शहडोल को मिले सामान्य विधानसभा का हक पुनर्गठन आयोग के दौरे से गरमाई सियासत

संभाग मुख्यालय को अनारक्षित सीट बनाने की मांग बुलंद 


Junaid Khan - शहडोल। मध्य प्रदेश प्रशासनिक इकाई पुनर्गठन आयोग के शहडोल आगमन के साथ ही संभाग मुख्यालय की राजनीति में बड़ा भूचाल आ गया है। पूर्व मुख्य सचिव व आयोग के अध्यक्ष एस.एन. मिश्रा तथा आयोग के सचिव अक्षय कुमार सिंह के बुधवार को शहडोल प्रवास के दौरान स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने वर्षों पुरानी लंबित मांग को लेकर पुरजोर आवाज उठाई। शहर के प्रबुद्ध और संभ्रांत नागरिकों के एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने आयोग के पदाधिकारियों से सीधी मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और दो टूक शब्दों में मांग रखी कि शहडोल नगर को स्वतंत्र विधानसभा बनाकर इसे पूर्व की तरह 'अनारक्षित (सामान्य) सीट' घोषित किया जाए। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2002 के परिसीमन अधिनियम की सिफारिशों के चलते 2008 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले शहडोल की पहचान रही सोहागपुर (सामान्य) विधानसभा सीट का अस्तित्व समाप्त कर दिया गया था और मुख्यालय को जयसिंहनगर (आरक्षित) सीट के अधीन कर दिया गया। इस विसंगति को दूर करने के लिए नागरिक मंच और जनमानस ने एक बार फिर सरकार और आयोग के समक्ष अपनी मजबूत दावेदारी पेश की है। प्रतिनिधिमंडल में शामिल प्रमुख नागरिक दीपक मिश्रा 'गौतम', डॉ. जी.डी. सिंह, सुशील खोड़ियारा, देवेन्द्र श्रीवास्तव, इंद्रजीत मिश्रा और अशोक सर्राफ ने आयोग को वस्तुस्थिति से अवगत कराते हुए कहा कि संभाग मुख्यालय होने के नाते शहडोल की जनसांख्यिकी और प्रशासनिक स्वरूप सामान्य सीट की पात्रता को पूरी तरह सिद्ध करता है। इसके साथ ही भौगोलिक विसंगतियों को ठीक करने के उद्देश्य से उमरिया जिले की सीमा में स्थित घुनघुटी क्षेत्र को भी शहडोल जिले में शामिल करने का ठोस प्रस्ताव रखा गया। जन प्रतिनिधियों और नागरिकों का स्पष्ट कहना है कि जनता की यह मांग पूरी तरह न्यायसंगत और प्रशासनिक सुविधा के अनुकूल है। अब देखना यह होगा कि राजधानी स्तर पर बैठे उच्चाधिकारी और सरकार इस जनभावना को आयोग की अंतिम रिपोर्ट में किस रूप में शामिल करते हैं, क्योंकि चुनावी चौसर पर यह मुद्दा सीधे तौर पर विंध्य क्षेत्र की राजनीति को प्रभावित करने का माद्दा रखता है।

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