प्रशासनिक समीक्षा में खुली दावों की पोल, सरकारी योजनाओं को लगा रहे अड़ंगा

कलेक्टर की टीएल बैठक में उजागर हुई विभागों की ढिलाई,131 बच्चे साइकिल से महरूम,कई आंगनबाड़ियों में अब तक बिजली नहीं 


Junaid Khan - शहडोल। जिले में शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों की जमीनी हकीकत का सच एक बार फिर प्रशासनिक बैठकों के बंद कमरों में उजागर हुआ है। कलेक्टर पार्थ जायसवाल द्वारा आयोजित समय-सीमा (TL) की साप्ताहिक समीक्षा बैठक के दौरान यह बात साफ सामने आई कि विभागीय अधिकारियों की लचर कार्यशैली और उदासीनता के कारण अंतिम पंक्ति के पात्र हितग्राहियों तक सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर नहीं पहुँच पा रहा है। स्कूली छात्र-छात्राओं को नि:शुल्क दी जाने वाली साइकिल वितरण प्रक्रिया से लेकर आंगनबाड़ी केंद्रों के विद्युतीकरण तथा पीएम आवास योजना जैसे बेहद संवेदनशील मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों की घोर लापरवाही उजागर हुई है। कलेक्टर ने सख्त रवैया अपनाते हुए शिक्षा विभाग, जनजातीय कार्य विभाग, विद्युत मंडल एवं नगरीय निकायों के आला अफसरों को कार्यप्रणाली में सुधार लाने और लंबित कार्यों को अविलंब पूरा करने की हिदायत दी है।

साइकिल वितरण और आधार अपडेशन में भारी लापरवाही

समीक्षा के दौरान डीपीसी, उपसंचालक शिक्षा तथा सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग के कार्यों की समीक्षा की गई। बैठक में सामने आया कि जिले में अभी भी 131 पात्र स्कूली बच्चे साइकिल वितरण योजना का लाभ पाने से वंचित हैं। जिस पर कलेक्टर ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए अन्य जनपदों के पात्र विद्यार्थियों को तत्काल साइकिल वितरित कराने के सख्त निर्देश दिए। इसके अलावा, स्कूलों में विद्यार्थियों के आधार अपडेशन की गति अत्यंत धीमी पाए जाने पर स्कूलवार कार्ययोजना तैयार कर कार्य शीघ्र पूरा करने को कहा गया। हालांकि, डीपीसी ने दावा किया कि 97.9 प्रतिशत बच्चों का नामांकन पूर्ण कर लिया गया है, लेकिन शेष कार्य की धीमी रफ्तार अधिकारियों की मंशा पर सवाल खड़े करती है।

अंधेरे में आंगनबाड़ियां, आवास और स्ट्रीट वेंडर्स योजना की रफ्तार भी सुस्त 

शिक्षा के साथ-साथ जिले के अन्य बुनियादी विभागों का प्रदर्शन भी चिंताजनक पाया गया। जिले की कई आंगनबाड़ियों और स्कूलों में आज तक बिजली कनेक्शन तक उपलब्ध नहीं कराया जा सका है, जिस पर कलेक्टर ने कार्यपालन यंत्री विद्युत मंडल को निर्देशित किया है कि एक माह के भीतर सभी शेष स्कूलों एवं सक्षम आंगनबाड़ी केंद्रों में अनिवार्य रूप से विद्युत कनेक्शन चालू किए जाएं। वहीं, प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना की समीक्षा में हितग्राहियों को समय पर किश्तें जारी न होने और निर्माण में देरी होने की बात सामने आई, जिस पर संबंधित विभागीय अधिकारियों को प्रगति लाने तथा निर्माण शीघ्र पूर्ण कराने के निर्देश दिए गए। इसी प्रकार, शहरी निकायवार पीएम स्ट्रीट वेंडर योजना में प्रकरणों की संख्या बढ़ाने और पात्र दुकानदारों को समय पर ऋण व सहायता वितरित करने की ताकीद दी गई। समीक्षा बैठक से यह स्पष्ट हो गया है कि यदि कलेक्टर स्वयं कड़ा रुख न अपनाएं, तो जिम्मेदार अधिकारी जनकल्याणकारी योजनाओं को फाइलों में ही दबाकर रखने में कोई कसर नहीं छोड़ते।

Previous Post Next Post