भुईबांध भूमि विवाद,अदालत से चपरा परिवार को बड़ी राहत कलेक्टर,एसडीएम और तहसीलदार को दखल न देने के निर्देश

न्याय व्यवस्था पर जनता का भरोसा मजबूत 


Junaid Khan - शहडोल। संभागीय मुख्यालय के बहुचर्चित ग्राम भुईबांध स्थित जमीन विवाद में माननीय न्यायालय का एक युगांतरकारी और नजीर पेश करने वाला फैसला सामने आया है। अदालत ने मामले की विधिक स्थिति और तथ्यों का सूक्ष्म परीक्षण करते हुए वादी चपरा परिवार के पक्ष में स्पष्ट आदेश पारित कर प्रशासनिक दखलअंदाजी पर पूरी तरह रोक लगा दी है। केस क्रमांक RCSA 138/2025 में पारित इस आदेश के तहत न्यायालय ने कलेक्टर शहडोल, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) तथा तहसीलदार को निर्देशित किया है कि वे ग्राम भुईबांध के खसरा क्रमांक 72 के बटांक से संबंधित भूमि पर वादी के शांतिपूर्ण उपयोग और उपभोग में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप या अवरोध उत्पन्न न करें। इस निर्णय ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि लोकतंत्र में संविधान और विधि का शासन ही सर्वोपरि है, जिससे आम जनता और पीड़ित पक्ष का न्यायपालिका पर अटूट विश्वास और अधिक सुदृढ़ हुआ है। उल्लेखनीय है कि किरण टॉकीज मार्ग एवं वार्ड क्रमांक 32 के समीपवर्ती इस बेशकीमती भूखंड को लेकर पिछले लंबे समय से प्रशासनिक हलकों और स्थानीय स्तर पर भारी खींचतान व तनाव का माहौल बना हुआ था। राजस्व अमले की लगातार बढ़ती सक्रियता और कार्यप्रणाली को लेकर भी शहर भर में तरह-तरह की चर्चाएं थीं। सौरभ चपरा एवं उनके परिवार द्वारा विधिक प्रक्रिया पर अडिग रहकर लड़ी गई इस कानूनी लड़ाई में आए स्थगन आदेश ने अब स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। न्यायालय के कड़े रुख के बाद जिम्मेदार राजस्व अधिकारियों की कार्यशैली पर जहां सवाल खड़े हुए हैं, वहीं दूसरी ओर शासन-प्रशासन के लिए भी यह स्पष्ट संदेश गया है कि किसी भी नागरिक के विधिक अधिकारों का अतिक्रमण न्याय के तराजू पर कतई स्वीकार्य नहीं होगा। अदालत के इस निर्णायक आदेश के बाद स्थानीय नागरिकों, प्रबुद्ध वर्ग और व्यापारियों ने न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता की सराहना की है। लोगों का कहना है कि जब प्रशासनिक तंत्र के मनमाने रवैये से आम जनता खुद को असहाय महसूस करती है, तब केवल माननीय न्यायालय ही न्याय और सुरक्षा की अंतिम उम्मीद बनकर सामने आता है। विधि सम्मत इस आदेश ने जहां प्रशासनिक अधिकारियों की एकतरफा कार्रवाई पर विधिक अंकुश लगा दिया है, वहीं क्षेत्रीय स्तर पर वर्षों से चले आ रहे विवाद को एक निर्णायक विधिक दिशा भी प्रदान की है। संबंधित अधिकारियों को अब न्यायालय की गरिमा और आदेशों का अक्षरश,पालन सुनिश्चित करना होगा।

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