जैतपुर में 10वीं की छात्रा से दरिंदगी के बाद आरोपी फरार, प्रशासन व पुलिस की सुस्ती पर उबला जनता का आक्रोश
Junaid Khan - शहडोल। स्वतंत्रता दिवस के जश्न और सुरक्षा व्यवस्था के बड़े-बड़े दावों के बीच जैतपुर थाना क्षेत्र में दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। स्कूल से घर लौट रही कक्षा 10वीं की छात्रा का चार पहिया वाहन में सवार दो बेखौफ युवकों ने जबरन अपहरण कर लिया और जंगल ले जाकर दुष्कर्म की जघन्य वारदात को अंजाम दिया। स्वतंत्रता दिवस के दिन घटित इस खौफनाक वारदात ने न सिर्फ पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि स्थानीय पुलिस, प्रशासन और शासन के उस तंत्र पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं जो महिला सुरक्षा के नाम पर हर दिन लच्छेदार दावे करता है। इस बर्बरता के बाद आम जनता में शासन व पुलिस प्रशासन के ढुलमुल रवैये को लेकर जबरदस्त गुस्सा और भारी आक्रोश देखा जा रहा है। स्वतंत्रता दिवस के दिन जघन्य अपराध, पुलिस की मुस्तैदी पर उठे गंभीर सवाल प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना 15 अगस्त की है जब पीड़िता रोजाना की तरह स्कूल गई थी। छुट्टी होने के बाद जब वह तय समय पर घर नहीं पहुंची, तो अनहोनी की आशंका से चिंतित परिजन उसकी तलाश में स्कूल की ओर भागे, लेकिन छात्रा का कोई सुराग नहीं मिला। इसी दौरान सीधी क्षेत्र के दो कार सवार युवकों ने छात्रा का अपहरण कर लिया था। आरोपी उसे जंगल की सुनसान जगह पर ले गए, जहां एक आरोपी ने उसके साथ हैवानियत की हदें पार कीं और दूसरा कार चला रहा था। जैसे-तैसे आरोपियों के चंगुल से बचकर घर पहुंची किशोरी ने जब परिजनों को अपनी आपबीती सुनाई, तो परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई। 16 अगस्त को परिजन छात्रा को लेकर जैतपुर थाने पहुंचे, तब जाकर पुलिस महकमे में हड़कंप मचा।
प्रशासनिक सुस्ती और फरार आरोपियों पर भड़की जनता, जवाबदेही तय करने की मांग। घटना के इतने संवेदनशील होने के बावजूद आरोपियों की अब तक गिरफ्तारी न होना पुलिस की कार्यप्रणाली पर बड़ा धब्बा है। जैतपुर थाना प्रभारी जय प्रकाश शर्मा के अनुसार, छात्रा के बयानों के आधार पर सीधी क्षेत्र के दोनों नामजद आरोपियों के खिलाफ अपहरण और दुष्कर्म सहित अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर तलाश की जा रही है। लेकिन बड़ा सवाल यह उठता है कि खुलेआम वारदात को अंजाम देकर आरोपी फरार कैसे हो गए? क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि पुलिस और प्रशासन की लापरवाही के कारण ही अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। जिम्मेदार वरिष्ठ अधिकारियों को केवल एफआईआर दर्ज करने तक सीमित न रहकर तत्काल ठोस कार्रवाई करनी होगी, वरना जनता सड़कों पर उतरने को मजबूर होगी।
