विराट रत्न पंडित श्री रामचंद्र शुक्ल पंचतत्व में विलीन,शहडोल ने खोया अपना महान सपूत, शोक में डूबा विंध्य क्षेत्र
Junaid Khan - शहडोल। (मध्य प्रदेश) विंध्य धरा के गौरव, प्रखर समाजसेवी एवं जिले की अत्यंत प्रतिष्ठित शख्सियत पंडित श्री रामचंद्र शुक्ल का जबलपुर स्थित अपोलो अस्पताल में इलाज के दौरान दुखद निधन हो गया। उनके देवलोकगमन की खबर फैलते ही संपूर्ण शहडोल जिले सहित प्रशासनिक, सामाजिक और न्यायिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। निष्ठा, मातृभक्ति और अद्वितीय जनसेवा से सुसज्जित उनका जीवन सदैव आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणापुंज बना रहेगा। ऐतिहासिक जन्मस्थली एवं पारिवारिक विरासत पंडित श्री रामचंद्र शुक्ल का जन्म शहडोल के उसी पावन एवं ऐतिहासिक स्थल पर हुआ था, जहाँ विंध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं भारतीय संविधान सभा के सदस्य स्व. पंडित शंभूनाथ शुक्ल जी का जन्म हुआ था। पारिवारिक पृष्ठभूमि: वे स्व. पंडित शंभूनाथ शुक्ल जी के प्रिय भतीजे, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति जस्टिस विजय कुमार शुक्ल जी के पूज्य चाचा जी तथा श्री अभिषेक शुक्ल व श्री आशुतोष शुक्ल के पिता थे। मातृभक्ति की मिसाल: खाकी से ऊपर चुना माँ का आँचल
राजकीय महाविद्यालय शहडोल से उच्च शिक्षा एवं डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय (सागर) से कानून (वकालत) की डिग्री प्राप्त करने वाले पंडित जी अत्यंत मेधावी थे। उनका चयन पुलिस अधिकारी के पद पर हुआ था और वे प्रशिक्षण के लिए इलाहाबाद (प्रयागराज) भी गए। परंतु, अपनी वृद्ध माता जी की सेवा और देखभाल को सर्वोपरि मानते हुए उन्होंने बीच में ही खाकी की प्रतिष्ठित नौकरी छोड़ दी और शहडोल वापस लौट आए। कर्तव्य और मातृभक्ति का यह अनूठा संगम विरले ही देखने को मिलता है।
खेल, शिक्षा और समाज सेवा में अविस्मर्णीय योगदान शहडोल लौटने के उपरांत उन्होंने विभिन्न दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा से किया: जिला खेल अधिकारी: शहडोल के जिला खेल अधिकारी के रूप में उन्होंने स्थानीय खेल प्रतिभाओं को मंच दिया। स्काउट एवं गाइड: भारत स्काउट एवं गाइड के माध्यम से शहडोल जिले का कुशल और प्रभावी नेतृत्व किया। शिक्षा विभाग: जिला शिक्षा विभाग शहडोल में कार्यालय अधीक्षक के पद पर रहते हुए प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ किया। नागरिक समिति: जिला नागरिक समिति शहडोल के सक्रिय सदस्य के रूप में वे जीवन की अंतिम सांसों तक जनसेवा के लिए तत्पर रहे।'विराट रत्न' से हुए थे विभूषित समाज, शिक्षा, संस्कृति और खेल जगत में उनके बहुमूल्य एवं अतुलनीय योगदान को रेखांकित करते हुए वर्ष 2010 में आयोजित संभागीय विराट महोत्सव के दौरान उन्हें 'विराट रत्न' की सर्वोच्च उपाधि से अलंकृत किया गया था। अपूरणीय क्षति पंडित श्री रामचंद्र शुक्ल जी का गोलोकवासी होना शहडोल जिले ही नहीं, बल्कि संपूर्ण मध्य प्रदेश के सामाजिक ताने-बाने के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनका सादगीपूर्ण जीवन, स्पष्टवादिता और सहृदयता हर किसी के दिल में जीवित रहेगी। ईश्वर दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें एवं शोक संतप्त परिजनों को यह व्रजपात सहने की शक्ति प्रदान करे। ॐ शांति! शांति! शांति!
