कक्षाओं में टपकती छतें, नया भवन तैयार फिर भी कलेक्ट्रेट की चौखट पर न्याय की गुहार

शिक्षा पर सरकारी दावों और बजट के बावजूद बदहाल व्यवस्था,जिम्मेदार महकमों की उदासीनता पर जन आक्रोश 


Junaid Khan - शहडोल। संभागीय मुख्यालय के उत्कृष्ट शिक्षण संस्थानों का दावा कागजों में भले ही अव्वल नजर आता हो, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी छात्राओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। मध्य प्रदेश शासन द्वारा शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और संभाग स्तर पर करोड़ों रुपये के भारी-भरकम बजट के आवंटन के बावजूद धरातल पर विभागीय अमले की सुस्ती खत्म होने का नाम नहीं ले रही। शुक्रवार को कलेक्ट्रेट परिसर में उस वक्त प्रशासनिक व्यवस्थाओं की कलई खुल गई, जब 'शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय उत्कृष्ट रघुराज क्रमांक-2' की कक्षा 11वीं की छात्राएं अपनी जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करने के बजाय सीधे कलेक्टर की चौखट पर आ खड़ी हुईं। छात्राओं का सीधा आरोप था कि जिस जर्जर भवन में उनकी कक्षाएं संचालित हो रही हैं, वहां छतों से पानी टपक रहा है और कमरों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। विडंबना यह है कि नया आधुनिक स्कूल भवन बनकर पूरी तरह तैयार खड़ा है, लेकिन विभागीय तालमेल और अफसरों की हीलाहवाली के चलते कक्षाओं को नए भवन में स्थानांतरित नहीं किया जा रहा है।

अधिकारियों की बेरुखी और आम जनता की सराहना 

स्कूल प्रबंधन द्वारा शिकायतों की निरंतर अनदेखी किए जाने के बाद इन जागरूक छात्राओं ने लोकतांत्रिक ढंग से सीधे जिले के शीर्ष अधिकारियों तक अपनी बात पहुंचाने की जो हिम्मत दिखाई, उसकी शहर के प्रबुद्ध नागरिकों और अभिभावकों ने खुले दिल से सराहना की है। जनता का स्पष्ट कहना है कि जब सरकार 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' जैसे अभियानों पर जोर दे रही है, तब व्यवस्थापकों की लापरवाही के कारण बेटियों को सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। कलेक्ट्रेट पहुंचीं इन छात्राओं को घंटों इंतजार के बाद केवल इसलिए मायूस लौटना पड़ा क्योंकि आला अधिकारी शासकीय 'जन विश्वास अभियान' के दौरों में व्यस्त थे। वहां मौजूद कर्मचारियों ने छात्राओं का ज्ञापन लेकर उन्हें सोमवार को आने की बात कहकर चलता कर दिया। यह पहली बार नहीं है जब जिले में ऐसा दृश्य दिखा हो; इससे पूर्व भी विचारपुर क्षेत्र की छात्राएं 8 किलोमीटर पैदल चलकर अपनी बदहाली सुनाने मुख्यालय पहुंची थीं।

दो विभागों के फेर में उलझा भविष्य, तत्काल कार्रवाई की दरकार

जिले की शैक्षणिक कमान शिक्षा विभाग और जनजातीय कार्य विभाग के संयुक्त दायित्वों में बंटी हुई है, लेकिन दोनों ही विभागों के जिम्मेदार अधिकारी अपनी जवाबदेही से पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं। सरकारी खजाने से सुविधाओं के विस्तार के लिए जारी होने वाली भारी धनराशि का लाभ सीधे विद्यार्थियों तक क्यों नहीं पहुंच रहा, यह अब गंभीर जांच का विषय बन चुका है। अभिभावकों, छात्र संगठनों और जागरूक नागरिकों ने जिला प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि टपकती छतों के नीचे पढ़ाई करने को मजबूर छात्राओं को तत्काल प्रभाव से नए भवन में शिफ्ट किया जाए और जानबूझकर देरी करने वाले स्कूल प्रबंधन व संबंधित विभागीय अधिकारियों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कदम उठाए जाएं, ताकि बेटियों की सुरक्षा और पढ़ाई दोनों सुनिश्चित हो सके।

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