पका मांस और सींग मिलने पर दो आरोपी जेल,लेकिन असली शिकारी और वन्यजीव सुरक्षा प्रणाली पर उठे तीखे सवाल
Junaid Khan - शहडोल। दक्षिण वनमंडल शहडोल अंतर्गत खन्नौधी वन परिक्षेत्र में वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों और गश्ती दल की घोर लापरवाही का एक बड़ा मामला उजागर हुआ है। ग्राम सलदा में मुखबिर की सूचना पर हुई कार्रवाई के दौरान बंसीलाल बैगा (42) के घर दबिश देकर वन विभाग ने पके हुए चीतल का मांस, चावल और चीतल का सींग बरामद किया है। पूछताछ के बाद सह-आरोपी संतोष सिंह (31) को गिरफ्तार कर दोनों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की विभिन्न संगीन धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जेल भेज दिया गया है। परंतु, इस पूरी कार्रवाई ने वन विभाग और स्थानीय प्रशासनिक निगरानी तंत्र के दावों की कलई खोलकर रख दी है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर वन परिक्षेत्र में खुलेआम चीतल का शिकार हो गया और रोज गश्त का ढिंढोरा पीटने वाला वन अमला खर्राटे भरता रहा? जब तक मांस घर में पककर तैयार नहीं हो गया, तब तक विभाग के मैदानी कर्मचारियों को भनक तक क्यों नहीं लगी? क्या वन विभाग का काम सिर्फ मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई करके इतिश्री कर लेना और अपनी नाकामी छुपाना रह गया है? यह घटना स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि क्षेत्र में वन्यप्राणियों का शिकार बदस्तूर जारी है और जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ वातानुकूलित दफ्तरों में बैठकर सुरक्षा के कागजी आंकड़े बना रहे हैं। सबसे बड़ा गंभीर विषय यह है कि पुलिस व वन विभाग अब तक यह भी पता नहीं लगा सका है कि शिकार किस सटीक जगह पर हुआ और इसमें कौन-कौन सा गिरोह शामिल था। क्या दो छोटे मोहरों को जेल भेजकर मुख्य शिकारियों और इस तंत्र के पीछे बैठे सरपरस्तों को बचाने का खेल खेला जा रहा है? वन्यजीव संरक्षण के नाम पर हर साल लाखों-करोड़ों रुपये का बजट डकारने वाला वन अमला और उसके आला अधिकारी आखिर किसकी जवाबदेही तय करेंगे? यदि जंगल में इस तरह राष्ट्रीय धरोहर वन्यजीवों का संहार होता रहा और जिम्मेदार अफसर कुंभकर्णी नींद सोते रहे, तो आने वाले समय में क्षेत्र से दुर्लभ वन्यप्राणियों का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा। क्षेत्र की जनता अब जिला प्रशासन और शासन से सवाल पूछ रही है कि आखिर ऐसी घोर लापरवाही बरतने वाले वन अधिकारियों और संबंधित मैदानी अमले पर कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई कब होगी?
