मासूमों की सुरक्षा पर एक्शन मोड में शहडोल पुलिस,'खबर का असर', बेकाबू चालकों पर गिरा कानून का डंडा, 10 ऑटो जब्त

प्रशासन और पुलिस कप्तान की तत्परता से थमा नेशनल हाईवे पर जानलेवा सफर, यातायात प्रभारी अमित सिंह विश्वकर्मा ने संभाली कमान; RTO और स्कूल प्रबंधन की भी तय हो जवाबदेही 


Junaid Khan - शहडोल। सड़क सुरक्षा और नौनिहालों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले मनचले ऑटो चालकों के खिलाफ शहडोल पुलिस ने जबरदस्त प्रशासनिक सख्ती का परिचय दिया है। मीडिया में प्रमुखता से उजागर की गई उस खौफनाक तस्वीर का त्वरित संज्ञान लेते हुए, जिसमें NH-43 पर 5-सीटर ऑटो में 18 से अधिक मासूम बच्चों को भूसे की तरह भरकर दौड़ाया जा रहा था, पुलिस अधीक्षक डॉ. संजय कुमार अग्रवाल ने तत्काल कड़े रुख का परिचय दिया। एसपी के सख्त निर्देशों के परिपालन में यातायात पुलिस विभाग ने अमलाई थाना क्षेत्र और हाईवे पर विशेष चेकिंग अभियान छेड़ते हुए नियम विरुद्ध संचालित हो रहे 10 ऑटो वाहनों को मौके पर ही जब्त कर लिया। अमलाई पुलिस ने वायरल वीडियो में दिख रहे बिछिया निवासी चालक भोला सिंह पिता चंद्र कुमार सिंह गोंड के ऑटो को भी जब्त कर वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रशासनिक अधिकारियों की इस त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की हर तरफ सराहना हो रही है। अखबार की खबर बनी सुरक्षा का कवच, पुलिस कप्तान की पहल पर जागा अमला मीडिया द्वारा जनहित में उठाई गई इस गंभीर समस्या को शहडोल पुलिस प्रशासन ने न केवल गंभीरता से लिया, बल्कि इसे 'खबर का असर' बनाते हुए धरातल पर कड़ा संदेश दिया है। पुलिस अधीक्षक डॉ. संजय कुमार अग्रवाल के स्पष्ट निर्देश के बाद यातायात थाना प्रभारी अमित सिंह विश्वकर्मा की अगुवाई में पुलिस बल ने सड़क पर उतरकर चालकों की क्लास लगाई। अभियान के दौरान बिना परमिट, रजिस्ट्रेशन, फिटनेस प्रमाण पत्र, पीयूसी और ड्राइविंग लाइसेंस के सरपट दौड़ रहे वाहनों को रोका गया। पुलिस ने सख्त चेतावनी दी है कि बच्चों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यातायात प्रभारी अमित सिंह विश्वकर्मा के इस एक्टिव मोड और जमीनी कार्रवाई की स्थानीय मीडिया और आम जनता ने भूरि-भूरि प्रशंसा की है, साथ ही मांग की है कि यह अभियान केवल एक दिन का न होकर निरंतर जारी रहे। 

केवल चालकों पर ही क्यों? RTO और स्कूल प्रबंधन भी संभालें अपनी जिम्मेदारी

जहाँ एक तरफ पुलिस प्रशासन और स्थानीय थाना पुलिस अपनी तत्परता दिखाकर चालकों पर कार्रवाई कर रही है, वहीं इस पूरे मामले में प्रादेशिक परिवहन कार्यालय (RTO) और संबंधित स्कूल प्रबंधनों की भूमिका पर भी सवाल कायम हैं। महज चंद रुपयों के लालच में ऑटो चालक तो बच्चों की जान दांव पर लगाते ही हैं, लेकिन स्कूल की चौखट से 3 गुना से अधिक क्षमता में बच्चों को रवाना होते देखकर आंखें मूंदने वाले स्कूल प्रबंधन भी बराबर के कसूरवार हैं। पुलिस की इस मुहिम के साथ-साथ अब RTO विभाग को भी नियमित चेकिंग तंत्र मजबूत करना होगा। यदि प्रशासन, पुलिस, परिवहन विभाग और स्कूल प्रबंधन संयुक्त रूप से समन्वय बनाकर इन वाहनों पर नजर रखें, तो हाईवे पर मंडराता हादसों का खतरा हमेशा के लिए टल सकता है। शहडोल पुलिस की इस कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि कानून व्यवस्था में जनसुरक्षा ही सर्वोच्च प्राथमिकता है।

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