कोटमा में सरकारी जमीन पर भू-माफिया का डाका, प्रशासन मौन

जनपद उपाध्यक्ष शक्ति सिंह ने खोला मोर्चा,अरबों की भूमि पर प्लाटिंग के खेल में रसूखदारों की साठगांठ उजागर


Junaid Khan - शहडोल। ग्राम पंचायत कोटमा में बेशकीमती शासकीय भूमि को हड़प कर अवैध प्लाटिंग करने का संगठित खेल बेखौफ जारी है, जबकि जिम्मेदार प्रशासनिक अमला आंखें मूंदे बैठा है। राष्ट्रीय राजमार्ग से सटी करोड़ों-अरबों रुपये की सरकारी जमीन को भू-माफिया और स्थानीय रसूखदार मिलीभगत कर खुर्द-बुर्द करने में जुटे हैं। इस पूरे गोरखधंधे के खिलाफ जनपद पंचायत सोहागपुर के उपाध्यक्ष शक्ति सिंह ने साहसिक पहल करते हुए जनता के हक की आवाज उठाई है। उन्होंने सीधे तहसीलदार के समक्ष शिकायत दर्ज कराकर स्पष्ट किया कि खसरा क्रमांक 227, 228, 71, 74, 796, 898 और 36 जैसी महत्वपूर्ण शासकीय भूमियों पर सुनियोजित तरीके से अवैध कब्जा कर निर्माण कार्य और प्लाटिंग का खेल चल रहा है। जनहित के मुद्दों पर जनप्रतिनिधि की इस तीखी और स्पष्ट घेराबंदी की स्थानीय जनता खुले दिल से सराहना कर रही है। अधिकारियों की फाइलों में दफन हुई पुरानी कार्रवाई। राजस्व विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। यह कोई नया मामला नहीं है। इससे पूर्व भी तत्कालीन तहसीलदार द्वारा इन अवैध कब्जों को हटाने के लिए कागजी प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन रसूखदारों के दबाव या प्रशासनिक उदासीनता के चलते कार्रवाई को बीच में ही ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। वर्षों से जमे अधिकारियों और मैदानी राजस्व अमले की संदिग्ध चुप्पी ने अतिक्रमणकारियों के हौसले इतने बुलंद कर दिए हैं कि ग्राम पंचायत के उप सरपंच सहित कई स्थानीय लोग खुलेआम सरकारी जमीन पर अपना आधिपत्य जमा रहे हैं। यदि समय रहते इन खसरा नंबरों की जमीनों को सुरक्षित नहीं किया गया, तो नेशनल हाईवे किनारे स्थित यह बहुमूल्य सरकारी संपत्ति पूरी तरह निजी स्वार्थों की भेंट चढ़ जाएगी। तत्काल सीमांकन और बेदखली की मांग, आंदोलन की चेतावनी जनपद उपाध्यक्ष शक्ति सिंह ने प्रशासन को दो-टूक चेताते हुए मांग की है कि तत्काल राजस्व टीम गठित कर विवादित सभी खसरा नंबरों का विधिवत सीमांकन (नाप-जोख) कराया जाए और अतिक्रमणकारियों पर बुलडोजर चलाकर सरकारी जमीन को कब्जामुक्त किया जाए। उन्होंने प्रशासन को आगाह किया है कि जनता की संपत्ति पर डाका डालने वाले चाहे कितने भी प्रभावशाली क्यों न हों, उनके विरुद्ध सख्त वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। यदि राजस्व प्रशासन ने अब भी हीलाहवाली या लीपापोती की कोशिश की, तो इस घोर लापरवाही और मिलीभगत के खिलाफ जनहित में उग्र आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा।

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