुद को भूखा और छत्तीसगढ़ जाने का झांसा देकर मदद मांगी। इंसानियत के नाते जब बुजुर्ग महिला ने उसे समोसा खिलाया, तभी उसका दूसरा 40 वर्षीय साथी भी वहां आ पहुंचा। दोनों शातिरों ने बड़ी चालाकी से महिला को बातों में उलझाया और रास्ता बताने के बहाने आधार ऑफिस के पास स्थित शंकर जी के मंदिर में बैठा लिया। वहां सुनसान का फायदा उठाकर आरोपियों ने षड्यंत्रपूर्वक महिला से उसके सोने के आभूषण उतरवाकर अपने हाथ में रखवा लिए और उसे आगे चलने को कहकर मौके से गायब हो गए। जब पीड़िता को ठगी का अहसास हुआ, तब तक दोनों आरोपी रफूचक्कर हो चुके थे। इस घटना से गहरा सदमा लगने के कारण पीड़िता तत्काल पुलिस के पास नहीं पहुंच सकी थी।
पुलिस प्रशासन को खुली चुनौती,शहर में महिलाएं कितनी सुरक्षित?
घटना के बाद कोतवाली पुलिस ने भादंवि/बीएनएस की धारा 318(4) और 61(2)(a) के तहत मामला दर्ज कर जांच कार्यवाहक सहायक उपनिरीक्षक को सौंपी है, लेकिन बड़ा सवाल यह उठता है कि दिन के उजाले में खुलेआम घूमने वाले इन अपराधियों पर कानून का खौफ क्यों नहीं है? पीड़िता ने आरोपियों का हुलिया साफ बताया है एक 17 वर्षीय दुबला लड़का (हरा टी-शर्ट, जींस) और दूसरा 40 वर्षीय व्यक्ति (गुलाबी टी-शर्ट, सफेद जींस)। शहडोल की सड़कों पर घूम रहे ऐसे अपराधी पुलिस की सुस्त कार्यशैली पर करारा तमाचा हैं। जब मुख्य शहर और भीड़भाड़ वाले इलाकों में महिला कर्मचारी सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिकों की सुरक्षा का क्या? जनता अब जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों से जवाब मांग रही है कि आखिर गश्त के नाम पर कागजी खानापूर्ति कब बंद होगी और इन शातिर ठगों की गिरफ्तारी कब होगी?
