डिंडोरी पुलिस ने दबोची 16 लाख की अवैध शराब,स्थानीय सोहागपुर पुलिस और आबकारी विभाग पर उठे गंभीर सवाल,क्या संरक्षण में चल रहा था अवैध सिंडिकेट?
Junaid Khan - शहडोल। जिले में आबकारी विभाग और स्थानीय पुलिस प्रशासन के इकबाल को धत्ता बताते हुए शराब ठेकेदारों का अवैध तस्करी का खेल बेखौफ जारी है। जिले के भीतर आबकारी व्यवस्था पूरी तरह नतमस्तक नजर आ रही है, जिसका ताजा प्रमाण डिंडोरी जिले की शहपुरा पुलिस की कार्रवाई से सामने आया है। शहपुरा पुलिस ने 31 जुलाई की रात विक्की ढाबा के पास छापा मारकर लगभग 1500 पेटी अवैध शराब जब्त की, जिसकी अनुमानित कीमत 16 लाख रुपये बताई जा रही है। जब्त शराब की यह बड़ी खेप शहडोल के लाइसेंसी ठेकेदार द्वारा जबलपुर भेजी जा रही थी। शहपुरा थाना प्रभारी अनुराग जामदार के अनुसार, वाहन चालक ने स्पष्ट किया कि शराब शहडोल की दुकान से ही लोड की गई थी। इसके बाद जब शहपुरा पुलिस 2 अगस्त को शहडोल के हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी स्थित शराब ठेकेदार के ठिकाने पर कार्रवाई करने पहुंची, तो वहां हड़कंप मच गया और आरोपी मौका पाकर फरार हो गए। इस पूरे प्रकरण में शहडोल की स्थानीय सोहागपुर पुलिस और आबकारी विभाग की संदिग्ध कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। डिंडोरी पुलिस जब छापेमारी के लिए पहुंची तो सोहागपुर पुलिस ने आरोपियों को खुद थाने बुलवाने का भरोसा दिया, लेकिन कुछ ही देर में आरोपी चकमा देकर फरार होने में कामयाब हो गए। यह घटनाक्रम स्पष्ट करता है कि स्थानीय तंत्र की ढिलाई या संलिप्तता के कारण ठेकेदार बेखौफ होकर अंतरप्रांतीय व अंतरजिला तस्करी का नेटवर्क चला रहे हैं। शहडोल में मीरालक्ष्मी एग्रो कंपनी के पास 7 दुकानों का ठेका है, जिसके संचालक मंडल में लक्ष्मी प्रकाश जायसवाल, संदीप जायसवाल, स्वाति जायसवाल, संपुता जायसवाल और अंबिकापुर (छत्तीसगढ़) के अन्य लोग शामिल बताए जा रहे हैं। छापेमारी के दौरान सीताशरण सहित अन्य संदिग्द्ध लोग फरार होने में सफल रहे। जिले के जिम्मेदार अधिकारी अपनी प्रशासनिक नाकामियों को छिपाने के लिए महज बहानों का सहारा ले रहे हैं। आबकारी निरीक्षक रजनीश त्रिपाठी का यह बयान कि 'स्टाफ की कमी के कारण कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं और तस्करी ज्यादातर रात में होती है', विभाग की घोर लापरवाही और लाचारी को बयां करता है। सवाल यह उठता है कि क्या स्टाफ की कमी का बहाना बनाकर ठेकेदारों को 16-16 लाख रुपये की शराब की तस्करी करने की खुली छूट दे दी जाएगी? डिंडोरी पुलिस की इस बड़ी कार्रवाई ने शहडोल के आबकारी विभाग और पुलिस महकमे के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। यदि दूसरे जिले की पुलिस आकर शहडोल के ठेकेदारों पर नकेल कस रही है, तो स्थानीय जिम्मेदार अधिकारी अब तक क्या कर रहे थे? शासन-प्रशासन की इस खामोशी और सुस्ती पर अब जनता और मीडिया सीधे सवाल उठा रही है कि इस अवैध सिंडिकेट के असली संरक्षकों पर गाज कब गिरेगी।
