अमृत भारत योजना में घटिया निर्माण की खुली पोल,दिल्ली से आई टीम ने पकड़ी भारी लापरवाही,सीपेज और जलभराव पर अफसरों को फटकार
Junaid Khan - शहडोल। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘अमृत 2.0’ योजना के तहत शहडोल रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास और कायाकल्प के नाम पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत में विभागीय अफसरों और ठेकेदारों की मिलीभगत से निर्माण कार्यों में भारी लीपापोती की जा रही है। लंबे समय से स्थानीय नागरिकों और जागरूक यात्रियों द्वारा निर्माण की लचर गुणवत्ता और धांधली को लेकर आवाज उठाई जा रही थी, जिस पर अब दिल्ली से आई उच्चस्तरीय जांच टीम की मुहर लग गई है। रेलवे बोर्ड के डिप्टी डायरेक्टर स्तर के वरिष्ठ अधिकारी जतिन कुमार ने जब दल-बल के साथ स्टेशन परिसर का औचक व सघन निरीक्षण किया, तो विकास के दावों के पीछे छिपी बदहाली और घटिया निर्माण की परतें एक-एक कर उधड़ती नजर आईं। जांच के दौरान दिल्ली से पहुंचे अधिकारी ने स्टेशन परिसर के अंदर और बाहर चल रहे एक-एक निर्माण कार्य का बारीकी से तकनीकी मुआयना किया। इस दौरान नई बनी दीवारों में गंभीर सीपेज (सीलन) और मुख्य सीढ़ियों के ठीक नीचे हुए भारी जलभराव को देखकर अधिकारी दंग रह गए और उन्होंने मौके पर मौजूद स्थानीय रेल अधिकारियों व निर्माण एजेंसी के नुमाइंदों को जमकर फटकार लगाई। डिप्टी डायरेक्टर ने दो टूक शब्दों में नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि करोड़ों के बजट से जनता की सुविधा के लिए बन रहे आधुनिक स्टेशन में ऐसी तकनीकी खामियां और घटिया कारीगरी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मौके पर पाई गई तमाम त्रुटियों, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता में कमी और अधोसंरचना की खामियों की विस्तृत सूची तैयार कर दिल्ली तलब की गई है। क्षेत्रीय जनता और दैनिक रेल यात्रियों का कहना है कि स्टेशन के आधुनिकीकरण के नाम पर केवल दिखावे का काम चल रहा है, जबकि गुणवत्ता के नाम पर पूरी तरह से लीपापोती हो रही है। स्थानीय रेल प्रशासन व जिम्मेदार पर्यवेक्षकों की नाक के नीचे ठेकेदार घटिया सामग्री का इस्तेमाल कर सरकारी खजाने को चूना लगा रहे हैं। यदि दिल्ली की टीम इसी तरह निष्पक्ष रुख अपनाकर लापरवाह अधिकारियों और ठेका कंपनी पर कठोर पेनाल्टी व ब्लैकलिस्टिंग की कार्रवाई करती है, तभी जनता के टैक्स के पैसे का सही उपयोग हो सकेगा। अब देखना यह है कि निरीक्षण में पकड़ी गई गंभीर खामियों के बाद विभागीय स्तर पर जिम्मेदार इंजीनियरों और लापरवाह ठेकेदारों पर गाज गिरती है या फिर इस पूरे मामले को भी विभागीय फाइलों में दबा दिया जाएगा।
