बेटी के इलाज के नाम पर भावनाएं छल कर 65 हजार उड़ाए, जिले में बेखौफ घूम रहे साइबर ठग

रिश्तेदारी और बीमारी का झूठा झांसा देकर फर्जी मैसेज से जालसाज ने लगाई चपत, जांच में जुटी पुलिस


Junaid Khan - शहडोल। साइबर अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि अब वे लोगों की सहृदयता और भावनाओं का फायदा उठाकर उन्हें ठगी का शिकार बना रहे हैं। सिंहपुर थाना क्षेत्र के जोधपुर निवासी 42 वर्षीय विकास गुप्ता के साथ हुई 65 हजार रुपये की ठगी ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि जिले में साइबर अपराधियों का नेटवर्क किस कदर हावी है। जालसाज ने पीड़ित के पास अनजान नंबर से फोन करके खुद को कोतमा (अनूपपुर) का परिचित अग्रवाल बताते हुए बातचीत शुरू की। आरोपी ने अपनी बेटी की अचानक तबीयत खराब होने और अस्पताल में तुरंत पैसे भेजने की बात कहकर फर्जी सहानुभूति बटोरी। आरोपी ने पीड़ित को झांसा दिया कि उसका मोबाइल खराब होने वाला है, इसलिए वह सीधे विकास के खाते में रकम ट्रांसफर कर रहा है। विश्वास कायम करने के लिए ठग ने 45 हजार और 55 हजार रुपये के फर्जी क्रेडिट मैसेज भी पीड़ित के फोन पर भेजे। फर्जी मैसेज और बीमारी की मनगढ़ंत कहानी के फेर में आकर पीड़ित ने बिना पूरी तफ्तीश किए आरोपी के कहने पर अपने खाते से पैसे ट्रांसफर कर दिए। ठग ने पीड़ित के मोबाइल पर एक लिंक भेजा, जिसके माध्यम से तीन अलग-अलग किस्तों 20 हजार, 15 हजार और 30 हजार रुपये (कुल 65 हजार रुपये) की रकम अपने खाते में ट्रांसफर करवा ली। शिकायत में तीनों लेन-देन के यूटीआर नंबर भी दर्ज कराए गए हैं। जैसे ही ठग के खाते में पैसे पहुंचे, उसने तुरंत अपना मोबाइल स्विच ऑफ कर लिया, तब जाकर पीड़ित को अपने साथ हुई बड़ी ठगी का अहसास हुआ। मामला दर्ज होने के बाद अब पुलिस आरोपी के मोबाइल नंबर, बैंक खाते की जानकारी और ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड्स के आधार पर उसकी लोकेशन ट्रैकिंग में जुटी हुई है। इस पूरी घटना ने एक बार फिर साइबर सुरक्षा, प्रशासनिक दावों और पुलिसिया गश्त की पोल खोलकर रख दी है। जिले भर में लगातार ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद जागरूकता अभियानों और साइबर पुलिस की त्वरित कार्रवाई के दावे केवल कागजों तक ही सीमित नजर आ रहे हैं। आम जनता का आरोप है कि घटना होने के बाद पुलिस सिर्फ मामला दर्ज करने और जांच का आश्वासन देने की खानापूर्ति करती है, जबकि साइबर अपराधियों को समय रहते पकड़ने या ठगी की रकम वापस दिलाने में नाकाम साबित हो रही है। यदि पुलिस का तंत्र मजबूत होता और ठगों के खिलाफ सख्त संदेश दिया गया होता, तो इस तरह जालसाज बेखौफ होकर लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ न कर पाते। जनता अब प्रशासन और पुलिस से यह सवाल पूछ रही है कि आखिर कब तक आम नागरिक इन शातिर अपराधियों का शिकार बनते रहेंगे?

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