थाली में कीड़े और बदहाल व्यवस्थाओं से तंग आकर 11 किमी चलकर कलेक्ट्रेट पहुंचीं 28 छात्राएं, प्रशासनिक महकमे में हड़कंप,3 सदस्यीय जांच दल गठित
Junaid Khan - शहडोल। व्यवस्था की मार और प्रशासनिक उपेक्षा जब बर्दाश्त से बाहर हो गई, तो कंचनपुर शिक्षा परिसर की बेटियों ने सिस्टम को आईना दिखाने के लिए सड़कों पर उतरने का फैसला किया। बुधवार सुबह तेज बारिश के बीच भीगते हुए करीब 11 किलोमीटर का लंबा सफर पैदल तय कर 28 छात्राएं सीधे कलेक्ट्रेट जा पहुंचीं। छात्राओं का सीधा और बेबाक आरोप है कि हॉस्टल में उन्हें बुनियादी सुविधाएं तक मयस्सर नहीं हैं; खाने में कीड़े निकल रहे हैं और नाश्ता महज खानापूर्ति बनकर रह गया है। शासन-प्रशासन द्वारा छात्रावासों के नाम पर कागजों में चमकाई जाने वाली दावों की हकीकत इन मासूम बेटियों के भीगे कपड़ों और बयां किए गए दर्द ने पूरी तरह बेनकाब कर दी। छात्राओं के इस अदम्य साहस और व्यवस्था के खिलाफ एकजुटता की पूरे जिले में सराहना हो रही है।
कलेक्ट्रेट में छात्राओं के इस जत्थे के पहुंचते ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने छात्राओं को अपने चेंबर में बुलाकर एक-एक कर उनकी समस्याएं सुनीं और लिखित शिकायत दर्ज कराई। कलेक्टर ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एसडीएम सोहागपुर अमृता गर्ग के नेतृत्व में जिला शिक्षा अधिकारी अतुल चौधरी और तहसीलदार की 3 सदस्यीय संयुक्त जांच टीम गठित कर दी है, जिसे तीन दिन के भीतर पूरे मामले की तथ्यात्मक जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। इससे पहले जब छात्राओं के पैदल मार्च की सूचना जनजातीय कार्य विभाग के सहायक आयुक्त आनंद राय सिन्हा को मिली, तो उन्होंने रास्ते में छात्राओं को समझाने और रोकने का प्रयास किया। हालांकि, बेटियों का संकल्प इतना अडिग था कि वे सहायक आयुक्त की दलीलों को दरकिनार कर केवल कलेक्टर से ही सीधी बात करने की जिद पर अड़ी रहीं और सहायक आयुक्त को भी उनके साथ पैदल चलना पड़ा। दूसरी तरफ, पूरे मामले में हॉस्टल प्रबंधन अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए अंदरूनी सियासत का राग अलाप रहा है। कंचनपुर शिक्षा परिसर की अधीक्षिका ममता सिंह का कहना है कि उन्हें प्रभार संभाले अभी महज 6 महीने हुए हैं और वे व्यवस्थाएं दुरुस्त कर रही हैं, जो शायद पूर्व अधीक्षिका को रास नहीं आ रहा। प्रबंधन का तर्क है कि कुल 490 छात्राओं में से केवल 28 का ही विरोध सुनियोजित साजिश का हिस्सा हो सकता है। बहरहाल, कारण चाहे जो भी हो, लेकिन हॉस्टल की चारदीवारी से निकलकर बारिश में 11 किमी पैदल चलकर आई बेटियों ने जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कलेक्टर के निर्देश पर छात्राओं को सुरक्षित बस के जरिए हॉस्टल भेजा गया है, वहीं अब सबकी निगाहें तीन दिन बाद आने वाली जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।
